फल्गु नदी के जीर्णोद्धार की तैयारी तेज, दोनों किनारों पर होगा बड़े पैमाने पर पौधरोपण
आर्यावर्त वाणी | गयाजी | 23 अक्टूबर 2026,
गयाजी। फल्गु नदी के प्राकृतिक स्वरूप को संरक्षित करने, जल संरक्षण को बढ़ावा देने और गिरते भूजल स्तर में सुधार के लिए जिला प्रशासन ने पहल तेज कर दी है। शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 को समाहरणालय सभागार में जिलाधिकारी शशांक शुभंकर की अध्यक्षता में संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक हुई। इसमें फल्गु नदी के दोनों किनारों पर बड़े पैमाने पर पौधरोपण, खराब बोरवेल को वाटर रिचार्ज बोरवेल के रूप में विकसित करने, वर्षा जल संचयन और पारंपरिक जलस्रोतों के संरक्षण को लेकर कई निर्देश दिए गए।
बैठक में वन विभाग, जल संसाधन विभाग, लघु सिंचाई विभाग, ग्रामीण विकास विभाग, पंचायती राज विभाग सहित अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी शामिल हुए। अधिकारियों को आपसी समन्वय के साथ योजनाओं की कार्ययोजना तैयार कर उन्हें आगे बढ़ाने का निर्देश दिया गया।
फल्गु नदी के उद्गम से आगे तक हुआ सर्वेक्षण
बैठक में बताया गया कि भारत सरकार के जल शक्ति मिशन के माध्यम से आईआईटी रुड़की ने झारखंड के चतरा जिले के लावा-लौंग स्थित फल्गु नदी के उद्गम क्षेत्र से लेकर गयाजी होते हुए जहानाबाद और आगे के क्षेत्रों तक नदी का विस्तृत सर्वेक्षण किया है। सर्वेक्षण रिपोर्ट में नदी के बदलते स्वरूप, जल के ठहराव में कमी और नदी के समग्र जीर्णोद्धार की आवश्यकता को रेखांकित किया गया है।
इसी के मद्देनजर नदी के प्राकृतिक स्वरूप को संरक्षित करने, जल संचयन की व्यवस्था विकसित करने और आसपास के क्षेत्रों में भूजल स्तर बेहतर बनाने के लिए समन्वित प्रयास किए जाएंगे।
नदी के दोनों किनारों पर होगा पौधरोपण
जिलाधिकारी ने जिला वन पदाधिकारी और उप विकास आयुक्त को निर्देश दिया कि गयाजी जिले में फल्गु नदी के पूरे क्षेत्र का विस्तृत सर्वेक्षण कर दोनों किनारों पर बड़े पैमाने पर पौधरोपण की कार्ययोजना तैयार करें। इसका उद्देश्य हरित क्षेत्र का विस्तार करने के साथ पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना है।
नदी किनारे पड़ने वाले संबंधित अंचलों के अंचलाधिकारियों को मनरेगा कार्यक्रम पदाधिकारियों और वन विभाग के अधिकारियों के साथ संयुक्त रूप से भौतिक निरीक्षण करने को कहा गया है। निरीक्षण के दौरान पौधरोपण के लिए उपयुक्त स्थलों को चिह्नित किया जाएगा, जिसके आधार पर आगे की कार्ययोजना बनाई जाएगी।
123 खराब बोरवेल से होगा भूजल पुनर्भरण
भूजल स्तर में सुधार के लिए बैठक में खराब पड़े बोरवेल के पुनः उपयोग पर विशेष जोर दिया गया। जल संसाधन विभाग की ओर से बताया गया कि गया, बोधगया और डोभी क्षेत्र में कुल 123 खराब बोरवेल चिह्नित किए गए हैं।
जिलाधिकारी ने इन सभी बोरवेल को वाटर रिचार्ज बोरवेल के रूप में विकसित करने की दिशा में आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया। इसके माध्यम से वर्षा जल को जमीन के भीतर पहुंचाकर भूजल स्तर में सुधार लाने का प्रयास किया जाएगा।
इसके साथ ही फल्गु नदी के दोनों किनारों पर पांच-पांच किलोमीटर के क्षेत्र में जल पुनर्भरण की व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया गया। जिला पंचायती राज पदाधिकारी को संबंधित पंचायतों के माध्यम से अन्य खराब बोरवेल की पहचान कराने और उन्हें वाटर रिचार्ज बोरवेल में बदलने की कार्ययोजना तैयार करने को कहा गया।
जलजमाव वाले इलाकों में बनेंगे सोख्ता, सरकारी भवनों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग
जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि फल्गु नदी के दोनों किनारों पर पांच-पांच किलोमीटर के दायरे में जलजमाव वाले स्थानों की पहचान कर वहां सोख्ता निर्माण कराया जाए। इससे वर्षा जल का बेहतर प्रबंधन करने और भूजल पुनर्भरण में मदद मिलने की उम्मीद है।
इसके अतिरिक्त, संबंधित क्षेत्र के बड़े सरकारी भवनों और प्रमुख प्रतिष्ठानों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग की व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया। इसका उद्देश्य बारिश के पानी को व्यर्थ बहने से रोकना और उसे भूजल स्तर सुधारने के लिए उपयोग में लाना है।
आहर, पोखर और पइन का होगा भौतिक निरीक्षण
पारंपरिक जलस्रोतों के संरक्षण को भी फल्गु नदी के जीर्णोद्धार की योजना का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है। जिलाधिकारी ने लघु सिंचाई विभाग के कार्यपालक अभियंता को नदी के दोनों किनारों पर पांच-पांच किलोमीटर के क्षेत्र में स्थित आहर, पोखर और पइन का भौतिक निरीक्षण कर उनकी वर्तमान स्थिति का आकलन करने का निर्देश दिया।
निरीक्षण के बाद यह पहचान की जाएगी कि कहां पुराने जलस्रोतों के पुनर्जीवन और कहां नए आहर, पोखर या पइन के निर्माण की जरूरत है। इस संबंध में विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर प्रस्तुत करने को कहा गया है, ताकि जल संरक्षण और भूजल स्तर बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा सकें।
कई विभाग मिलकर करेंगे काम
बैठक में स्पष्ट किया गया कि फल्गु नदी के जीर्णोद्धार के लिए पौधरोपण, नदी संरक्षण, वर्षा जल संचयन, खराब बोरवेल का पुनः उपयोग और पारंपरिक जलस्रोतों के संरक्षण से जुड़े कार्यों को समन्वित रूप से आगे बढ़ाया जाएगा।
बैठक में जिला वन प्रमंडल पदाधिकारी, उप विकास आयुक्त, नदी संरक्षण से जुड़े समाजसेवी संजय सज्जन तथा जल संसाधन विभाग सहित अन्य संबंधित विभागों के पदाधिकारी उपस्थित रहे।
फल्गु नदी गयाजी की धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यावरणीय पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे में नदी संरक्षण के साथ भूजल पुनर्भरण की इन योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन स्थानीय जल उपलब्धता और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। हालांकि, इसका वास्तविक लाभ योजनाओं के धरातल पर लागू होने और उनके नियमित रखरखाव पर निर्भर करेगा।
