एनईपी 2020 ने उच्च शिक्षा को दी नई दिशा, विकसित भारत@2047 के लक्ष्य में निभाएगी अहम भूमिका : सीयूएसबी कुलपति
आर्यावर्त वाणी | गयाजी | 30 जुलाई 2026,
गयाजी: पदक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय (सीयूएसबी) में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 की छठी वर्षगांठ के अवसर पर “एनईपी 2020 के छह वर्ष : विकसित भारत@2047 के लिए शिक्षा का रूपांतरण” विषय पर विशेष परिचर्चा आयोजित की गई। विश्वविद्यालय के एनईपी प्रकोष्ठ की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में कुलपति प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह ने कहा कि नई शिक्षा नीति ने पिछले छह वर्षों में देश की उच्च शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा देने के साथ व्यापक एवं सकारात्मक परिवर्तन की नींव रखी है।
शिक्षार्थी-केंद्रित और नवाचार आधारित शिक्षा पर जोर
अपने अध्यक्षीय संबोधन में कुलपति प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह ने कहा कि एनईपी-2020 के माध्यम से उच्च शिक्षा को अधिक लचीला, समावेशी, बहुविषयक और नवाचार आधारित बनाया गया है। उन्होंने कहा कि यह नीति विद्यार्थियों को केवल डिग्री तक सीमित न रखकर उन्हें वास्तविक जीवन की चुनौतियों के लिए तैयार करने का कार्य कर रही है।
उन्होंने अनुभवात्मक (एक्सपीरियंशियल) शिक्षण को एनईपी का महत्वपूर्ण आधार बताते हुए कहा कि कक्षा शिक्षण के साथ व्यावहारिक अनुभव भी आवश्यक है, जिससे विद्यार्थियों की दक्षता और रोजगार क्षमता दोनों में वृद्धि होती है।
भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक तकनीक का समन्वय
कुलपति ने भारतीय ज्ञान परंपरा, बहुभाषी शिक्षा, अनुवाद अध्ययन, पर्यावरणीय चेतना और उभरती प्रौद्योगिकियों के प्रभावी उपयोग पर बल देते हुए कहा कि इन प्रयासों से उच्च शिक्षा भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप और अधिक प्रासंगिक बनेगी। उन्होंने कहा कि ‘कैम्पस फॉर कम्युनिटी’ की अवधारणा के तहत सीयूएसबी आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों को अनुसंधान एवं नवाचार के माध्यम से लाभान्वित करने के लिए लगातार कार्य कर रहा है।
सीयूएसबी ने एनईपी के प्रभावी क्रियान्वयन की बनाई पहचान
विश्वविद्यालय के जनसंपर्क पदाधिकारी मोहम्मद मुदस्सीर आलम ने बताया कि कार्यक्रम का समन्वयन एनईपी प्रकोष्ठ के समन्वयक प्रो. प्रणव कुमार तथा संचालन सदस्य सचिव डॉ. आतिश कुमार दाश ने किया। परिचर्चा में शिक्षकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने सक्रिय भागीदारी करते हुए कहा कि सीयूएसबी ने एनईपी-2020 के प्रमुख प्रावधानों को प्रभावी ढंग से लागू कर छात्र-केंद्रित शिक्षा और शैक्षणिक सुधारों के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई है।
अनुसंधान, नवाचार और उद्योग-अकादमिक सहयोग पर जोर
परिचर्चा में बहुविषयक शिक्षा को और मजबूत बनाने, उद्योग एवं शिक्षण संस्थानों के बीच सहयोग बढ़ाने, अनुसंधान एवं नवाचार को प्रोत्साहित करने, व्यावसायिक शिक्षा का विस्तार करने तथा विद्यार्थियों के लिए इंटर्नशिप एवं कौशल विकास के अधिक अवसर उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर बल दिया गया। विद्यार्थियों ने रोजगार क्षमता, मेंटरिंग, अनुसंधान के अवसर और समग्र व्यक्तित्व विकास से जुड़े महत्वपूर्ण सुझाव भी साझा किए।
विकसित भारत@2047 के संकल्प को मजबूत करेगा सीयूएसबी
कार्यक्रम का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि सीयूएसबी राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन को और सशक्त बनाते हुए शिक्षण, अनुसंधान, नवाचार एवं छात्र विकास के क्षेत्रों में नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेगा। परिचर्चा से प्राप्त सुझावों को अखिल भारतीय शिक्षा समागम (ABSS) 2026 की राष्ट्रीय परामर्श प्रक्रिया में विश्वविद्यालय के योगदान के रूप में प्रस्तुत किया जाएगा।
