गयाजी में चार नई श्रम संहिताओं पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित, नियोजकों से श्रमिकों को प्रावधानों की जानकारी देने की अपील
आर्यावर्त वाणी | गयाजी | 14 अक्टूबर 2026
गयाजी। श्रम संसाधन एवं प्रवासी श्रमिक कल्याण विभाग के तत्वावधान में बुधवार को संयुक्त श्रम भवन, गयाजी में चार नई श्रम संहिताओं को लेकर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में श्रमिकों, नियोजकों, मानव संसाधन (एचआर) अधिकारियों और विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों को नई श्रम संहिताओं के प्रावधानों, उद्देश्यों और उनके प्रभावों की जानकारी दी गई। इसका उद्देश्य श्रम कानूनों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ उनके प्रभावी क्रियान्वयन और अनुपालन को प्रोत्साहित करना था।
दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ
प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन अपर समाहर्ता कुमार पंकज, रीजनल प्रोविडेंट कमिश्नर कृष्ण कुमार राय, उप श्रमायुक्त पूनम कुमारी, सहायक श्रमायुक्त ऋतुराज, फैक्ट्री इंस्पेक्टर मोहम्मद हनीस तथा ईएसआईसी और ईपीएफओ के अधिकारियों ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता अपर समाहर्ता कुमार पंकज ने की। इस दौरान श्रम प्रशासन से जुड़े अधिकारियों ने नई श्रम संहिताओं की उपयोगिता, श्रमिकों के अधिकारों और नियोजकों की जिम्मेदारियों पर विस्तार से चर्चा की।
चार श्रम संहिताओं के प्रावधानों पर दी गई जानकारी
प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञों ने चार प्रमुख श्रम संहिताओं के विभिन्न प्रावधानों को विस्तार से समझाया। इनमें शामिल हैं—
1- वेतन संहिता, 2019: वेतन से संबंधित नियमों और प्रावधानों की जानकारी।
2- औद्योगिक संबंध संहिता, 2020: औद्योगिक संबंधों और श्रमिक-नियोजक के बीच समन्वय से जुड़े विषय।
3- सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020: श्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा और संबंधित प्रावधान।
4- व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्यदशा संहिता, 2020: कार्यस्थल पर सुरक्षा, स्वास्थ्य और बेहतर कार्य परिस्थितियों से जुड़े नियम।
विशेषज्ञों ने श्रमिकों के अधिकारों, वेतन संबंधी नियमों, सामाजिक सुरक्षा, औद्योगिक संबंधों तथा कार्यस्थल पर स्वास्थ्य और सुरक्षा के महत्व पर जानकारी दी। साथ ही, श्रम कानूनों के क्रियान्वयन और संबंधित नियमों के अनुपालन से जुड़े पहलुओं पर भी प्रतिभागियों को जागरूक किया गया।
नियोजक अपने कर्मियों को श्रम संहिताओं से कराएं अवगत: कुमार पंकज
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए अपर समाहर्ता कुमार पंकज ने सभी नियोजकों से अपील की कि वे नई श्रम संहिताओं के प्रावधानों से अपने कर्मियों और श्रमिकों को अवगत कराएं। उन्होंने कहा कि नियोजक श्रमिकों को आवश्यक जानकारी देने के साथ इसकी सूचना श्रम विभाग के पदाधिकारियों को देना भी सुनिश्चित करें।
उन्होंने यह भी बताया कि श्रम विभाग के पदाधिकारी इस संबंध में निरीक्षण का कार्य करेंगे। प्रशिक्षण के दौरान नियोजकों की जिम्मेदारियों और श्रम कानूनों के अनुपालन की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया गया।
वेतन, ईएसआईसी और ईपीएफओ से जुड़े विषयों पर चर्चा
सहायक श्रमायुक्त, गयाजी ऋतुराज ने वेतन संहिता (कोड ऑन वेजेज) के प्रावधानों पर विस्तार से चर्चा की। वहीं, ईएसआईसी कार्यालय से ओम प्रकाश और मनोज कुमार तथा ईपीएफओ कार्यालय से प्रभात कुमार और नेहल अख्तर ने सामाजिक सुरक्षा, पेंशन और ईएसआईसी से संबंधित विषयों पर जानकारी दी।
अधिकारियों ने श्रमिकों को उपलब्ध सामाजिक सुरक्षा सुविधाओं और संबंधित व्यवस्थाओं के प्रति जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता बताई। प्रशिक्षण का एक प्रमुख उद्देश्य यह भी रहा कि नियोजक और मानव संसाधन से जुड़े अधिकारी श्रम कानूनों के प्रावधानों को बेहतर ढंग से समझकर उनका अनुपालन सुनिश्चित कर सकें।
विभिन्न विभागों, मजदूर संगठनों और प्रतिष्ठानों के प्रतिनिधि हुए शामिल
प्रशिक्षण कार्यक्रम में श्रम विभाग के विभिन्न प्रखंडों के श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी, मजदूर संघों और गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इसके अलावा शहर के विभिन्न प्रतिष्ठानों और संस्थानों के नियोजक, श्रमिक तथा प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में प्रमोद लड्डू भंडार के मैनेजर, शाकंभरी के नियोजक एवं श्रमिक, रिलायंस के नियोजक एवं श्रमिक, सुधा डेयरी के प्रतिनिधि, पोलदार संघ के सदस्य तथा दया इंजीनियरिंग के प्रतिनिधि शामिल हुए।
प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण को उपयोगी बताते हुए श्रम कानूनों के प्रति जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया। कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।
श्रमिकों और नियोजकों के बीच बेहतर समन्वय पर जोर
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के माध्यम से श्रम संहिताओं के प्रावधानों की जानकारी संबंधित पक्षों तक पहुंचाने और उनके अनुपालन को बढ़ावा देने का प्रयास किया गया। ऐसे कार्यक्रम श्रम प्रशासन को अधिक प्रभावी बनाने, श्रमिकों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने तथा नियोजकों को उनकी जिम्मेदारियों से अवगत कराने में सहायक हो सकते हैं। इससे श्रमिकों और नियोजकों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की दिशा में भी मदद मिलने की उम्मीद है।
