राजभवन सचिवालय के जनरल कंडीशन स्टेच्युट पर गया कॉलेज शिक्षक संघ ने जताई आपत्ति, पुनर्विचार की मांग

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आर्यावर्त वाणी | गयाजी | 09 सितंबर 2026

गयाजी: गया कॉलेज शिक्षक संघ की ओर से बुधवार को बैठक आयोजित कर राजभवन सचिवालय द्वारा जारी जनरल कंडीशन स्टेच्युट के विभिन्न प्रावधानों पर चर्चा की गई। बैठक में कॉलेज के विभिन्न विभागों के प्राध्यापक शामिल हुए। शिक्षक संघ ने स्टेच्युट के कई प्रावधानों का स्वागत करते हुए कुछ बिंदुओं पर पुनर्विचार की आवश्यकता जताई।

सेवा अनुबंध और स्व-मूल्यांकन रिपोर्ट पर आपत्ति

बैठक में शिक्षकों ने सेवा अनुबंध से जुड़े प्रावधान पर चर्चा की। संघ के अनुसार इसमें रजिस्ट्रार को प्राधिकरण बनाए जाने की बात कही गई है। वहीं, प्रोबेशन अवधि समाप्त होने से तीन महीने पहले स्व-मूल्यांकन रिपोर्ट जमा करने तथा रिपोर्ट को यथासंगत नहीं पाए जाने की स्थिति में सेवा समाप्ति का प्रावधान भी बताया गया है।

शिक्षक संघ का कहना है कि शिक्षकों को रिपोर्ट या मूल्यांकन व्यवस्था से आपत्ति नहीं है, लेकिन स्टेच्युट में यह स्पष्ट होना चाहिए कि सेवा स्थायीकरण अथवा प्रोबेशन के दौरान किन निर्धारित मानकों, कर्तव्यों और प्रदर्शन के आधार पर शिक्षक का मूल्यांकन किया जाएगा।

अस्पष्ट प्रावधान से भ्रष्टाचार और प्रताड़ना की आशंका : शिक्षक संघ

शिक्षक संघ ने आशंका जताई कि यदि मूल्यांकन के मानदंड स्पष्ट नहीं किए गए तो इससे मनमानी की स्थिति पैदा हो सकती है। संघ का कहना है कि अस्पष्ट प्रावधानों के कारण विश्वविद्यालय के अधिकारियों द्वारा सेवा स्थायीकरण, प्रोन्नति अथवा अन्य सेवा संबंधी मामलों में शिक्षकों को प्रताड़ित किए जाने की संभावना रहेगी।

DHE पद सृजन पर भी उठाया सवाल

बैठक में स्टेच्युट में DHE के पद के सृजन से जुड़े प्रावधान पर भी सवाल उठाए गए। शिक्षक संघ ने कहा कि जब विश्वविद्यालय में कुलपति और रजिस्ट्रार तथा ऊपर राजभवन सचिवालय की व्यवस्था है, ऐसे में DHE पद की आवश्यकता और उसकी प्रशासनिक भूमिका को स्पष्ट किया जाना चाहिए।

संघ ने सवाल उठाया कि यदि रजिस्ट्रार जैसे महत्वपूर्ण पद को DHE को रिपोर्ट करना होगा तो ऐसी प्रशासनिक व्यवस्था का औचित्य क्या है। शिक्षक संघ ने इस बिंदु पर भी पुनर्विचार की मांग की।

प्रमोशन और विभिन्न अवकाशों के प्रावधानों पर भी चर्चा

बैठक में शिक्षकों की प्रोन्नति, कम्यूटेड लीव, कैजुअल लीव, पैटर्निटी लीव समेत अन्य अवकाशों से जुड़े प्रावधानों पर भी चर्चा हुई। संघ के सदस्यों ने कहा कि इन प्रावधानों में विभिन्न शर्तों और क्लॉज के कारण व्यवस्था जटिल हो गई है। शिक्षक संघ ने संबंधित प्रावधानों को सरल, स्पष्ट और व्यावहारिक बनाने की आवश्यकता जताई।

विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता पर प्रहार का लगाया आरोप

गया कॉलेज शिक्षक संघ ने सरकार की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। संघ का आरोप है कि सरकार बिना पर्याप्त विचार-विमर्श के कुछ प्रावधानों को लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। संघ ने कहा कि विश्वविद्यालय अधिनियम 2026 को लेकर भी पहले इसी तरह बिना व्यापक चर्चा के आगे बढ़ने की तैयारी की गई थी, लेकिन विरोध के बाद सरकार को पीछे हटना पड़ा।

शिक्षक संघ ने आरोप लगाया कि अब राजभवन सचिवालय के माध्यम से विश्वविद्यालय और महाविद्यालयों के अधिकारों को सीमित करने तथा उनकी स्वायत्तता पर प्रहार करने का प्रयास किया जा रहा है। संघ ने कहा कि किसी भी नई सेवा शर्त या प्रशासनिक व्यवस्था को लागू करने से पहले शिक्षकों और विश्वविद्यालयों के हितधारकों के साथ व्यापक विचार-विमर्श किया जाना चाहिए।

बैठक में शिक्षक संघ के पदाधिकारी और प्राध्यापक रहे मौजूद

बैठक में गया कॉलेज शिक्षक संघ की अध्यक्ष प्रो. विभा सिंह, सचिव डॉ. आनंद कुमार, कोषाध्यक्ष डॉ. पन्ना लाल, सदस्य डॉ. मार्कंडेय पांडे, डॉ. अनूप कुमार, परीक्षा नियंत्रक डॉ. सोम नाथ, पीआरओ डॉ. राजेश मिश्र सहित रसायन विभाग, गणित विभाग, पालि विभाग, राजनीति शास्त्र विभाग एवं अन्य विभागों के प्राध्यापक उपस्थित रहे।

शिक्षक संघ ने जनरल कंडीशन स्टेच्युट के उन सभी प्रावधानों पर पुनर्विचार की मांग की है, जिन्हें वह शिक्षकों और उच्च शिक्षा संस्थानों की स्वायत्तता के लिए प्रतिकूल मानता है।

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