अशोक धाम में भगदड़ से 7 श्रद्धालुओं की मौत, 22 घायल; बिजली के पोल से फैली अफवाह के बाद मची अफरा-तफरी, व्यवस्था पर उठे सवाल
आर्यावर्त वाणी | लखीसराय | 17 अगस्त 2026
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लखीसराय: बिहार के लखीसराय स्थित प्रसिद्ध अशोक धाम मंदिर में सावन की तीसरी सोमवारी पर सोमवार को बड़ा हादसा हो गया। मंदिर में जलाभिषेक और दर्शन के लिए हजारों श्रद्धालु पहुंचे थे। इसी दौरान अशोक धाम हॉल्ट की ओर जाने वाले रास्ते पर अचानक अफरा-तफरी मच गई और भगदड़ जैसी स्थिति पैदा हो गई।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार हादसे में कम से कम 7 श्रद्धालुओं की मौत हुई है, जबकि 22 लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, अलग-अलग समय पर मृतकों की संख्या को लेकर रिपोर्टों में अंतर आया है और प्रशासन की ओर से आंकड़ों की लगातार समीक्षा की जा रही है।
बिजली का पोल गिरा, करंट की अफवाह से मची भगदड़
लखीसराय के जिलाधिकारी शैलेन्द्र कुमार के अनुसार, श्रद्धालुओं की कतार अशोक धाम हॉल्ट तक पहुंच गई थी। इसी दौरान वहां एक बिजली का पोल गिर गया। इसके बाद भीड़ में यह अफवाह फैल गई कि बिजली का तार गिरने से करंट फैल गया है।
इस अफवाह के बाद श्रद्धालुओं में अचानक भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। रिपोर्टों के अनुसार, वास्तविक स्थिति यह थी कि गिरा हुआ तार बिजली प्रवाहित कर रहा था या नहीं, इसे लेकर भ्रम की स्थिति बनी। प्रशासन ने घटना के वास्तविक कारणों की जांच की बात कही है।
बैरिकेडिंग टूटने से बढ़ी स्थिति, लोग एक-दूसरे पर गिरे
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, अफरा-तफरी के दौरान श्रद्धालु जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। इसी दौरान रास्ते की बैरिकेडिंग पर दबाव बढ़ा और उसके टूटने के बाद कई लोग एक-दूसरे के ऊपर गिर गए।
घटना के बाद प्रशासन और पुलिस की टीम सक्रिय
हादसे के बाद पुलिस और जिला प्रशासन की टीम ने राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। घायलों को लखीसराय सदर अस्पताल समेत आसपास के अस्पतालों में उपचार के लिए भेजा गया। प्रशासन की ओर से घटना की परिस्थितियों और भगदड़ के वास्तविक कारणों की जांच की जा रही है।
SDPO शिवम कुमार ने प्रारंभिक तौर पर बताया कि बिजली का पोल गिरने और लोगों के बिजली की चपेट में आने की बात सामने आई है, लेकिन घटना की सही वजह जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
हादसे के बाद अशोक धाम में भीड़ प्रबंधन, बैरिकेडिंग, बिजली व्यवस्था और श्रद्धालुओं की आवाजाही को नियंत्रित करने की तैयारियों पर सवाल उठने लगे हैं। सावन की सोमवारी जैसे बड़े धार्मिक अवसर पर मंदिर में भारी भीड़ जुटने की संभावना पहले से रहती है, ऐसे में प्रवेश और निकास मार्ग, बैरिकेडिंग तथा आपातकालीन निकासी व्यवस्था को लेकर अब सवाल खड़े हो रहे हैं।
सरकार ने मृतकों के परिजनों को 4-4 लाख रुपये देने की घोषणा की
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने हादसे पर दुख जताते हुए मृतकों के निकटतम आश्रितों को 4-4 लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की है। सरकार की ओर से घायलों के इलाज और राहत कार्यों की जानकारी भी दी गई है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी हादसे पर शोक जताते हुए घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की और कहा कि स्थानीय प्रशासन घायलों को हर संभव उपचार उपलब्ध करा रहा है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है।
मंत्री ने कहा- दोषियों पर होगी कार्रवाई
हादसे के बाद कृषि मंत्री विजय कुमार सिंहा मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि घटना की जांच कर जिम्मेदारी तय की जाएगी और यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई होगी। इस हादसे ने एक बार फिर बड़े धार्मिक आयोजनों में क्राउड मैनेजमेंट और सुरक्षा प्रोटोकॉल को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अशोक धाम में हुई यह घटना कुछ ही मिनटों में बड़े हादसे में बदल गई। अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि भारी भीड़ के बावजूद सुरक्षा और निकासी की व्यवस्था पर्याप्त थी या नहीं और बिजली के पोल तथा बैरिकेडिंग जैसी व्यवस्थाओं की पूर्व जांच क्यों नहीं हो सकी। इन सवालों का जवाब जांच रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होगा।
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