मानसिक स्वास्थ्य भी शारीरिक स्वास्थ्य जितना ही महत्वपूर्ण, तनावग्रस्त लोगों की मदद के लिए आगे आएं : कुलपति प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह
आर्यावर्त वाणी | गयाजी | 13 अक्टूबर 2026
गयाजी। दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय (CUSB) के मनोवैज्ञानिक विज्ञान विभाग की ओर से आयोजित विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस सप्ताह का विभिन्न शैक्षणिक एवं रचनात्मक गतिविधियों के साथ सफलतापूर्वक समापन हुआ। सप्ताह भर चले कार्यक्रमों के दौरान व्याख्यान, भाषण प्रतियोगिता, पोस्टर निर्माण प्रतियोगिता और नाटक के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता फैलाने का प्रयास किया गया। इस वर्ष की थीम ‘लीव्ड एक्सपीरियंसेज हर्ड : रियल वॉइसेज, रियल चेंजेस’ के अनुरूप लोगों के वास्तविक अनुभवों को सुनने, समझने और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी चुनौतियों के समाधान पर जोर दिया गया।
मानसिक स्वास्थ्य की अनदेखी न करें : कुलपति
समापन समारोह में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह ने अध्यक्षीय संबोधन में मानसिक स्वास्थ्य को शारीरिक स्वास्थ्य के समान महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने तनावपूर्ण परिस्थितियों से जूझ रहे लोगों की सहायता के लिए मनोवैज्ञानिक विज्ञान विभाग के प्रयासों की सराहना की। कुलपति ने सभी से दूसरों के प्रति सहयोगात्मक रवैया अपनाने और सामूहिक कल्याण में योगदान देने का आह्वान किया। उन्होंने विद्यार्थियों और समाज के लोगों को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशील रहने तथा जरूरतमंदों की सहायता करने का संदेश दिया।
दूसरों की बात सुनना भी मदद का प्रभावी माध्यम : प्रो. मंगलेश कुमार मंगलम
विश्वविद्यालय के जनसंपर्क पदाधिकारी (पीआरओ) मोहम्मद मुदस्सीर आलम ने बताया कि कार्यक्रम के आरंभ में मनोवैज्ञानिक विज्ञान विभाग के अध्यक्ष प्रो. मंगलेश कुमार मंगलम ने स्वागत भाषण दिया। उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य और मनोवैज्ञानिक कल्याण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए सहानुभूति के साथ दूसरों की बात सुनने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि कई बार किसी व्यक्ति की मदद करने का सबसे प्रभावी तरीका उसकी बात ध्यानपूर्वक सुनना और उसकी परिस्थितियों को समझना होता है।
ऑनलाइन व्याख्यान से हुई सप्ताह की शुरुआत
कार्यक्रम की गतिविधियों का प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए डॉ. दास अंबिका भारती ने बताया कि मनोवैज्ञानिक विज्ञान विभाग ने विद्यार्थी परामर्श एवं कल्याण केंद्र के सहयोग से विश्व मानसिक स्वास्थ्य सप्ताह का आयोजन किया। सप्ताह की शुरुआत उत्तर पूर्वी क्षेत्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (NERIST) की सहायक प्राध्यापक डॉ. युमा नाराह के ऑनलाइन व्याख्यान से हुई। व्याख्यान में LGBTQIAP+ पहचान, लिंग, यौनिकता और मानसिक स्वास्थ्य जैसे विषयों पर चर्चा की गई। इस सत्र का समन्वय डॉ. अंकिता कुमारी ने किया।
पोस्टर निर्माण प्रतियोगिता में अर्चना कुमारी और सुहानी चौहान संयुक्त रूप से प्रथम
सप्ताह के दौरान आयोजित पोस्टर निर्माण प्रतियोगिता का समन्वय डॉ. दास अंबिका भारती और लेफ्टिनेंट (डॉ.) प्रज्ञा गुप्ता ने संयुक्त रूप से किया। प्रतियोगिता में बीएससी-बीएड की अर्चना कुमारी और स्नातक-स्नातकोत्तर समाजशास्त्र की सुहानी चौहान को संयुक्त रूप से प्रथम पुरस्कार प्रदान किया गया। स्नातक-स्नातकोत्तर मनोविज्ञान की नीतू कुमारी ने द्वितीय तथा इसी विभाग की स्नेहा शॉ ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।
प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल में वाणिज्य विभाग के प्रो. ब्रजेश कुमार, राजनीति विज्ञान विभाग के प्रो. प्रवीण कुमार और पर्यावरण विज्ञान विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. सोमगिरि शामिल रहे।
भाषण प्रतियोगिता में रजनी कुमारी ने हासिल किया प्रथम स्थान
भाषण प्रतियोगिता का समन्वय प्रो. धर्मेंद्र कुमार सिंह और डॉ. सुदर्शन बेहरा ने किया। प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल में अंग्रेजी एवं विदेशी भाषा विभाग की सह-प्राध्यापक डॉ. परिमला वेणु, मनोवैज्ञानिक विज्ञान विभाग की प्रो. चेतना जायसवाल तथा जनसंचार विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. अनुज कुमार सिंह शामिल थे।
प्रतियोगिता में मनोविज्ञान विभाग की रजनी कुमारी ने प्रथम, बीए एलएलबी के रमानंद आनंद ने द्वितीय और जनसंचार विभाग के शुभम कुमार ने तृतीय पुरस्कार प्राप्त किया। कुलपति प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह ने विजेताओं को प्रशस्ति-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया।
‘परिवर्तन’ नाटिका के जरिए दिया मानसिक स्वास्थ्य का संदेश
समापन समारोह में विद्यार्थियों ने शास्त्रीय नृत्य की प्रस्तुति देकर कार्यक्रम को सांस्कृतिक रंग दिया। इसके बाद मनोवैज्ञानिक विज्ञान विभाग के विद्यार्थियों ने ‘परिवर्तन’ शीर्षक से लघु नाटिका प्रस्तुत की। नाटिका के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि अपनी समस्याओं को साझा करना, जरूरत पड़ने पर दूसरों से सहायता लेना और मौन रहकर कष्ट सहने के बजाय सहयोग प्राप्त करना महत्वपूर्ण है। प्रस्तुति ने मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं पर खुलकर बात करने और जरूरत के समय मदद लेने की आवश्यकता को रेखांकित किया।
धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन
कार्यक्रम का समापन लेफ्टिनेंट (डॉ.) प्रज्ञा गुप्ता के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। पूरे सप्ताह आयोजित गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने, दूसरों के अनुभवों को संवेदनशीलता से सुनने और सहयोगपूर्ण वातावरण विकसित करने का संदेश दिया गया।
