टनकुप्पा में चला “खेत बचाओ अभियान”, किसानों को मृदा संरक्षण और संतुलित उर्वरक उपयोग की दी गई जानकारी
आर्यावर्त वाणी | गयाजी | 02 मई 2026,
गयाजी: कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके), मानपुर द्वारा “खेत बचाओ अभियान” के तहत मंगलवार को टनकुप्पा प्रखंड के गजाधरपुर एवं बरसौना गांवों में किसान जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। अभियान का उद्देश्य किसानों को मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, संतुलित उर्वरक उपयोग, मृदा जांच आधारित पोषक तत्व प्रबंधन तथा टिकाऊ कृषि तकनीकों के प्रति जागरूक करना है। कार्यक्रम में 84 किसानों ने भाग लिया। इस दौरान “स्वस्थ धरा-खेत हरा” का संदेश दिया गया।
मिट्टी की उर्वरा शक्ति बचाने पर दिया गया जोर
कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केंद्र के कृषि वैज्ञानिक डॉ. अशोक कुमार ने किसानों को बताया कि असंतुलित उर्वरकों, विशेषकर अत्यधिक यूरिया के उपयोग से मिट्टी की उर्वरा शक्ति प्रभावित होती है और खेती की लागत भी बढ़ जाती है। उन्होंने किसानों को मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों के उपयोग, जैविक एवं जैव उर्वरकों को अपनाने तथा हरी खाद और फसल अवशेष प्रबंधन को बढ़ावा देने की सलाह दी।
अरहर की खेती से दलहन आत्मनिर्भरता का सुझाव
डॉ. अशोक कुमार ने किसानों को दलहन उत्पादन बढ़ाने के लिए उच्च भूमि और खेतों की मेड़ पर अरहर की खेती करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि इससे किसानों की आय बढ़ेगी और दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल करने में मदद मिलेगी।
खरीफ फसलों में पोषक तत्व प्रबंधन की जानकारी
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पूर्वी अनुसंधान परिसर (ICAR-RCER), पटना से आए कृषि वैज्ञानिक डॉ. मणिभूषण ने किसानों को खरीफ फसलों में पोषक तत्व प्रबंधन, मिट्टी जांच की उपयोगिता और उर्वरकों के संतुलित प्रयोग के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाने पर भी जोर दिया।
नियमित मिट्टी जांच कराने की अपील
वैज्ञानिक डॉ. गौस अली ने किसानों से अपील की कि वे नियमित रूप से अपने खेतों की मिट्टी की जांच कराएं और वैज्ञानिक अनुशंसाओं के अनुसार खेती करें। इससे मिट्टी की गुणवत्ता बनी रहेगी और फसल उत्पादन में वृद्धि होगी।
पूरे जून माह चलेगा जागरूकता अभियान
कार्यक्रम के अंत में कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों ने किसानों से “खेत बचाओ अभियान” से अधिक से अधिक जुड़ने तथा अपने गांवों में अन्य किसानों को भी जागरूक करने का आग्रह किया। उन्होंने बताया कि यह जागरूकता अभियान पूरे जून माह के दौरान विभिन्न गांवों में चलाया जाएगा, जिससे अधिक से अधिक किसान इसका लाभ उठा सकें।
