सीयूएसबी का बायोइनफॉर्मेटिक्स विभाग बना राष्ट्रीय BTISNet नेटवर्क का हिस्सा, शोध और प्रशिक्षण को मिलेगा नया आयाम
आर्यावर्त वाणी | गयाजी | 05 अगस्त 2026,
गयाजी: दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय (सीयूएसबी) के जैव-सूचना विज्ञान (बायोइनफॉर्मेटिक्स) विभाग ने एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। विश्वविद्यालय का बायोइनफॉर्मेटिक्स विभाग भारत सरकार के जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी) द्वारा स्थापित प्रतिष्ठित बायोटेक्नोलॉजी इन्फॉर्मेशन सिस्टम नेटवर्क (BTISNet) का हिस्सा बन गया है। इस उपलब्धि से विश्वविद्यालय में बायोइनफॉर्मेटिक्स एवं जीवन विज्ञान से जुड़े अनुसंधान और प्रशिक्षण गतिविधियों को नई गति मिलेगी।
राष्ट्रीय स्तर के नेटवर्क से जुड़ा सीयूएसबी
बीटीआईएसनेट देश का प्रमुख राष्ट्रीय बायोइनफॉर्मेटिक्स नेटवर्क है, जिसका उद्देश्य जीवन विज्ञान (Life Sciences) और कम्प्यूटेशनल बायोलॉजी के क्षेत्र में अनुसंधान को बढ़ावा देना तथा देश के प्रमुख विश्वविद्यालयों एवं अनुसंधान संस्थानों को एक साझा मंच से जोड़ना है। सीयूएसबी के इस नेटवर्क से जुड़ने पर अब विद्यार्थियों और शोधार्थियों को आधुनिक संसाधनों एवं शोध सुविधाओं का लाभ मिलेगा।
कुलपति ने जताई खुशी
सीयूएसबी के कुलपति प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह ने विभाग की इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि इससे मगध क्षेत्र सहित पूरे बिहार के विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों को उच्च स्तरीय शोध और प्रशिक्षण के बेहतर अवसर प्राप्त होंगे। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि विश्वविद्यालय की शैक्षणिक एवं अनुसंधान क्षमता को और अधिक मजबूत करेगी।
विश्वविद्यालय के लिए गर्व का विषय
स्कूल ऑफ अर्थ, बायोलॉजिकल एंड एनवायरनमेंटल साइंसेज़ के अधिष्ठाता प्रो. रिज़वानुल हक़ ने विभाग के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि राष्ट्रीय नेटवर्क में शामिल होना विश्वविद्यालय के लिए गर्व की बात है और इससे शोध गतिविधियों को नया विस्तार मिलेगा।
प्रो. आशीष शंकर और प्रो. आर.एस. राठौर करेंगे नेतृत्व
विश्वविद्यालय के जनसंपर्क पदाधिकारी मोहम्मद मुदस्सीर आलम ने बताया कि इस परियोजना का संचालन प्रो. आशीष शंकर प्रधान अन्वेषक (Principal Investigator) तथा प्रो. आर. एस. राठौर सह-प्रधान अन्वेषक (Co-Principal Investigator) के रूप में करेंगे। डीबीटी से प्राप्त वित्तीय सहायता के माध्यम से स्थापित यह केंद्र बायोइनफॉर्मेटिक्स, जैव प्रौद्योगिकी, फार्मेसी, जीवन विज्ञान, कृषि एवं अन्य संबंधित विषयों में शिक्षण और अनुसंधान को सुदृढ़ करेगा।
विकसित होंगे नए सॉफ्टवेयर और जैविक डेटाबेस
बीटीआईएसनेट की थीम के अनुरूप यह केंद्र जैव-सूचना विज्ञान आधारित अनुसंधान करेगा। साथ ही सभी के लिए निःशुल्क उपलब्ध बायोइनफॉर्मेटिक्स सॉफ्टवेयर, जैविक डेटाबेस तथा जैविक महत्व के वेब सर्वर विकसित किए जाएंगे, जिससे शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों को अत्याधुनिक डिजिटल संसाधन उपलब्ध हो सकेंगे।
प्रशिक्षण और कार्यशालाओं पर रहेगा विशेष फोकस
इस केंद्र का एक प्रमुख उद्देश्य मगध क्षेत्र के महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों के विद्यार्थियों और शोधार्थियों को प्रशिक्षण कार्यक्रमों, कार्यशालाओं एवं विशेषज्ञ व्याख्यानों के माध्यम से बायोइनफॉर्मेटिक्स के नवीनतम ज्ञान और तकनीकों से अवगत कराना भी है। विश्वविद्यालय का मानना है कि इससे क्षेत्र में वैज्ञानिक अनुसंधान की गुणवत्ता और क्षमता दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
