खिजरसराय में गैस संकट: शुल्क शहरी, सुविधा ग्रामीण; 45 दिन बाद भी नहीं मिल रहा सिलेंडर

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आर्यावर्त वाणी | गयाजी | 04 अप्रैल 2026,

खिजरसराय (गयाजी): नगर पंचायत क्षेत्र में रहने वाले उपभोक्ता होल्डिंग टैक्स, ट्रेड लाइसेंस और बिजली बिल जैसे शहरी शुल्क तो नियमित दे रहे हैं, लेकिन गैस आपूर्ति के मामले में उन्हें ग्रामीण क्षेत्र जैसा व्यवहार झेलना पड़ रहा है। सरकारी नियमों के अनुसार शहरी क्षेत्रों में 25 दिनों के भीतर गैस आपूर्ति सुनिश्चित होनी चाहिए, लेकिन यहां 45 दिन बाद भी गैस नहीं मिल पा रही है।

गैस नहीं, तो फिर चूल्हे पर लौटे लोग

एलपीजी की कमी के कारण लोग मजबूर होकर फिर से पारंपरिक ईंधन लकड़ी और कोयला का सहारा लेने लगे हैं। वहीं बिजली कटौती की समस्या के चलते इंडक्शन और इंफ्रारेड चूल्हे भी प्रभावी विकल्प साबित नहीं हो पा रहे हैं।

उपभोक्ताओं की बढ़ती परेशानी

स्थानीय व्यवसायी कृष्णा प्रसाद ने बताया कि गैस बुकिंग के 45 दिन बाद भी उनका डीएसी नंबर जारी नहीं हुआ है, जिससे सिलेंडर उठाव पूरी तरह बाधित है। ऐसे हालात में रोजमर्रा का जीवन प्रभावित हो रहा है और लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।

एजेंसी का तर्क, शहरी मान्यता पर विवाद

गैस एजेंसी प्रतिनिधि का कहना है कि इंडियन ऑयल को अब तक खिजरसराय के शहरीकरण का प्रमाण नहीं मिला है, जिसके कारण यहां 45 दिन वाला ग्रामीण नियम लागू किया जा रहा है।
यही कारण है कि नगर पंचायत क्षेत्र के बावजूद उपभोक्ताओं को शहरी सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं।

जिलाधिकारी को सौंपा गया आवेदन

इस समस्या से परेशान सैकड़ों उपभोक्ताओं ने हस्ताक्षरयुक्त आवेदन जिलाधिकारी को सौंपा है। स्थानीय संगठन वैश्य चेतना समिति के नवीन कुमार और अमित कुमार ने प्रशासन से खिजरसराय को स्पष्ट रूप से शहरी श्रेणी में शामिल करने और गैस आपूर्ति व्यवस्था में सुधार की मांग की है।

समाधान की उम्मीद

अब सभी की नजर जिला प्रशासन और संबंधित विभाग पर है कि वे इस समस्या का समाधान कब तक करते हैं। यदि जल्द सुधार नहीं हुआ, तो यह मुद्दा और बड़ा जनआंदोलन का रूप ले सकता है।

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