सीयूएसबी का ग्रामीण कृषि कार्य अनुभव कार्यक्रम शुरू, आधुनिक कृषि तकनीकों को गांव-गांव तक पहुंचाएंगे विद्यार्थी

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आर्यावर्त वाणी | गयाजी | 23 जुलाई 2026,

गयाजी: दक्षिण बिहार केन्द्रीय विश्वविद्यालय (सीयूएसबी) ने “कैम्पस फॉर कम्युनिटी” की अवधारणा को साकार करते हुए कृषि विभाग के तत्वावधान में ग्रामीण कृषि कार्य अनुभव (रूरल एग्रीकल्चर वर्क एक्सपीरियंस-RAWE) कार्यक्रम की शुरुआत की है। यह कार्यक्रम बीएससी (कृषि) अंतिम वर्ष के विद्यार्थियों के लिए प्रारंभ किया गया है, जिसका उद्देश्य आधुनिक कृषि तकनीकों का ग्रामीण समाज तक प्रसार करने के साथ विद्यार्थियों को व्यवहारिक एवं शोध-आधारित प्रशिक्षण प्रदान करना है।

कुलपति बोले— शिक्षा और समाज के बीच बनेगा मजबूत सेतु

सीयूएसबी के कुलपति प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह ने कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए कहा कि कृषि विभाग का उद्देश्य केवल कक्षा तक सीमित शिक्षा देना नहीं, बल्कि आधुनिक कृषि तकनीकों को किसानों तक पहुंचाकर समाज के विकास में योगदान देना भी है। उन्होंने कहा कि यह पहल विद्यार्थियों को वास्तविक परिस्थितियों में सीखने का अवसर देगी तथा विश्वविद्यालय, किसानों और ग्रामीण समुदाय के बीच ज्ञान के आदान-प्रदान को मजबूत बनाएगी। उनके अनुसार यह कार्यक्रम कृषि क्षेत्र में सतत विकास, नवाचार और सामाजिक उत्तरदायित्व की दिशा में महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा।

गांवों में जाकर किसानों के साथ करेंगे कार्य

कृषि विभागाध्यक्ष प्रो. अवनीश प्रकाश सिंह ने बताया कि कार्यक्रम के तहत विद्यार्थी विश्वविद्यालय के आसपास स्थित गांवों का भ्रमण करेंगे। इस दौरान वे किसानों की समस्याओं को समझेंगे, सामाजिक एवं कृषि संबंधी आंकड़ों का संग्रह करेंगे तथा वैज्ञानिक कृषि तकनीकों और नवीन कृषि नवाचारों के प्रसार में सक्रिय भूमिका निभाएंगे। उन्होंने कहा कि यह पहल “क्लास-कैम्पस-कम्युनिटी” की अवधारणा को मजबूत करेगी और शिक्षा, शोध तथा समाज के बीच प्रभावी समन्वय स्थापित करेगी।

ग्रामीण विकास और कृषि उन्नयन को मिलेगा बढ़ावा

उन्होंने बताया कि यह कार्यक्रम सामुदायिक सहभागिता को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ ग्रामीण विकास, कृषि उत्पादकता में वृद्धि और किसानों को आधुनिक खेती की जानकारी उपलब्ध कराने में भी अहम भूमिका निभाएगा। इससे विद्यार्थियों को व्यावहारिक अनुभव प्राप्त होगा और किसानों को वैज्ञानिक खेती अपनाने में सहायता मिलेगी।

कृषि शिक्षा और अनुसंधान को नई दिशा

विश्वविद्यालय के जनसंपर्क पदाधिकारी (पीआरओ) मोहम्मद मुदस्सीर आलम ने बताया कि कृषि विभाग लगातार अपनी शैक्षणिक एवं शोध गतिविधियों का विस्तार कर रहा है। बिहार की कृषि आधारित अर्थव्यवस्था की जरूरतों को देखते हुए विभाग ने हाल ही में एग्रोनॉमी, हॉर्टिकल्चर तथा जेनेटिक्स एवं प्लांट ब्रीडिंग विषयों में स्नातकोत्तर (पीजी) पाठ्यक्रम भी शुरू किए हैं। इन पाठ्यक्रमों से कृषि अनुसंधान को नई गति मिलेगी और विश्वविद्यालय कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत पहचान स्थापित करेगा।

किसानों से सतत संवाद पर विशेष जोर

पीआरओ ने कहा कि कृषि विभाग शैक्षणिक उत्कृष्टता, शोध गतिविधियों तथा किसानों के साथ निरंतर संवाद और विस्तार कार्यक्रमों के माध्यम से नई उपलब्धियां हासिल कर रहा है। ग्रामीण कृषि कार्य अनुभव कार्यक्रम इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, जो कृषि शिक्षा को समाज से जोड़ने का प्रभावी माध्यम बनेगा।

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