गयाजी में कृषि सखियों का पांच दिवसीय प्रशिक्षण संपन्न, प्राकृतिक खेती की तकनीकों और जैविक आदानों का दिया गया प्रशिक्षण
आर्यावर्त वाणी | गयाजी | 09 अक्टूबर 2026
गयाजी: राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के तहत कृषि विज्ञान केंद्र, मानपुर, गयाजी में कृषि सखियों के लिए आयोजित पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम शुक्रवार को संपन्न हुआ। 5 से 9 अक्टूबर तक चले इस प्रशिक्षण का उद्देश्य कृषि सखियों को प्राकृतिक खेती की तकनीकों के साथ प्राकृतिक कृषि आदानों के निर्माण और उपयोग में दक्ष बनाना था।
समापन समारोह में कृषि विज्ञान केंद्र के प्रमुख ने कृषि सखियों को प्रशिक्षण के दौरान प्राप्त तकनीकी ज्ञान को किसानों तक पहुंचाने और जिले में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए प्रेरित किया।
मृदा स्वास्थ्य और टिकाऊ कृषि पर दिया गया जोर
प्रशिक्षण के दौरान सहायक निदेशक (रसायन) ने मृदा स्वास्थ्य, मृदा परीक्षण और पोषक तत्वों के संतुलित प्रबंधन के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि मृदा की उर्वरता बनाए रखने और टिकाऊ कृषि उत्पादन के लिए मिट्टी की गुणवत्ता की जानकारी तथा स्थानीय संसाधनों का उचित उपयोग आवश्यक है। उन्होंने कृषि सखियों से किसानों के बीच मृदा स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने का आह्वान किया।
मृदा वैज्ञानिक डॉ. रश्मि प्रियदर्शी ने मिट्टी में सूक्ष्मजीवों की भूमिका और प्राकृतिक खेती में मृदा स्वास्थ्य के महत्व की जानकारी दी। उद्यान वैज्ञानिक डॉ. फरहाना खातून ने उद्यानिकी फसलों में प्राकृतिक खेती की संभावनाओं पर चर्चा की।
प्राकृतिक कृषि आदानों को तैयार करने का मिला प्रशिक्षण
पशु विज्ञान विशेषज्ञ डॉ. अनिल कुमार रवि ने कृषि एवं पशुपालन के एकीकरण तथा गोबर और गोमूत्र के उपयोग के महत्व को समझाया। गृह विज्ञान विशेषज्ञ डॉ. मोनिका पटेल ने सुरक्षित भोजन, पोषण और खाद्य सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया।
प्रशिक्षण के दौरान कृषि सखियों को बीज उपचार, बीजामृत, जीवामृत, घनजीवामृत और नीमास्त्र सहित विभिन्न प्राकृतिक कृषि आदानों को तैयार करने एवं उनके उपयोग की सैद्धांतिक और व्यावहारिक जानकारी दी गई। इसके साथ ही मृदा स्वास्थ्य और फसल प्रबंधन से जुड़ी तकनीकों का भी प्रशिक्षण दिया गया।
किसानों तक तकनीकी जानकारी पहुंचाने की अपील
कार्यक्रम के समापन पर कृषि सखियों को प्रशिक्षण में प्राप्त ज्ञान का उपयोग किसानों को जागरूक करने और प्राकृतिक खेती की तकनीकों को खेतों तक पहुंचाने में करने के लिए प्रेरित किया गया। इस पहल का उद्देश्य जिले में प्राकृतिक खेती के प्रसार और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को प्रोत्साहित करना है।
