सीयूएसबी में राष्ट्रीय पुस्तकालयाध्यक्ष दिवस पर डॉ. रंगनाथन को किया गया याद, AI के दौर में बदलती पुस्तकालयों की भूमिका पर चर्चा

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आर्यावर्त वाणी | गयाजी | 13 अगस्त 2026,

गयाजी। भारत में पुस्तकालय विज्ञान के जनक एवं पद्मश्री डॉ. एस. आर. रंगनाथन की 134वीं जयंती के अवसर पर गुरुवार को दक्षिण बिहार केन्द्रीय विश्वविद्यालय (सीयूएसबी) में राष्ट्रीय पुस्तकालयाध्यक्ष दिवस मनाया गया। विश्वविद्यालय के राजर्षि जनक केंद्रीय पुस्तकालय में आयोजित कार्यक्रम में डॉ. रंगनाथन के योगदान को याद करते हुए आधुनिक दौर में पुस्तकालयों की बदलती भूमिका पर चर्चा की गई।

विश्वविद्यालय पुस्तकालयाध्यक्ष एवं पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. प्रमोद कुमार सिंह के मार्गदर्शन में आयोजित कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. एस. आर. रंगनाथन के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर हुई।

AI और डिजिटल तकनीक से बदल रहे पुस्तकालय

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता प्रो. अनिल कुमार सिंह झा, अधिष्ठाता, सामाजिक विज्ञान एवं नीति अध्ययन स्कूल, सीयूएसबी ने कहा कि आधुनिक समय में पुस्तकालयों की भूमिका तेजी से बदल रही है।

उन्होंने कहा कि आज पुस्तकालय केवल पुस्तकों के भौतिक संग्रह तक सीमित नहीं हैं, बल्कि तकनीक-सक्षम, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित और ज्ञान-केंद्रित शिक्षण संसाधन केंद्र के रूप में विकसित हो रहे हैं।

कार्यक्रम में वक्ताओं ने डिजिटल पुस्तकालय, ई-संसाधन, ऑनलाइन सूचना सेवाओं, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डेटा आधारित ज्ञान प्रणालियों को आधुनिक पुस्तकालय व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया।

आज भी प्रासंगिक हैं रंगनाथन के पांच नियम

कार्यक्रम के दौरान डॉ. रंगनाथन द्वारा प्रतिपादित पुस्तकालय विज्ञान के पांच नियमों की प्रासंगिकता पर भी चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि डिजिटल तकनीक और AI के तेजी से बढ़ते प्रभाव के बावजूद पुस्तकालय सेवाओं में उपयोगकर्ता-केंद्रित दृष्टिकोण और ज्ञान तक आसान पहुंच की मूल भावना आज भी महत्वपूर्ण है।

विश्वविद्यालय समुदाय ने डॉ. रंगनाथन के योगदान को याद करते हुए उनके आदर्शों और दूरदर्शी विचारों को डिजिटल युग में आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।

विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता को किया गया रेखांकित

सीयूएसबी के जनसंपर्क पदाधिकारी मोहम्मद मुदस्सीर आलम ने बताया कि राष्ट्रीय पुस्तकालयाध्यक्ष दिवस का आयोजन डॉ. एस. आर. रंगनाथन की विरासत को सम्मान देने के साथ-साथ पुस्तकालयों को ज्ञान, नवाचार, डिजिटल तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के आधुनिक केंद्र के रूप में विकसित करने की विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है।

कार्यक्रम के अंत में डॉ. पंकज माथुर, उप-पुस्तकालयाध्यक्ष, सीयूएसबी ने धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने कार्यक्रम के सफल आयोजन में सहयोग करने वाले विश्वविद्यालय के अधिकारियों, शिक्षकों, कर्मचारियों और आयोजन से जुड़े सभी सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त किया।

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