सीयूएसबी में संस्कृत अध्ययन केंद्र का सत्रारंभ, संस्कृत को बताया आधुनिक समय की जरूरत
आर्यावर्त वाणी | गयाजी | 21 अगस्त 2026
गयाजी: दक्षिण बिहार केन्द्रीय विश्वविद्यालय (सीयूएसबी) में शुक्रवार को केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय द्वारा संचालित संस्कृत अध्ययन केंद्र के अनौपचारिक संस्कृत शिक्षण कार्यक्रम का सत्रारंभ किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. कामेश्वरनाथ सिंह ने की।
कुलपति ने कहा कि संस्कृत हमारे संस्कारों की भाषा है। संस्कृत भाषा की प्रगाढ़ता एवं महत्ता पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि संस्कृत का ज्ञान होने पर देशी-विदेशी अन्य भाषाओं को सीखना अपेक्षाकृत सरल हो जाता है। उन्होंने कहा कि संस्कृत वर्तमान समय की जरूरत है और आज सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भी इसका उपयोग हो रहा है।
संस्कृत अध्ययन को व्यापक स्तर पर बढ़ाने पर जोर
कार्यक्रम में भाषा एवं साहित्य पीठ के अधिष्ठाता एवं केंद्र प्रभारी प्रो. विपिन कुमार सिंह ने अतिथियों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि संस्कृत के पठन-पाठन को विश्वविद्यालय में उच्च एवं व्यापक स्तर तक ले जाने के लिए प्रयास किए जाएंगे।
आधुनिक विज्ञान और कंप्यूटर भाषा विज्ञान से जोड़ी संस्कृत
मुख्य वक्ता भारतीय भाषा विभाग के सहायक आचार्य डॉ. कर्मानन्द आर्य ने संस्कृत भाषा के अकादमिक एवं सामाजिक प्रभाव और महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भाषा सभी के लिए होती है, इसलिए संस्कृत भी सभी के लिए है।
उन्होंने कहा कि संस्कृत केवल कर्मकांड या अतीत की भाषा नहीं है, बल्कि इसमें आधुनिक विज्ञान, कंप्यूटर भाषा विज्ञान और मानवीय मूल्यों से जुड़े महत्वपूर्ण आयाम भी मौजूद हैं। उन्होंने नवागंतुक विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि संस्कृत का अध्ययन ज्ञान में वृद्धि के साथ भविष्य की नई संभावनाओं के द्वार भी खोल सकता है।
विश्वविद्यालय के शिक्षकों एवं विद्यार्थियों ने लिया प्रवेश
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलानुशासक एवं छात्र कल्याण अधिष्ठाता (डीएसडब्ल्यू) सहित विभिन्न विभागों के आचार्य उपस्थित रहे। विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों से आए शिक्षकों ने भी संस्कृत अध्ययन केंद्र में प्रवेश लिया।
विद्यार्थियों ने प्रस्तुतियों से बांधा समां
कार्यक्रम का संचालन भाषा एवं साहित्य विभाग के विद्यार्थी रवि कुमार एवं नुपुर ने किया। इस अवसर पर भाषा एवं साहित्य पीठ के डॉ. सरोज कुमार, डॉ. अर्पणा झा, डॉ. शांति भूषण, डॉ. अनुज लुगुन, डॉ. कफील अहमद नसीम, प्रो. सुधांशु झा एवं प्रो. बुधेन्द्र सिंह समेत विश्वविद्यालय के अन्य प्रोफेसर एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।
विद्यार्थियों अंजना, ज्योति, पूजा, श्वेता, आफरीन, करिश्मा, प्रिया, रिम्पी, नंदनी, तनूजा, अनुप्रिया, सिमरन, अर्चना, दिव्यांशु, गौतम, पियूष, निरंजन, प्रदीप, अनन्त, सन्नी, आयुष एवं मेहुल सहित अन्य प्रतिभागियों ने विभिन्न प्रस्तुतियां देकर कार्यक्रम को जीवंत बना दिया। कार्यक्रम के अंत में संस्कृत शिक्षक रोशन मौर्य ने धन्यवाद ज्ञापन किया।
