गयाजी; शहर के जय प्रकाश नारायण (जेपीएन) सदर अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार से मरीजों को बड़ी राहत मिल रही है। सीमित संसाधनों के बीच अस्पताल प्रबंधन द्वारा उपचार व्यवस्था को बेहतर करने और रेफरल की संख्या कम करने के प्रयास किए जा रहे हैं। आधुनिक उपकरणों और बेहतर व्यवस्थाओं के कारण अब अस्पताल में ही गंभीर रोगों का इलाज और विभिन्न प्रकार की सर्जरी की जा रही है।
डीपीएम स्वास्थ्य नीलेश कुमार ने बताया कि जुलाई तक सदर अस्पताल में 12 प्रकार के ऑपरेशन किए जा रहे थे, जबकि अब यह संख्या बढ़कर 20 प्रकार हो गई है। इनमें सी-सेक्शन के अलावा अन्य आवश्यक सर्जरी भी शामिल हैं। उन्होंने बताया कि सेवाओं के विस्तार के लिए स्वास्थ्य विभाग से आवश्यक उपकरण और संसाधनों की मांग की गई है।
अगस्त के पहले 15 दिनों में सिर्फ 10 मरीज रेफर
रेफरल के आंकड़ों में भी कमी दर्ज की गई है। डीपीएम ने बताया कि जुलाई माह के अंतिम 15 दिनों में सदर अस्पताल से 24 मरीजों को रेफर किया गया था। वहीं अगस्त के पहले 15 दिनों में यह संख्या घटकर सिर्फ 10 रह गई। इन मरीजों को अत्यधिक गंभीर स्थिति के कारण रेफर किया गया। इनमें अंदरूनी रक्तस्राव, हृदयाघात और न्यूरो से जुड़े गंभीर मामले शामिल थे।
रात में भी सिजेरियन की मुकम्मल व्यवस्था
सिविल सर्जन डॉ. राजाराम ने बताया कि सदर अस्पताल में अब रात के समय भी सिजेरियन सेक्शन की मुकम्मल व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। जटिल प्रसव की स्थिति में महिलाओं को अस्पताल में भर्ती कर विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में उपचार किया जाता है और जरूरत पड़ने पर सिजेरियन ऑपरेशन किया जाता है।
प्रसव के दौरान होने वाले गंभीर रक्तस्राव यानी पीपीएच (Postpartum Hemorrhage) जैसे संवेदनशील मामलों का प्रबंधन भी अस्पताल के विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा किया जा रहा है। इस व्यवस्था से देर रात आने वाली गंभीर प्रसूताओं को आवश्यकता नहीं होने पर बड़े मेडिकल कॉलेजों में रेफर करने की स्थिति कम हुई है।
हड्डी की सर्जरी की सेवा भी जल्द शुरू होने की उम्मीद
डीपीएम स्वास्थ्य नीलेश कुमार ने बताया कि हड्डी से जुड़ी समस्याओं और ऑपरेशन के लिए स्वास्थ्य विभाग से विभिन्न आवश्यक उपकरणों एवं सामानों की मांग की गई है। संसाधन उपलब्ध होने के बाद हड्डी टूटने जैसे मामलों की सर्जरी भी सदर अस्पताल में शुरू करने की तैयारी है। इससे मरीजों को इलाज के लिए दूसरे बड़े अस्पतालों का रुख करने की जरूरत कम होगी।
आईसीयू में भी बढ़ी गंभीर मरीजों की संख्या
सदर अस्पताल के आईसीयू में भी गंभीर मरीजों को भर्ती कर इलाज किया जा रहा है। डीपीएम के अनुसार जुलाई माह के अंतिम 15 दिनों में आईसीयू में 5 मरीजों को भर्ती कर उपचार किया गया, जबकि अगस्त के पहले 15 दिनों में 7 मरीजों को भर्ती कर इलाज किया गया। आईसीयू की सुविधा उपलब्ध होने से आने वाले दिनों में गंभीर मरीजों के उपचार की संख्या बढ़ने की उम्मीद जताई गई है।
गरीब मरीजों को समय और पैसे की बचत
स्थानीय स्तर पर गंभीर बीमारियों के उपचार और सर्जरी की सुविधा मिलने से मरीजों एवं उनके परिजनों को बड़ी राहत मिल रही है। खासकर आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को दूसरे बड़े अस्पतालों तक जाने के खर्च, समय और परेशानी से बचने में मदद मिल रही है। स्वास्थ्य विभाग का प्रयास है कि सदर अस्पताल में उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करते हुए अधिक से अधिक मरीजों को स्थानीय स्तर पर गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराया जा सके।
