आत्मनिर्भर भारत के लिए आत्मनिर्भर विश्वविद्यालय जरूरी: सीयूएसबी कुलपति

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आर्यावर्त वाणी | गयाजी | 31 मार्च 2026,

गयाजी: दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय (सीयूएसबी) में त्रैमासिक न्यूज़लेटर ‘सीयूएसबी टाइम्स’ (अक्टूबर–दिसंबर 2025) अंक का विमोचन किया गया। इस अवसर पर कुलपति प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह, कुलसचिव प्रो. नरेंद्र कुमार राणा और पीआरओ सह संपादक मोहम्मद मुदस्सीर आलम मौजूद रहे।
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वल पाठ्यक्रम बदलाव से नहीं लागू होगी एनईपी

कुलपति प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए केवल पाठ्यक्रम और पाठ्यपुस्तकों में बदलाव पर्याप्त नहीं है। छात्रों को भारत की प्रकृति, संस्कृति और समाज से जोड़ने के लिए धरातल पर ठोस प्रयास जरूरी हैं।

आत्मनिर्भर कैंपस की दिशा में पहल

उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय ने आत्मनिर्भर कैंपस विकसित करने का संकल्प लिया है। इसके तहत कृषि और पशुधन आधारित व्यावहारिक शिक्षा को बढ़ावा दिया जा रहा है। साथ ही गोवंश के साथ आरती एवं दीप प्रज्वलन के माध्यम से जन्मदिन मनाने जैसी पहल भी शुरू की गई है, जो भारतीय परंपरा और ज्ञान के प्रतीक हैं।

‘हरे-भरे कैंपस’ और स्व-उत्पादों को बढ़ावा

कुलपति ने कहा कि इस अंक में ‘हरे-भरे कैंपस’ और ‘आत्मनिर्भर विश्वविद्यालय’ की अवधारणा को केंद्र में रखते हुए विश्वविद्यालय के स्वयं के उत्पादों को विशेष स्थान दिया गया है।

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प्रकृति और संस्कृति से जुड़ाव जरूरी

उन्होंने कहा कि एनईपी का उद्देश्य केवल शैक्षणिक बदलाव नहीं, बल्कि छात्रों का समग्र विकास है। इसके लिए जरूरी है कि छात्र अपनी प्रकृति, संस्कृति और समाज से जुड़ें और व्यावहारिक जीवन के लिए तैयार हों।

कृषि और वैज्ञानिक सोच पर जोर

प्रो. सिंह ने कहा कि भारत कृषि और ‘ऋषि’ परंपरा का देश है, जहां ‘ऋषि’ का अर्थ वैज्ञानिक सोच रखने वाले लोगों से है। जब तक कृषि और वैज्ञानिक दृष्टिकोण का सम्मान और विकास नहीं होगा, तब तक विकसित भारत का सपना अधूरा रहेगा।

युवाओं में उद्यमिता बढ़ाने का प्रयास

उन्होंने कहा कि सीयूएसबी युवाओं में कृषि के प्रति रुचि और उद्यमिता की भावना विकसित करने के लिए लगातार प्रयासरत है, ताकि छात्र आत्मनिर्भर बन सकें और समाज के साथ जुड़कर कार्य करें।

आत्मनिर्भरता से ही विकसित भारत संभव

कुलपति ने विश्वास जताया कि विश्वविद्यालय के ये प्रयास आत्मनिर्भरता की दिशा में मजबूत कदम हैं और भविष्य में इसके सकारात्मक परिणाम देखने को मिलेंगे।

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