अमानक बीज-उर्वरकों पर सख्त कार्रवाई होगी, गुणवत्ता से नहीं होगा समझौता: कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा
आर्यावर्त वाणी | पटना | 31 जुलाई 2026,
पटना: बिहार के कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने स्पष्ट किया है कि किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज, उर्वरक और कीटनाशक उपलब्ध कराना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में अमानक पाए गए कृषि उपादानों के निर्माता एवं विक्रेताओं के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी और गुणवत्ता के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
गुण नियंत्रण प्रयोगशाला का किया निरीक्षण
कृषि मंत्री ने शुक्रवार को रसायन भवन, पटना स्थित गुण नियंत्रण एवं बीज विश्लेषण प्रयोगशाला का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने प्रयोगशालाओं की कार्यप्रणाली, परीक्षण क्षमता, आधुनिक उपकरणों और गुणवत्ता नियंत्रण व्यवस्था की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को वैज्ञानिक एवं पारदर्शी तरीके से जांच सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
प्रयोगशालाओं को किया जाएगा और मजबूत
मंत्री ने प्रयोगशालाओं के तकनीकी उन्नयन पर जोर देते हुए अत्याधुनिक मशीनें उपलब्ध कराने और बायोस्टिमुलेंट (Biostimulant) परीक्षण प्रयोगशाला स्थापित करने का प्रस्ताव शीघ्र तैयार करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर कृषि विश्वविद्यालयों के विशेषज्ञ वैज्ञानिकों की सेवाएं भी ली जाएंगी, ताकि परीक्षण व्यवस्था और अधिक मजबूत हो सके।
20 हजार बीज नमूनों की जांच का लक्ष्य
समीक्षा बैठक में बताया गया कि खरीफ मौसम 2026-27 के लिए 20 हजार बीज नमूनों की जांच का लक्ष्य रखा गया है। अब तक 11,236 नमूनों की जांच की जा चुकी है, जिनमें 162 नमूने अमानक पाए गए हैं। इन बीजों की बिक्री पर रोक लगाने के साथ संबंधित संस्थानों के विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
अमानक कृषि उपादानों पर होगी सख्त कार्रवाई
कृषि मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि बीज, उर्वरक और कीटनाशकों के सभी नमूनों की समयबद्ध जांच सुनिश्चित की जाए। जिन जिलों से कम संख्या में नमूने जांच के लिए भेजे जा रहे हैं, उनकी समीक्षा कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। साथ ही नमूना संग्रहण और जांच प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता एवं गोपनीयता बनाए रखने के निर्देश भी दिए गए।
प्राकृतिक खेती और अनुसंधान पर जोर
श्री सिन्हा ने प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए प्रभावी कार्ययोजना तैयार करने का निर्देश देते हुए कहा कि इससे खेती की लागत कम होगी, पर्यावरण संरक्षण होगा और किसानों की आय बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि “जय जवान, जय किसान, जय विज्ञान” के साथ “जय अनुसंधान” को भी राष्ट्रीय संकल्प बनाया जाए, क्योंकि गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान ही समृद्ध किसान और विकसित भारत की मजबूत नींव है।