गयाजी; शहर के जय प्रकाश नारायण (जेपीएन) सदर अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार से मरीजों को बड़ी राहत मिल रही है। सीमित संसाधनों के बीच अस्पताल प्रबंधन द्वारा उपचार व्यवस्था को बेहतर करने और रेफरल की संख्या कम करने के प्रयास किए जा रहे हैं। आधुनिक उपकरणों और बेहतर व्यवस्थाओं के कारण अब अस्पताल में ही गंभीर रोगों का इलाज और विभिन्न प्रकार की सर्जरी की जा रही है।
डीपीएम स्वास्थ्य नीलेश कुमार ने बताया कि जुलाई तक सदर अस्पताल में 12 प्रकार के ऑपरेशन किए जा रहे थे, जबकि अब यह संख्या बढ़कर 20 प्रकार हो गई है। इनमें सी-सेक्शन के अलावा अन्य आवश्यक सर्जरी भी शामिल हैं। उन्होंने बताया कि सेवाओं के विस्तार के लिए स्वास्थ्य विभाग से आवश्यक उपकरण और संसाधनों की मांग की गई है।
अगस्त के पहले 15 दिनों में सिर्फ 10 मरीज रेफर
रेफरल के आंकड़ों में भी कमी दर्ज की गई है। डीपीएम ने बताया कि जुलाई माह के अंतिम 15 दिनों में सदर अस्पताल से 24 मरीजों को रेफर किया गया था। वहीं अगस्त के पहले 15 दिनों में यह संख्या घटकर सिर्फ 10 रह गई। इन मरीजों को अत्यधिक गंभीर स्थिति के कारण रेफर किया गया। इनमें अंदरूनी रक्तस्राव, हृदयाघात और न्यूरो से जुड़े गंभीर मामले शामिल थे।
रात में भी सिजेरियन की मुकम्मल व्यवस्था
सिविल सर्जन डॉ. राजाराम ने बताया कि सदर अस्पताल में अब रात के समय भी सिजेरियन सेक्शन की मुकम्मल व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। जटिल प्रसव की स्थिति में महिलाओं को अस्पताल में भर्ती कर विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में उपचार किया जाता है और जरूरत पड़ने पर सिजेरियन ऑपरेशन किया जाता है।
प्रसव के दौरान होने वाले गंभीर रक्तस्राव यानी पीपीएच (Postpartum Hemorrhage) जैसे संवेदनशील मामलों का प्रबंधन भी अस्पताल के विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा किया जा रहा है। इस व्यवस्था से देर रात आने वाली गंभीर प्रसूताओं को आवश्यकता नहीं होने पर बड़े मेडिकल कॉलेजों में रेफर करने की स्थिति कम हुई है।
हड्डी की सर्जरी की सेवा भी जल्द शुरू होने की उम्मीद
डीपीएम स्वास्थ्य नीलेश कुमार ने बताया कि हड्डी से जुड़ी समस्याओं और ऑपरेशन के लिए स्वास्थ्य विभाग से विभिन्न आवश्यक उपकरणों एवं सामानों की मांग की गई है। संसाधन उपलब्ध होने के बाद हड्डी टूटने जैसे मामलों की सर्जरी भी सदर अस्पताल में शुरू करने की तैयारी है। इससे मरीजों को इलाज के लिए दूसरे बड़े अस्पतालों का रुख करने की जरूरत कम होगी।
आईसीयू में भी बढ़ी गंभीर मरीजों की संख्या
सदर अस्पताल के आईसीयू में भी गंभीर मरीजों को भर्ती कर इलाज किया जा रहा है। डीपीएम के अनुसार जुलाई माह के अंतिम 15 दिनों में आईसीयू में 5 मरीजों को भर्ती कर उपचार किया गया, जबकि अगस्त के पहले 15 दिनों में 7 मरीजों को भर्ती कर इलाज किया गया। आईसीयू की सुविधा उपलब्ध होने से आने वाले दिनों में गंभीर मरीजों के उपचार की संख्या बढ़ने की उम्मीद जताई गई है।
गरीब मरीजों को समय और पैसे की बचत
स्थानीय स्तर पर गंभीर बीमारियों के उपचार और सर्जरी की सुविधा मिलने से मरीजों एवं उनके परिजनों को बड़ी राहत मिल रही है। खासकर आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को दूसरे बड़े अस्पतालों तक जाने के खर्च, समय और परेशानी से बचने में मदद मिल रही है। स्वास्थ्य विभाग का प्रयास है कि सदर अस्पताल में उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करते हुए अधिक से अधिक मरीजों को स्थानीय स्तर पर गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराया जा सके।