आर्यावर्त वाणी | गयाजी | 19 सितंबर 2026
गयाजी: शनिवार को दक्षिण बिहार केन्द्रीय विश्वविद्यालय (सीयूएसबी) के स्कूल ऑफ अर्थ, बायोलॉजिकल एंड एनवायर्नमेंटल साइंसेज (SEBES) की ओर से माइक्रोबायोलॉजिस्ट सोसाइटी, इंडिया के सहयोग से अंतरराष्ट्रीय सूक्ष्मजीव दिवस-2026 मनाया गया। कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने मानव जीवन, स्वास्थ्य, भोजन और पर्यावरण में सूक्ष्मजीवों की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की। परिचर्चा के दौरान रोगजनक सूक्ष्मजीवों के हानिकारक प्रभावों के साथ-साथ लैक्टोबैसिलस, यीस्ट जैसे लाभकारी सूक्ष्मजीवों के महत्व को भी रेखांकित किया गया।
सहयोगात्मक अनुसंधान की आवश्यकता पर जोर
सीयूएसबी के कुलपति प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह के संरक्षण में आयोजित कार्यक्रम के उद्घाटन के बाद SEBES के अधिष्ठाता प्रो. रिजवानुल हक ने अतिथियों, प्राध्यापकों, कर्मियों एवं विद्यार्थियों का स्वागत किया। उन्होंने मानव जीवन में सूक्ष्मजीवों के महत्व को रेखांकित करते हुए विभिन्न क्षेत्रों के बीच सहयोगात्मक अनुसंधान को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय सूक्ष्मजीव दिवस प्रत्येक वर्ष दैनिक जीवन, स्वास्थ्य, भोजन और पर्यावरण में सूक्ष्मजीवों की महत्वपूर्ण भूमिका के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से मनाया जाता है।
एचपीवी और गर्भाशय-ग्रीवा कैंसर की रोगजनन प्रक्रिया पर जानकारी
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता ग्रेटर नोएडा स्थित राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान के वरिष्ठ अनुसंधान वैज्ञानिक एवं आबिर बायो-सर्विसेज फाउंडेशन के संस्थापक एवं प्रबंध निदेशक डॉ. मोहम्मद कौसर नियाज ने मानव पेपिलोमा विषाणु (HPV) और गर्भाशय-ग्रीवा कैंसर की रोगजनन प्रक्रिया पर विस्तार से जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि एचपीवी संक्रमण पुरुषों और महिलाओं दोनों को प्रभावित कर सकता है। उन्होंने टीकाकरण एवं नियमित स्वास्थ्य जांच को संक्रमण और उससे जुड़े स्वास्थ्य जोखिमों से बचाव के महत्वपूर्ण उपायों के रूप में बताया।
अधिकांश सूक्ष्मजीव हानिकारक नहीं : प्रो. सुहेल परवेज
विशिष्ट अतिथि जामिया हमदर्द, नई दिल्ली के अधिष्ठाता (शैक्षणिक) प्रो. सुहेल परवेज ने सूक्ष्मजीवों की विविध दुनिया से विद्यार्थियों को परिचित कराया। उन्होंने सूक्ष्मजीवों से जुड़े कई रोचक तथ्य साझा करते हुए बताया कि खाद्य पदार्थों के निर्माण में भी सूक्ष्मजीवों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
उन्होंने कहा कि एक प्रतिशत से भी कम सूक्ष्मजीव रोग उत्पन्न करते हैं, जबकि बड़ी संख्या में सूक्ष्मजीव या तो हानिरहित होते हैं या मानव जीवन एवं पर्यावरण के लिए लाभकारी भूमिका निभाते हैं।
पौधों में नाइट्रोजन स्थिरीकरण में सूक्ष्मजीवों की अहम भूमिका
मुख्य अतिथि मगध विश्वविद्यालय, बोधगया के कुलपति एवं प्राणीशास्त्र विशेषज्ञ प्रो. दिलीप कुमार केसरी ने पौधों में नाइट्रोजन स्थिरीकरण में सूक्ष्मजीवों की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि मानव जीवन पौधों पर काफी हद तक निर्भर है और पौधों की प्रक्रियाओं में सूक्ष्मजीवों की महत्वपूर्ण भूमिका होने के कारण इनके महत्व को समझना आवश्यक है।
विद्यार्थी राष्ट्र निर्माता, उनमें अपार संभावनाएं : कुलपति
अपने अध्यक्षीय संबोधन में सीयूएसबी के कुलपति प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह ने अंतरराष्ट्रीय सूक्ष्मजीव दिवस के अवसर पर विभिन्न कार्यक्रमों के आयोजन के लिए आयोजन दल की सराहना की। उन्होंने विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता को कार्यक्रम की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थी केवल संसाधन नहीं हैं, बल्कि राष्ट्र निर्माता हैं। प्रत्येक विद्यार्थी विशिष्ट है और उसमें अपार संभावनाएं हैं। कुलपति ने प्राकृतिक संसाधनों के अत्यधिक दोहन और इससे पर्यावरण पर पड़ रहे प्रभावों को लेकर भी चिंता व्यक्त की।
विज्ञान मॉडल प्रदर्शनी और प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने दिखाई प्रतिभा
कार्यक्रम की शुरुआत विद्यार्थियों द्वारा विज्ञान मॉडल प्रदर्शनी एवं प्रतियोगिता से हुई। विद्यार्थियों ने सूक्ष्मजीवों पर आधारित विभिन्न वैज्ञानिक मॉडल प्रस्तुत किए और अपनी रचनात्मकता एवं वैज्ञानिक सोच का प्रदर्शन किया। प्रतियोगिता में विद्यार्थी दलों को तीन पुरस्कार प्रदान किए गए।
इसके अलावा शोधार्थियों ने लघु मौखिक प्रस्तुतियां दीं। प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिकाओं में उत्कृष्ट शोध प्रकाशनों के लिए शोधार्थियों को सम्मानित भी किया गया।
300 से अधिक लोगों ने लिया हिस्सा
कार्यक्रम के आयोजन सचिवों में डॉ. जावेद अहसन (बायोटेक्नोलॉजी), डॉ. अमृता श्रीवास्तव (लाइफ साइंस), डॉ. सुनीता सिंह (जियोग्राफी), डॉ. धीरेन्द्र कुमार (जियोलॉजी), डॉ. कृष्ण कुमार ओझा (बायोटेक्नोलॉजी) एवं डॉ. प्रशांत (एनवायर्नमेंटल साइंस) ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. अमृता श्रीवास्तव ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. सुनीता सिंह ने किया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के संकाय सदस्यों एवं विद्यार्थियों सहित 300 से अधिक लोगों ने सहभागिता की।
