CUSB में यूनिसेफ विशेषज्ञ सुधाकर रेड्डी का व्याख्यान, विद्यार्थियों को सामाजिक कार्य के क्षेत्र में वैश्विक अवसरों की दी जानकारी
आर्यावर्त वाणी | गयाजी | 06 नवम्बर 2026,
गयाजी। दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय (CUSB) के समाजशास्त्रीय अध्ययन विभाग में यूनिसेफ से संबद्ध विशेषज्ञ सुधाकर रेड्डी ने अतिथि व्याख्यान के माध्यम से विद्यार्थियों को सामाजिक कार्य के क्षेत्र में उपलब्ध संभावनाओं, चुनौतियों और वैश्विक अवसरों की जानकारी दी। उन्होंने विद्यार्थियों को बदलते समय के अनुरूप अपनी कार्यक्षमता विकसित करने, तकनीकी ज्ञान हासिल करने और सामाजिक समस्याओं को व्यापक दृष्टिकोण से समझने की सलाह दी।
सामाजिक कार्य के क्षेत्र में रोजगार और संभावनाओं पर चर्चा
कार्यक्रम का आयोजन सीयूएसबी के कुलपति प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह के संरक्षण में किया गया। इसका समन्वयन समाजशास्त्रीय अध्ययन विभाग के प्रो. एम. विजय के. शर्मा ने किया। कार्यक्रम के औपचारिक उद्घाटन के बाद विभागाध्यक्ष प्रो. समापिका महापात्रा की उपस्थिति में प्रो. शर्मा ने अतिथि वक्ता का स्वागत किया। उन्होंने विद्यार्थियों को सुधाकर रेड्डी की शैक्षणिक पृष्ठभूमि और हैदराबाद स्थित उस्मानिया विश्वविद्यालय से उनके जुड़ाव के साथ यूनिसेफ में उनकी जिम्मेदारियों से परिचित कराया।
सामाजिक कार्य की पढ़ाई को बताया व्यावहारिक और व्यापक
अपने संबोधन में सुधाकर रेड्डी ने इतिहास, भूगोल और राजनीति विज्ञान जैसे पारंपरिक स्नातकोत्तर विषयों की तुलना में मास्टर ऑफ सोशल वर्क (MSW) पाठ्यक्रम की विशेषताओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सामाजिक कार्य का अध्ययन विद्यार्थियों को समाज के विभिन्न पहलुओं को समझने और उनका विश्लेषण करने की व्यापक दृष्टि प्रदान करता है।
इस क्षेत्र में विद्यार्थियों को विभिन्न सामाजिक समूहों, प्रशासनिक अधिकारियों, राजनीतिक नेतृत्व और सरकारी संस्थाओं के साथ सीधे जुड़कर काम करने का अवसर मिलता है। उन्होंने कहा कि सामाजिक कार्य केवल अकादमिक अध्ययन तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज में वास्तविक बदलाव लाने का एक प्रभावी माध्यम भी है।
संघर्ष और अनुभवों से विद्यार्थियों को किया प्रेरित
अपने व्यावसायिक जीवन के अनुभव साझा करते हुए उन्होंने बताया कि समान वित्तीय प्रस्ताव होने के बावजूद उन्होंने तेलंगाना के बजाय दिल्ली में काम करने का निर्णय लिया। शुरुआती दौर में उन्हें भाषा संबंधी कठिनाइयों और कंप्यूटर दक्षता की कमी जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ा। हालांकि, दृढ़ संकल्प और लगातार प्रयासों के बल पर वे महज तीन वर्षों में संयुक्त सचिव के पद तक पहुंचने में सफल रहे।
उन्होंने विद्यार्थियों को समझाया कि करियर में आगे बढ़ने के लिए केवल शैक्षणिक डिग्री पर्याप्त नहीं है, बल्कि नई परिस्थितियों के अनुरूप खुद को ढालना और लगातार सीखते रहना भी जरूरी है।
अंग्रेजी, डेटा विश्लेषण और तकनीकी दक्षता पर दिया जोर
सुधाकर रेड्डी ने युवा सामाजिक कार्य पेशेवरों को प्रभावी संवाद, बेहतर दस्तावेजीकरण और आत्मप्रस्तुति की क्षमता विकसित करने की सलाह दी। उन्होंने वैश्विक स्तर पर अवसर प्राप्त करने के लिए अंग्रेजी भाषा में दक्षता को भी महत्वपूर्ण बताया।
इसके साथ ही उन्होंने डेटा प्रबंधन, डेटा की व्याख्या, डेटा विश्लेषण, आत्मचिंतन और नियमित ध्यान जैसी क्षमताओं के विकास पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन और साइबर सुरक्षा जैसे उभरते क्षेत्रों में भी सामाजिक कार्य से जुड़े युवाओं को अपनी समझ विकसित करनी चाहिए।
यूनिसेफ के प्रमुख कार्यक्षेत्रों की दी जानकारी
व्याख्यान के दौरान उन्होंने यूनिसेफ के प्रमुख कार्यक्रमगत क्षेत्रों के बारे में विस्तार से बताया। इनमें स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा, जलापूर्ति एवं स्वच्छता, बाल संरक्षण और सामाजिक नीति जैसे विषय शामिल रहे। इसके अलावा आपदा प्रबंधन, सामाजिक एवं व्यवहार परिवर्तन संचार, जनसमर्थन, परिचालन प्रबंधन और वित्तीय प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में भी सामाजिक कार्य पेशेवरों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।
बिहार के उदाहरणों से समझाई सामाजिक कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारी
बिहार के क्षेत्रीय उदाहरणों का उल्लेख करते हुए उन्होंने पर्यटन स्थलों पर कचरा प्रबंधन, स्वच्छता और सुरक्षा व्यवस्था की नियमित निगरानी की आवश्यकता बताई। उन्होंने गया में आयोजित होने वाले पितृपक्ष मेले जैसे बड़े जनसमागमों के दौरान बालिकाओं और महिलाओं की मानव तस्करी के संभावित जोखिमों की ओर भी ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने ऐसे आयोजनों में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सतर्कता और प्रभावी निगरानी को आवश्यक बताया।
व्यवस्था की कमियों को पहचानने की दी सलाह
व्याख्यान के समापन पर सुधाकर रेड्डी ने कहा कि सरकारी तंत्र समाज को आधारभूत संरचना और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराता है, लेकिन सामाजिक कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारी इससे आगे बढ़कर व्यवस्था में मौजूद कमियों की पहचान करना और समुदायों की जरूरतों के अनुसार समाधान तलाशना है।
उन्होंने विद्यार्थियों से व्यापक दृष्टिकोण अपनाने, वैश्विक अवसरों के लिए खुद को तैयार करने और समाज के कमजोर वर्गों की प्रभावी सेवा के लिए निरंतर प्रयासरत रहने का आह्वान किया।
