गयाजी के 13 विद्यालयों में ‘सुरक्षित बचपन अभियान’ का समापन, बच्चों को POCSO कानून और बाल अधिकारों की दी गई जानकारी
आर्यावर्त वाणी | गयाजी | 31 अक्टूबर 2026,
गयाजी। बच्चों को यौन शोषण, बाल उत्पीड़न और अन्य प्रकार के अपराधों से बचाने तथा उनके कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से गयाजी जिले में 26 से 31 अक्टूबर 2026 तक चलाए गए ‘सुरक्षित बचपन अभियान’ का शनिवार को समापन हो गया। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकार (NALSA), नई दिल्ली एवं बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकार, पटना के निर्देश पर संचालित इस अभियान के अंतिम दिन जिला विधिक सेवा प्राधिकार, गयाजी की ओर से गयाजी, शेरघाटी और आमस के कुल 13 विद्यालयों में विशेष विधिक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए।
प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश डॉ. राकेश कुमार सिंह के दिशा-निर्देश तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव अरविंद कुमार दास की देखरेख में आयोजित इन कार्यक्रमों का मुख्य उद्देश्य बच्चों को POCSO अधिनियम, बाल अधिकारों, व्यक्तिगत सुरक्षा और यौन शोषण से बचाव के कानूनी प्रावधानों की जानकारी देना था।
गया के सात विद्यालयों में न्यायिक पदाधिकारियों ने किया जागरूक
गयाजी शहर के सात विद्यालयों में अलग-अलग न्यायिक पदाधिकारियों, पैनल अधिवक्ताओं और पारा विधिक स्वयंसेवकों (PLV) की प्रतिनियुक्ति की गई थी।
- महावीर (+2) इंटर स्कूल, गयाजी: जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश-प्रथम शशि कांत ओझा, पैनल अधिवक्ता रवि कांत एवं PLV संतोष कुमार।
- एमएस महावीर, गयाजी: जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश-सप्तम सह विशेष न्यायाधीश (POCSO) देव प्रिय कुमार, पैनल अधिवक्ता राजेंद्र प्रसाद एवं PLV रोहित कुमार।
- टी. मॉडल इंटर स्कूल, गयाजी: जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश-XVI मनोरंजनी शॉ, पैनल अधिवक्ता विभा सिन्हा एवं PLV जुल्फिकार अंसारी।
- हरिदास सेमिनरी, गयाजी: जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश-XV राजेश मोहन, पैनल अधिवक्ता अजय कुमार सिंह एवं PLV परमानंद सिंह।
- मारवाड़ी +2 उच्च विद्यालय, गयाजी: न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी फरहा निशात, पैनल अधिवक्ता जितेंद्र कुमार सिंह एवं PLV प्रियंका शर्मा।
- एमएस मुरारपुर, गयाजी: न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी प्रतिभा, पैनल अधिवक्ता गणेश प्रसाद एवं PLV मधु देवी।
- एमएस पंचायती अखाड़ा, गयाजी: न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी ऋषिका सुमन, पैनल अधिवक्ता एस. राजेश आनंद एवं PLV सचित कुमारी।
शेरघाटी और आमस के छह विद्यालयों में भी चला जागरूकता अभियान
अभियान के तहत शेरघाटी एवं आमस क्षेत्र के छह विद्यालयों में भी कार्यक्रम आयोजित किए गए। इनमें मध्य विद्यालय अकौना में एसीजेएम प्रथम शेरघाटी राजेश कुमार सिंह तथा मध्य विद्यालय सुग्गी में न्यायिक दंडाधिकारी अहसान राशिद ने कार्यक्रम का नेतृत्व किया।
वहीं, रंगलाल +2 उच्च विद्यालय, शेरघाटी में जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश-प्रथम लवकुश कुमार, परियोजना कन्या विद्यालय में एसीजेएम द्वितीय प्रीति कुमारी, मध्य विद्यालय कठार में न्यायिक दंडाधिकारी मनोज कुमार तथा मध्य विद्यालय दुल्हिन मंदिर में न्यायिक दंडाधिकारी कुमारी तुलिका ने जागरूकता कार्यक्रम का नेतृत्व किया।
अच्छे और बुरे स्पर्श की पहचान से लेकर बाल विवाह के कानून तक की जानकारी
सभी विद्यालयों में न्यायिक पदाधिकारियों ने बच्चों को POCSO अधिनियम के प्रावधानों, अच्छे और बुरे स्पर्श की पहचान, यौन शोषण से बचाव, बाल विवाह तथा बाल उत्पीड़न के खिलाफ कानूनी अधिकारों की जानकारी दी।
उन्होंने छात्र-छात्राओं को समझाया कि किसी भी प्रकार के शोषण या अनुचित व्यवहार की स्थिति में चुप नहीं रहना चाहिए, बल्कि अपने अभिभावकों, शिक्षकों अथवा संबंधित अधिकारियों को इसकी जानकारी देनी चाहिए। साथ ही बच्चों को अपनी सुरक्षा, शिक्षा और सम्मान के प्रति सजग रहने के लिए प्रेरित किया गया।
चित्रकला प्रतियोगिता में बेहतर प्रदर्शन करने वाले बच्चे सम्मानित
कार्यक्रमों की शुरुआत न्यायिक पदाधिकारियों द्वारा दीप प्रज्वलित कर की गई। विद्यालयों के प्राचार्यों ने अतिथियों को बुके एवं अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया। इस दौरान छात्र-छात्राओं ने स्वागत गीत और विषय आधारित सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी दीं।
अभियान के तहत बच्चों के बीच विषय आधारित चित्रकला एवं ड्राइंग प्रतियोगिताएं भी आयोजित की गईं। इनमें उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को मेडल और प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रमों में न्यायिक पदाधिकारियों, पैनल अधिवक्ताओं, पारा विधिक स्वयंसेवकों, जिला विधिक सेवा प्राधिकार के कर्मचारियों, विद्यालयों के प्राचार्यों एवं शिक्षक-शिक्षिकाओं ने सक्रिय सहभागिता निभाई। सभी विद्यालयों में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
सुरक्षित और भयमुक्त बचपन के लिए जागरूकता पर जोर
गयाजी जिले के 13 विद्यालयों में एक साथ आयोजित इन कार्यक्रमों के माध्यम से बच्चों तक सुरक्षा और कानूनी अधिकारों का संदेश पहुंचाया गया। अभियान का समापन बच्चों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक बनाने, शोषण के विरुद्ध आवाज उठाने का साहस देने तथा उन्हें सुरक्षित, सम्मानजनक और भयमुक्त वातावरण उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आया।
बच्चों की सुरक्षा केवल परिवार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज और व्यवस्था की भी सामूहिक जिम्मेदारी है। ऐसे जागरूकता कार्यक्रम बच्चों को अपने अधिकार समझने और जरूरत पड़ने पर कानूनी सहायता लेने का रास्ता दिखाते हैं।
