अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस पर गया केंद्रीय कारा में जागरूकता कार्यक्रम

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आर्यावर्त वाणी | गयाजी | 10 दिसंबर 2025,

गयाजी। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस एवं बिहार मानवाधिकार आयोग के 17वें स्थापना दिवस के अवसर पर सोमवार को गयाजी के केंद्रीय कारा में व्यापक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम दोपहर 12:30 बजे से अपराह्न 2:30 बजे तक चला, जिसमें बंदियों के बीच मानवाधिकार पर आधारित जागरूकता परिचर्चा और सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए।

मुख्य अतिथियों ने किया दीप प्रज्वलन

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव अरविंद कुमार दास तथा पुलिस उपाधीक्षक विपिन कुमार उपस्थित थे। कारा अधीक्षक अरुण कुमार पासवान के साथ सभी अतिथियों ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।

बंदियों को विधिक अधिकारों की जानकारी

मुख्य अतिथि अरविंद कुमार दास ने बंदियों को उनके विधिक अधिकारों, कानूनी सहायताओं और जिला विधिक सेवा प्राधिकार द्वारा उपलब्ध सुविधाओं के बारे में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने गरीब एवं असहाय बंदियों के लिए निशुल्क अधिवक्ता उपलब्ध करवाने की प्रक्रिया पर भी प्रकाश डाला और बंदियों को इस सुविधा का लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया।

कारा अधीक्षक ने दिया सहयोग का आश्वासन

कारा अधीक्षक अरुण कुमार पासवान ने बंदियों को उनके कर्तव्यों एवं अधिकारों के प्रति जागरूक रहने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि जेल प्रशासन बंदियों के पुनर्वास और विधिक सहायता उपलब्ध कराने के लिए सदैव तत्पर है। जरूरतमंद बंदियों को समय पर निशुल्क विधिक सहायता देने का भी आश्वासन दिया गया।

अधिकारियों, अधिवक्ताओं और बंदियों की सक्रिय भागीदारी

कार्यक्रम में कारा चिकित्सक डॉ. राजेश कुमार, उपाधीक्षक सुदर्शन प्रताप सिंह, अधिवक्ता कृष्ण कुमार पाठक, जिला विधिक सेवा प्राधिकार के कर्मचारी विकास कुमार, कारा सहायक अधीक्षक श्रीकांत प्रसाद सिंह, रविशंकर राय, नीतीश कुमार, लिपिक मनीष कुमार, पीएलवी देवनाथ कुमार सहित अनेक काराकर्मी उपस्थित रहे। साथ ही पुरुष और महिला दोनों वर्गों के बंदियों ने इस कार्यक्रम में सक्रियता के साथ भाग लिया।

सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से बढ़ा कार्यक्रम का आकर्षण

अंत में गीत-संगीत एवं अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से मानवाधिकारों का संदेश प्रभावी तरीके से प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य बंदियों में मानवाधिकारों के प्रति जागरूकता और सकारात्मक सोच विकसित करना रहा।

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