सीयूएसबी में अंतर-महाद्वीपीय सम्मेलन, खेल और बौद्धिक संपदा पर वैश्विक विशेषज्ञों ने साझा किए विचार

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आर्यावर्त वाणी | गयाजी | 28 अप्रैल 2026,

गयाजी; दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय (सीयूएसबी) के स्कूल ऑफ लॉ एंड गवर्नेंस द्वारा ‘बौद्धिक संपदा और खेल: तैयार, स्थिर, नवाचार’ विषय पर अवीन्या 3.0 के अंतर्गत एक ऑनलाइन अंतर-महाद्वीपीय सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस सम्मेलन का उद्देश्य खेल, कानून और प्रौद्योगिकी के बीच संबंधों पर वैश्विक स्तर पर विमर्श को बढ़ावा देना था।

वैश्विक विशेषज्ञों ने रखे विचार

सम्मेलन में अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों ने खेल जगत में बौद्धिक संपदा अधिकारों की भूमिका, तकनीकी नवाचार और एथलेटिक प्रदर्शन के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। मुख्य अतिथि प्रो. पुष्पेंद्र सिंह गिल ने अवैध स्ट्रीमिंग और पायरेसी से निपटने के लिए त्वरित कानूनी उपायों की आवश्यकता पर जोर दिया। वहीं, विशिष्ट अतिथि डॉ. इंदु मजूमदार ने खिलाड़ियों के इमेज अधिकार और उनके आर्थिक महत्व को रेखांकित किया।

आईपी जागरूकता पर दिया गया जोर

कार्यक्रम की शुरुआत में आईआईसी अध्यक्ष प्रो. वेंकटेश सिंह ने कहा कि विकसित अर्थव्यवस्था के लिए खेलों में मजबूत बौद्धिक संपदा जागरूकता जरूरी है। एसएलजी के डीन प्रो. अशोक कुमार ने खेल कानून के क्षेत्र में संरचित प्रयासों की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।

तकनीकी और कानूनी पहलुओं पर चर्चा

सम्मेलन में डब्ल्यूबीएनयूजेएस के प्रो. समीेक सेन ने भारत के आईपी ढांचे की तुलना वैश्विक कानूनों से की। तुर्की के प्रो. हयरी एर्टान ने खेलों में जैव-यांत्रिक अनुसंधान के महत्व को बताया, जबकि जिंदल ग्लोबल लॉ स्कूल के प्रो. सुभ्रजीत चंदा ने एआई और खिलाड़ियों के “डिजिटल ट्विन” से जुड़े कानूनी सवाल उठाए।

आर्थिक दृष्टिकोण भी रहा केंद्र में

विशेषज्ञों ने बताया कि बौद्धिक संपदा खेल उद्योग में एक महत्वपूर्ण आर्थिक आधार है, जो प्रसारण अधिकार, उपकरण पेटेंट और मर्चेंडाइजिंग के जरिए बड़ी आय उत्पन्न करता है।

कार्यक्रम के आयोजन में शारीरिक शिक्षा विभाग की अध्यक्ष प्रो. उषा तिवारी की महत्वपूर्ण भूमिका रही। अंत में डॉ. सुनैना ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।

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