सीयूएसबी में कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित
आर्यावर्त वाणी | गयाजी | 30 सितंबर 2026
गयाजी: दक्षिण बिहार केन्द्रीय विश्वविद्यालय (सीयूएसबी) के कंप्यूटर विज्ञान विभाग की ओर से कुलपति प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह के मार्गदर्शन में ‘प्रोजेक्ट एआई सक्षम भारत – एआई उपयोगकर्ताओं से एआई निर्माताओं तक’ पहल के तहत एक दिवसीय कृत्रिम बुद्धिमत्ता कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का आयोजन एनएसआईसी तकनीकी सेवा केंद्र, बोधगया तथा ऐक्सपर्ट्स इनोवेशन लैब्स प्राइवेट लिमिटेड के सहयोग से किया गया।
कार्यशाला में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), जनरेटिव एआई, उभरती प्रौद्योगिकियों, उद्योग जगत की बदलती आवश्यकताओं और भविष्य में उपलब्ध करियर अवसरों पर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यक्रम में कंप्यूटर विज्ञान विभाग के प्राध्यापकों, शोधार्थियों तथा एमएससी (कंप्यूटर विज्ञान एवं एआई) के विद्यार्थियों ने सहभागिता की।
शिक्षा, अनुसंधान और करियर में एआई के महत्व पर चर्चा
विश्वविद्यालय के जनसंपर्क पदाधिकारी (पीआरओ) मोहम्मद मुदस्सीर आलम ने बताया कि कार्यशाला का उद्घाटन कंप्यूटर विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. जयनाथ यादव ने किया। प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए उन्होंने शिक्षा, अनुसंधान एवं व्यावसायिक विकास के क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता तथा उभरती प्रौद्योगिकियों की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डाला।
उन्होंने विद्यार्थियों को बदलते तकनीकी परिवेश के अनुरूप अपने कौशल को विकसित करने तथा एआई के व्यावहारिक उपयोग को समझने के लिए प्रोत्साहित किया।
उद्योग विशेषज्ञों ने साझा की व्यावहारिक जानकारी
कार्यशाला में एनएसआईसी के केंद्र प्रमुख मनोज कुमार, एनएसआईसी के सदस्य कमल नयन तथा एक्सपर्ट्स इनोवेशन लैब्स प्राइवेट लिमिटेड के संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रदीप कुमार ने संसाधन व्यक्तियों के रूप में प्रतिभागियों को संबोधित किया।
विशेषज्ञों ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता, जनरेटिव एआई, उभरती तकनीकों, उनके व्यावहारिक अनुप्रयोगों, उद्योग-केंद्रित कौशल और भविष्य के करियर अवसरों से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कीं। वक्ताओं ने कहा कि केवल शैक्षणिक ज्ञान पर्याप्त नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों को व्यावहारिक और उद्योग की जरूरतों के अनुरूप कौशल भी विकसित करना होगा।
एआई के उपयोगकर्ता नहीं, निर्माता बनने पर जोर
कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों को एआई उपकरणों और तकनीकों का इस्तेमाल केवल अंतिम उपयोगकर्ता के तौर पर करने के बजाय संभावित निर्माता, नवप्रवर्तक और समस्या-समाधानकर्ता के रूप में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया गया।
कार्यशाला के माध्यम से विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को तेजी से बदलते तकनीकी और व्यावसायिक परिवेश के अनुरूप आवश्यक कौशल विकसित करने तथा विभिन्न क्षेत्रों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की बढ़ती भूमिका को समझने का अवसर मिला। कार्यक्रम ने उद्योग और शिक्षा जगत के बीच संवाद एवं सहभागिता को भी मजबूत किया।
शिक्षकों और विद्यार्थियों ने लिया हिस्सा
कार्यशाला में विभाग के प्रो. प्रभात रंजन, डॉ. नेमी चंद्र राठौर, डॉ. कुरुबा चंद्रकला, डॉ. पीयूष कुमार सिंह, डॉ. मृत्युंजय सिंह एवं डॉ. प्रकाश कुमार के साथ शोधार्थियों और एमएससी (कंप्यूटर विज्ञान एवं एआई) के विद्यार्थियों ने सहभागिता की।
तकनीकी सत्र के समापन के बाद डॉ. पीयूष कुमार सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। उन्होंने कार्यशाला के सफल आयोजन में योगदान देने वाले विश्वविद्यालय प्रशासन, शिक्षकगण, संसाधन व्यक्तियों, सहयोगी संस्थानों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
