टिकारी के दिघौरा में एनडीए प्रत्याशी अनिल कुमार पर जानलेवा हमला, कई वाहन क्षतिग्रस्त

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आर्यावर्त वाणी | गयाजी | 29 अक्टूबर 2025,

गयाजी: जिले में चुनावी माहौल के बीच एक बड़ी हिंसक घटना सामने आई है। एनडीए प्रत्याशी, हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) के प्रदेश अध्यक्ष, पूर्व मंत्री एवं वर्तमान विधायक अनिल कुमार के काफिले पर टिकारी प्रखंड के दिघौरा गांव में जानलेवा हमला किया गया।

इस हमले में विधायक के कई वाहन क्षतिग्रस्त हो गए, जबकि स्वयं अनिल कुमार को भी चोटें आईं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, भीड़ की ओर से रोड़ेबाजी और फायरिंग की गई। मौके पर सुरक्षा में तैनात गार्डों ने भी हवाई फायरिंग कर भीड़ को तितर-बितर किया।

घटना के बाद इलाके में भारी तनाव फैल गया है। पुलिस-प्रशासन मौके पर कैंप कर रहा है और स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए अतिरिक्त बल तैनात किया गया है।

“चुनाव प्रचार करने निकला था। रास्ते में हमला कर दिया गया। लोगों ने मेरे काफिले को रोका और कहा कि उतरो। जैसे ही उतरे, हमला कर दिया। ईंट-रोड़े चलाने लगे। इस हमले में मेरा हाथ फ्रैक्चर हुआ है और पैर में भी चोटें हैं। कई समर्थक घायल हुए हैं।”

अनिल कुमार, NDA प्रत्याशी

“हम पार्टी की मऊ में सभा थी, जिसमें मुख्य रूप से उपेंद्र कुशवाहा शामिल हुए थे। कार्यक्रम से लौटने के दौरान टिकारी प्रखंड के पंचानपुर थाना अंतर्गत बेलमा पंचायत के दिघौरा गांव में काफिले को रोककर हमला कर दिया गया। रोड़ेबाजी के साथ-साथ गोलीबारी भी हुई। काफिले में शामिल लोगों को बंधक बनाने की कोशिश की गई। कई वाहनों को क्षतिग्रस्त कर दिया गया है।”

संजय कुमार, प्रत्याशी के प्रतिनिधि

प्रशासन की सख्त कार्रवाई की चेतावनी

इस संबंध में टिकारी एसडीपीओ सुशांत कुमार चंचल ने बताया कि घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस की टीम मौके पर पहुंची है। मैं खुद वहां पहुंचा हूं। पूरे मामले की छानबीन की जा रही है। दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।”

चुनावी तनाव और सुरक्षा पर उठे सवाल

इस हमले ने गयाजी जिले में चल रहे चुनाव प्रचार के माहौल को और तनावपूर्ण बना दिया है। चुनावी रंजिश, स्थानीय गुटबाज़ी और प्रत्याशी की लोकप्रियता को देखते हुए यह हमला राजनीतिक रूप से संवेदनशील माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता अब हिंसक रूप ले रही है, जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए चिंताजनक है। वहीं, सुरक्षा एजेंसियों के लिए यह एक बड़ी चुनौती है कि चुनावी कार्यक्रमों के दौरान प्रत्याशियों की सुरक्षा को किस तरह सुनिश्चित किया जाए।

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