CUSB के शोधकर्ताओं ने स्टीविया में मिठास बढ़ाने की विकसित की नई नैनो तकनीक, खाद्य और कृषि क्षेत्र में मिलेगी मदद
आर्यावर्त वाणी | गयाजी | 06 नवम्बर 2026,
गयाजी। दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय (CUSB) के शोधकर्ताओं ने स्टीविया पौधे में प्राकृतिक मिठास के उत्पादन को बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। सीयूएसबी और केके विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं की संयुक्त टीम ने नैनो प्रौद्योगिकी आधारित एक नई विधि विकसित की है, जिससे प्रयोगशाला में स्टीविया पौधे की वृद्धि और उसमें पाए जाने वाले प्राकृतिक मिठास युक्त तत्वों के उत्पादन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की जा सकती है।
अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिका में प्रकाशित हुआ शोध
इस शोध का शीर्षक “Polyvinylpyrrolidone Coated Silver Nanoparticles Enhance In Vitro Growth and Steviol Glycoside Production in Stevia rebaudiana” है। यह शोध स्प्रिंगर नेचर द्वारा प्रकाशित अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिका ‘डिस्कवर प्लांट्स’ में प्रकाशित हुआ है। शोध का DOI नंबर 10.1007/s44372-026-00955-9 है।
सिल्वर नैनोपार्टिकल्स से बढ़ेगा प्राकृतिक मिठास का उत्पादन
शोध दल के प्रमुख एवं सीयूएसबी के जैव प्रौद्योगिकी विभाग के प्रो. नीतीश कुमार ने बताया कि अध्ययन में विशेष रूप से पॉलीविनाइलपाइरोलिडोन (PVP) से कोटेड सिल्वर नैनोपार्टिकल्स का इस्तेमाल किया गया। इसके रणनीतिक प्रयोग से प्रयोगशाला की परिस्थितियों में स्टीविया रेबाउडियाना पौधे की वृद्धि और उसमें मौजूद स्टीवियोल ग्लाइकोसाइड के उत्पादन को बढ़ाने में मदद मिली है।
स्टीविया को चीनी के प्राकृतिक और शून्य कैलोरी वाले विकल्प के रूप में जाना जाता है। इसमें मौजूद स्टीवियोल ग्लाइकोसाइड ऐसे प्राकृतिक यौगिक हैं, जो इसे मिठास प्रदान करते हैं। यही वजह है कि खाद्य उद्योग और मधुमेह प्रबंधन से जुड़े क्षेत्रों में स्टीविया की उपयोगिता लगातार बढ़ रही है।
खाद्य उद्योग और कृषि जैव प्रौद्योगिकी के लिए अहम उपलब्धि
शोधकर्ताओं के अनुसार, इस अध्ययन से औषधीय एवं कृषि महत्व वाली फसलों में महत्वपूर्ण द्वितीयक उपापचयजों के उत्पादन को बढ़ाने की नई संभावनाएं सामने आई हैं। पौधों और नैनोकणों के बीच होने वाली पारस्परिक क्रियाओं का उपयोग कर उपयोगी प्राकृतिक यौगिकों का उत्पादन अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।
यह शोध कृषि जैव प्रौद्योगिकी और नैनो प्रौद्योगिकी के समन्वय से प्राकृतिक मिठास प्रदान करने वाले पौधों के उत्पादन एवं उपयोग को बेहतर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
पांच शोधकर्ताओं की संयुक्त टीम ने किया अनुसंधान
इस शोध दल का नेतृत्व सीयूएसबी के जैव प्रौद्योगिकी विभाग के प्रो. नीतीश कुमार ने किया। टीम में सीयूएसबी के जैव प्रौद्योगिकी विभाग के प्रीतम बिस्वास और अंकिता कुमारी, रसायन विज्ञान विभाग के प्रो. अमिय प्रियम तथा केके विश्वविद्यालय के कृषि विज्ञान संकाय के संजीव कुमार शामिल रहे।
