गया कॉलेज में भारतीय ज्ञान परंपरा और संस्कृत साहित्य पर संगोष्ठी, प्राचीन वैज्ञानिक चिंतन की प्रासंगिकता पर चर्चा
आर्यावर्त वाणी | गयाजी | 10 अक्टूबर 2026
गयाजी। गया कॉलेज, गयाजी के संस्कृत विभाग की ओर से शनिवार को “भारतीय ज्ञान परंपरा की आत्मा: संस्कृत भाषा और साहित्य” विषय पर संगोष्ठी आयोजित की गई। इसमें भारतीय ज्ञान परंपरा, संस्कृत साहित्य और प्राचीन भारतीय वैज्ञानिक चिंतन की प्रासंगिकता पर विस्तार से चर्चा हुई। वक्ताओं ने संस्कृत ग्रंथों में निहित ज्ञान को आधुनिक शोध और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ जोड़कर समझने की आवश्यकता पर बल दिया।
संस्कृत भारतीय ज्ञान-विज्ञान की महत्वपूर्ण वाहक : कुलपति
संगोष्ठी में मुख्य अतिथि के रूप में दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. लक्ष्मीनिवास पांडेय उपस्थित रहे। विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ. कुसुम पांडेय ने भाग लिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता गया कॉलेज के प्राचार्य प्रो. सतीश सिंह चंद्र ने की।
अपने संबोधन में मुख्य अतिथि प्रो. लक्ष्मीनिवास पांडेय ने कहा कि भारत की ज्ञान-विज्ञान परंपरा अत्यंत समृद्ध रही है। संस्कृत केवल प्राचीन भाषा नहीं, बल्कि भारतीय ज्ञान, दर्शन, साहित्य और वैज्ञानिक चिंतन की महत्वपूर्ण वाहक है। उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण, संवर्धन और आधुनिक संदर्भों में उसके अध्ययन की आवश्यकता पर जोर दिया।
संस्कृत को आम लोगों से जोड़ने पर बल
बृजभूषण संस्कृत महाविद्यालय, खरखुरा के प्राचार्य डॉ. जितेंद्र कुमार ने संस्कृत भाषा के प्रचार-प्रसार और इसे आम लोगों से जोड़ने की आवश्यकता बताई। वहीं, डॉ. रामकेश्वर तिवारी ने संस्कृत व्याकरण में निहित भारतीय ज्ञान परंपरा के तत्वों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि प्रत्येक शब्द के मूल में एक परंपरा और उसका सांस्कृतिक परिवेश जुड़ा होता है।
डॉ. अंजनी कुमार सिंह ने संस्कृत भाषा के महत्व पर अपने विचार रखे। गया कॉलेज के दर्शनशास्त्र विभाग के डॉ. अनूप पति तिवारी ने भारतीय ज्ञान परंपरा और संस्कृत साहित्य की उपयोगिता पर चर्चा की।
प्राचीन ज्ञान परंपरा में शोध की नई संभावनाएं
गया कॉलेज के प्राचार्य प्रो. सतीश सिंह चंद्र ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा की वैज्ञानिक और तार्किक दृष्टि को समझना वर्तमान समय की आवश्यकता है। उन्होंने संस्कृत साहित्य में निहित ज्ञान-विज्ञान की विभिन्न धाराओं के अध्ययन और शोध को प्रोत्साहित करने पर बल दिया।
वक्ताओं ने कहा कि प्राचीन भारत में ज्ञान-विज्ञान की अनेक विधाओं का विकास हुआ था। संस्कृत ग्रंथों में उपलब्ध ज्ञान का आधुनिक शोध और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के आधार पर अध्ययन करने से नई संभावनाएं सामने आ सकती हैं। ऐसी संगोष्ठियां विद्यार्थियों में भारतीय ज्ञान परंपरा के प्रति रुचि विकसित करने और शोध की दिशा में प्रेरित करने में सहायक हैं।
शिक्षक, शोधार्थी और विद्यार्थी रहे उपस्थित
कार्यक्रम में बृजभूषण संस्कृत महाविद्यालय, खरखुरा के प्राचार्य डॉ. जितेंद्र कुमार, डॉ. रामकेश्वर तिवारी, डॉ. अंजनी कुमार सिंह तथा गौतम बुद्ध महिला महाविद्यालय की डॉ. प्रियंका पांडेय सहित डॉ. अरुण गर्ग, डॉ. रामदेव प्रसाद, डॉ. संजय तिवारी और डॉ. प्रशांत निहाल उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का संचालन संस्कृत विभागाध्यक्ष डॉ. संगीता आर्या ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. राजेश कुमार मिश्र ने किया। संगोष्ठी में शोधार्थियों और छात्र-छात्राओं ने भी भाग लिया।
