सीयूएसबी में डीबीटी-पीजी पाठ्यक्रम की एआईएचएसी बैठक संपन्न, शोध व सीट वृद्धि पर हुआ मंथन

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आर्यावर्त वाणी | गयाजी | 27 अप्रैल 2026,

गयाजी: सोमवार को दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय (सीयूएसबी) के जैव प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा डीबीटी-पीजी पाठ्यक्रम की दूसरी वार्षिक इन-हाउस एडवाइजरी कमेटी (एआईएचएसी) बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक का उद्देश्य पाठ्यक्रम की प्रगति की समीक्षा, शोध गतिविधियों को सुदृढ़ करना तथा भविष्य की रणनीति तय करना था।

विशेषज्ञों की रही सहभागिता

बैठक में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी) से प्रतिनिधि डॉ. मनोज कुमार, उद्योग विशेषज्ञ विजयेन्द्र सिंह (जाइडस लाइफ), कौशल विशेषज्ञ डॉ. कृष्ण मोहन बी, बीएचयू के प्रो. गोपाल नाथ सहित कई शैक्षणिक और उद्योग जगत के विशेषज्ञ शामिल हुए।

कुलपति ने बहुविषयी शोध पर दिया जोर

कुलपति प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह ने एआईएचएसी सदस्यों का स्वागत करते हुए कृषि, बायोइन्फॉर्मेटिक्स और जीवन विज्ञान जैसे क्षेत्रों में बहुविषयी एवं सहयोगात्मक शोध की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने विभागों के बीच समन्वय बढ़ाने की बात कही।

विभागीय प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत

जैव प्रौद्योगिकी विभागाध्यक्ष प्रो. राकेश कुमार ने विभाग की गतिविधियों, छात्र नामांकन और शैक्षणिक कार्यों की जानकारी दी। वहीं, डीबीटी-पीजी पाठ्यक्रम के समन्वयक प्रो. दुर्ग विजय सिंह ने डीबीटी अनुदान के बाद हुई प्रगति और गेट-बी उत्तीर्ण छात्रों के प्रवेश से संबंधित रिपोर्ट प्रस्तुत की।

डीबीटी प्रतिनिधि ने दिए अहम सुझाव

डीबीटी प्रतिनिधि डॉ. मनोज कुमार ने संकाय सदस्यों को बाह्य परियोजनाओं और विभिन्न अनुदान योजनाओं के लिए आवेदन करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने डीबीटी-सहज इंफ्रास्ट्रक्चर, बिल्डर योजना और बायो-मैन्युफैक्चरिंग हब जैसी योजनाओं का लाभ उठाने पर जोर दिया। साथ ही, छात्रों को उद्योग से जोड़ने और कौशल आधारित प्रशिक्षण को बढ़ावा देने की सलाह दी।

सीट वृद्धि और विस्तार पर विचार

बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि डीबीटी आगामी वित्तीय वर्ष में सीटों की संख्या 10 से बढ़ाकर 20 या उससे अधिक करने और पाठ्यक्रम को अतिरिक्त 2 वर्षों का विस्तार देने पर विचार कर रहा है।

छात्रों से संवाद और लैब निरीक्षण

समिति ने डीबीटी गेट-बी स्कोर के आधार पर नामांकित एमएससी छात्रों से संवाद किया और प्रयोगशालाओं का निरीक्षण किया। साथ ही उपकरणों की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के निर्देश दिए गए।

इस अवसर पर प्रो. रिजवानुल हक, प्रो. दुर्ग विजय सिंह, डॉ. नीतीश कुमार, डॉ. कृष्ण प्रकाश, डॉ. जावेद अहसन, विभिन्न सहायक विभागों के संकाय सदस्य एवं शोधार्थी मौजूद रहे। कार्यक्रम के अंत में सहायक प्रोफेसर डॉ. प्रतिष्ठा सोनकर ने धन्यवाद ज्ञापन किया।

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