गयाजी व शेरघाटी में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन, 3304 मामलों का हुआ निष्पादन

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आर्यावर्त वाणी | गयाजी | 09 मई 2026,

गया। व्यवहार न्यायालय गयाजी एवं शेरघाटी में शनिवार 09 मई 2026 को वर्ष की दूसरी राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकार गयाजी प्रदीप कुमार मलिक, जिला पदाधिकारी सह उपाध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकार शशांक शुभंकर, परिवार न्यायाधीश सुनील कुमार वर्मा, डीएएसजे-1 शशिकांत ओझा तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव अरविंद कुमार दास ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया।

इस अवसर पर प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रदीप कुमार मलिक ने कहा कि राष्ट्रीय लोक अदालत न्याय का ऐसा माध्यम है, जिसमें दोनों पक्षों की जीत होती है। इससे आपसी सद्भाव बना रहता है तथा पक्षकार खुशी-खुशी अपने घर लौटते हैं। उन्होंने लोक अदालत को सफल बनाने में सहयोग करने वाले न्यायिक पदाधिकारियों एवं पैनल अधिवक्ताओं को विशेष धन्यवाद दिया।

राष्ट्रीय लोक अदालत के सफल संचालन के लिए कुल 27 बेंच गठित किए गए थे, जिनमें 23 बेंच गयाजी व्यवहार न्यायालय एवं 4 बेंच शेरघाटी में बनाए गए थे। विभिन्न बेंचों में न्यायिक पदाधिकारियों एवं पैनल अधिवक्ताओं ने आपसी सहमति के आधार पर मामलों का निष्पादन कराया।

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लोक अदालत में कुल 3,304 मामलों का निष्पादन किया गया तथा कुल 9 करोड़ 67 लाख 67 हजार 313 रुपये की समझौता राशि तय की गई। विभिन्न श्रेणियों में निष्पादित मामलों में बिजली विभाग से जुड़े 1007 मामलों में 3 करोड़ 86 लाख 25 हजार 836 रुपये, क्रिमिनल कंपाउंडेबल के 1531 मामलों में 19 लाख 20 हजार 235 रुपये, मोटर वाहन दुर्घटना के 27 मामलों में 2 करोड़ 58 लाख 75 हजार रुपये, बैंक से संबंधित 530 मामलों में 2 करोड़ 98 लाख 33 हजार 756 रुपये, ट्रैफिक चालान के 205 मामलों में 5 लाख 9 हजार 500 रुपये तथा बीएसएनएल के 2 मामलों में 2 हजार 986 रुपये की समझौता राशि पर निष्पादन किया गया। इसके अलावा चेक बाउंस के मामलों का भी निपटारा किया गया।

इस सफल आयोजन में जिला विधिक सेवा प्राधिकार के कर्मचारी हादी अकरम, प्रतुल कुमार, विकास कुमार, हारून रसीद, उदय कुमार, दीपक कुमार सिन्हा, अनिल कुमार, रितिक कुमार, रंजीत कुमार, अजय कुमार समेत कई पारा लीगल वॉलंटियर्स उपस्थित रहे। राष्ट्रीय लोक अदालत के आयोजन से बड़ी संख्या में लंबित मामलों का त्वरित निष्पादन हुआ, जिससे पक्षकारों को समय और धन दोनों की बचत हुई।

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