सीयूएसबी में राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस पर ‘अंतरिक्ष कानून एवं अंतरराष्ट्रीय शासन’ पर वेबिनार

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आर्यावर्त वाणी | गयाजी | 23 अगस्त 2026

गयाजी: दक्षिण बिहार केन्द्रीय विश्वविद्यालय (सीयूएसबी) के स्कूल ऑफ लॉ एंड गवर्नेंस (एसएलजी) की ओर से राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस के अवसर पर ‘पृथ्वी से परे: अंतरिक्ष कानून की उभरती चुनौतियाँ और अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष शासन का भविष्य’ विषय पर ऑनलाइन वेबिनार आयोजित किया गया।

कार्यक्रम की शुरुआत एसएलजी के प्रमुख एवं डीन प्रो. अशोक कुमार के स्वागत भाषण से हुई। उन्होंने वर्तमान समय में अंतरिक्ष कानून और अंतरिक्ष शासन के बढ़ते महत्व पर प्रकाश डाला। इसके बाद एसएलजी के सहायक प्राध्यापक मणि प्रताप ने कार्यक्रम की रूपरेखा और विषय की प्रासंगिकता पर जानकारी दी।

अंतरिक्ष के व्यावसायीकरण से बढ़ी नियामक चुनौतियां

मुख्य वक्ता सास्त्रा डीम्ड यूनिवर्सिटी, तंजावुर के सहायक प्राध्यापक अखंड प्रताप राय ने अंतरिक्ष कानून के अर्थ, स्वरूप एवं महत्व को समझाते हुए अंतरिक्ष गतिविधियों से जुड़ी समकालीन चुनौतियों पर चर्चा की।

उन्होंने अंतरिक्ष के व्यावसायीकरण, निजी संस्थाओं की बढ़ती भागीदारी, अंतरिक्ष मलबे, अंतरिक्ष गतिविधियों से उत्पन्न दायित्व, अंतरिक्ष संसाधनों के उपयोग, अंतरिक्ष के सैन्यीकरण तथा अंतरिक्ष गतिविधियों की स्थिरता जैसे विषयों पर विस्तार से प्रकाश डाला।

निजी भागीदारी के साथ प्रभावी नियमन जरूरी

विशेषज्ञ ने भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में कानून से व्यापक अंतरिक्ष शासन की दिशा में बढ़ते कदमों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी एवं वाणिज्यिक संस्थाओं की बढ़ती भागीदारी के साथ प्रभावी नियामक एवं शासन व्यवस्था की आवश्यकता और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।

उन्होंने कहा कि भारत को नवाचार, राष्ट्रीय हित, अंतरराष्ट्रीय दायित्वों तथा अंतरिक्ष के सतत एवं शांतिपूर्ण उपयोग के बीच संतुलन स्थापित करना होगा।

वैज्ञानिक प्रतिभाओं के निजी क्षेत्र में जाने पर भी चर्चा

विशेषज्ञ के साथ संवाद के दौरान सीयूएसबी के भौतिकी विभाग के प्रो. वेंकटेश सिंह ने इसरो के वैज्ञानिकों एवं वैज्ञानिक प्रतिभाओं के निजी क्षेत्र की ओर बढ़ते स्थानांतरण को लेकर चिंता व्यक्त की। इस मुद्दे पर सार्थक चर्चा हुई और अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी भागीदारी को बढ़ावा देने के साथ देश की वैज्ञानिक एवं तकनीकी क्षमताओं को मजबूत बनाए रखने की आवश्यकता पर विचार-विमर्श किया गया।

विशेषज्ञों के प्रति जताया आभार

कार्यक्रम के अंत में एसएलजी की कार्यक्रम निदेशक एवं सहायक प्राध्यापक डॉ. निहारिका सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। वेबिनार में अंतरिक्ष कानून, शासन व्यवस्था, निजी क्षेत्र की भागीदारी और भारत की वैज्ञानिक क्षमताओं से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर विचार-विमर्श हुआ।

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