आकांक्षी जिला कार्यक्रम के तहत गया में मिलेट्स प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित होगी
आर्यावर्त वाणी | गयाजी | 21 अप्रैल 2026,
गयाजी: नीति आयोग द्वारा संचालित आकांक्षी जिला कार्यक्रम के तहत गयाजी जिले में मिलेट्स प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित करने की दिशा में पहल तेज हो गई है। जिला पदाधिकारी शशांक शुभंकर ने ग्राम स्तर पर मिलेट्स प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना के साथ – साथ मिलेट्स उत्पादों के लिए कैफेटेरिया खोलने और उनके विपणन हेतु संरचनात्मक ढांचा विकसित करने के निर्देश दिए हैं।
मिलेट्स को बढ़ावा देने की पहल
जिले में ज्वार, बाजरा, मड़ुआ (रागी), कंगनी, कोदो, चीना और साँवा जैसे मोटे अनाजों के उत्पादन के बाद उनके प्रसंस्करण की समस्या को देखते हुए यह पहल की गई है। प्रशासन द्वारा शहर के प्रमुख स्थानों पर मिलेट्स उत्पादों के विपणन के लिए भी ढांचा तैयार करने की योजना बनाई जा रही है।
‘नई जलवायु-नई फसल’ मॉडल पर जोर
कृषि विभाग द्वारा “नई जलवायु-नई फसल” के सिद्धांत के तहत जिले में स्वीट कॉर्न की खेती को बढ़ावा दिया गया। रबी सत्र 2025 में किसानों को बीज उपलब्ध कराकर दिसंबर के पहले सप्ताह तक बुआई कराई गई। इस योजना में लघु एवं सीमांत किसानों को प्राथमिकता दी गई।
स्वीट कॉर्न से बढ़ी किसानों की आय
जिले के गुरारू, डुमरिया, बेलागंज, बांके बाजार, बोधगया और मोहनपुर प्रखंडों में 20-25 हेक्टेयर क्षेत्र में स्वीट कॉर्न की खेती की गई। अनुमानित उत्पादन करीब 1500 क्विंटल बताया गया है।
गुरारू प्रखंड के पहरावाली गांव के किसान उपेंद्र प्रसाद ने बताया कि उन्होंने मात्र 2 कट्ठा में 13,200 रुपये की आय अर्जित की, जिसमें 6,200 रुपये कृषि विभाग के सहयोग से और 7,500 रुपये बाजार बिक्री से प्राप्त हुए।
कृषि विभाग का सहयोग
कृषि विभाग के साथ-साथ अन्य विभागों, जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने भी किसानों को विपणन में सहयोग दिया। गुरारू के डबूर गांव के किसान विनीत कुमार रंजन की खेती का निरीक्षण कर अधिकारियों ने विपणन को और सुदृढ़ करने के निर्देश दिए।
तीनों मौसम में संभव खेती
विशेषज्ञों के अनुसार स्वीट कॉर्न की फसल 125-130 दिनों में तैयार हो जाती है और इसकी खेती खरीफ, रबी और गरमा—तीनों मौसम में की जा सकती है, जिससे किसानों को अतिरिक्त आय का स्थायी स्रोत मिल सकता है।
