एनसीसी कैंप से प्रतिभाओं को पहचानने का मिलता है अवसर : प्राचार्य सतीश सिंह चंद्र

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आर्यावर्त वाणी | गयाजी | 21 अगस्त 2026

गयाजी: गया कॉलेज परिसर में 6 बिहार बटालियन एनसीसी की ओर से आयोजित 17वें कंबाइंड एनुअल ट्रेनिंग कैंप के पांचवें दिन सेमिनार का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में गया कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सतीश सिंह चंद्र ने एनसीसी कैडेटों को संबोधित करते हुए प्रशिक्षण शिविर के महत्व और जीवन में अनुशासन की भूमिका पर प्रकाश डाला।

कैंप प्रतिभा पहचानने का बेहतर मंच

प्राचार्य डॉ. सतीश सिंह चंद्र ने कहा कि प्रशिक्षण शिविर कैडेटों के लिए सीखने और अपनी प्रतिभा को पहचानने का बेहतर अवसर है। कैंप के दौरान प्रत्येक कैडेट को यह समझने का मौका मिलता है कि उसके अंदर कौन-सी प्रतिभा छिपी हुई है और उसका बेहतर उपयोग किस दिशा में किया जा सकता है।

उन्होंने कैडेटों से कहा कि जीवन की हर परिस्थिति से कुछ न कुछ सीखने का प्रयास करना चाहिए। देश सेवा के लिए किसी विशेष स्थान पर होना जरूरी नहीं है। व्यक्ति जहां है, वहीं से ईमानदारी और जिम्मेदारी के साथ देश की सेवा कर सकता है।

ईमानदारी और अनुशासन को जीवन का हिस्सा बनाने की अपील

प्राचार्य ने कैडेटों को प्रेरित करते हुए कहा कि वे जीवन में जो भी कार्य करें, उसे पूरी ईमानदारी, अनुशासन और निष्ठा के साथ करें। यही गुण उन्हें जिम्मेदार नागरिक और बेहतर इंसान बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

जंगल की आग और छोटी चिड़िया की कहानी से दिया संदेश

कैडेटों को प्रेरित करने के लिए प्राचार्य ने जंगल में लगी आग से जुड़ी एक कहानी भी सुनाई। उन्होंने बताया कि जंगल में आग लगने पर एक छोटी चिड़िया अपनी चोंच में पानी भरकर आग बुझाने का प्रयास कर रही थी। उसका प्रयास भले ही छोटा था, लेकिन उसने अपनी क्षमता के अनुसार जिम्मेदारी निभाने की कोशिश की।

उन्होंने कहा कि इस कहानी से सीख मिलती है कि किसी भी बड़े कार्य में हर व्यक्ति का छोटा-सा योगदान भी महत्वपूर्ण होता है। इसलिए किसी कार्य को छोटा समझकर उससे पीछे नहीं हटना चाहिए।

कमांडिंग ऑफिसर ने प्राचार्य को किया सम्मानित

कार्यक्रम के अंत में 6 बिहार बटालियन एनसीसी के कमांडिंग ऑफिसर कर्नल पंकज कुमार, कीर्ति चक्र ने गया कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सतीश सिंह चंद्र को स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया।

कैंप में शामिल एनसीसी कैडेटों ने सेमिनार के दौरान दिए गए संदेशों को ध्यानपूर्वक सुना और उन्हें अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।

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