गेहूं के डंठल में आग, फायर ब्रिगेड से विवाद, संकीर्ण सड़कों और मुआवजा नीति पर उठे सवाल
आर्यावर्त वाणी | गयाजी | 17 अप्रैल 2026,
गयाजी; खिजरसराय थाना क्षेत्र के ग्राम महाराज बीघा (पंचायत आइमा) में शुक्रवार को गेहूं की खुट्टी (डंठल) में आग लगने की घटना ने एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में आपदा प्रबंधन, सड़क व्यवस्था और मुआवजा नीति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्रामीणों द्वारा गेहूं की कटाई के बाद बचे डंठल में आग लगा दी गई, जिसके बाद स्थिति को नियंत्रित करने के लिए फायर ब्रिगेड की बड़ी वाटर टेंडर गाड़ी को बुलाया गया। हालांकि, गांव की संकीर्ण और अतिक्रमण से घिरी सड़कों के कारण दमकल वाहन रास्ते में ही फंस गया, जिससे घटनास्थल पर पहुंचने में देरी हुई।
इस देरी को लेकर मौके पर मौजूद ग्रामीणों और फायर ब्रिगेड कर्मियों के बीच तीखी बहस हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, ग्रामीणों ने देर से पहुंचने को लेकर आपत्ति जताई, जबकि दमकल कर्मियों का कहना था कि संकीर्ण रास्ते और अव्यवस्थित यातायात के कारण समय पर पहुंचना संभव नहीं हो सका।
मुआवजा पाने की आशंका ने बढ़ाई चिंता
स्थानीय सूत्रों और अधिकारियों के अनुसार, कुछ मामलों में जानबूझकर खेतों में आग लगाने की प्रवृत्ति सामने आ रही है, ताकि फसल नुकसान दिखाकर प्रशासन से मुआवजा प्राप्त किया जा सके। यदि यह आरोप सही पाया जाता है, तो यह न केवल कानून का दुरुपयोग है बल्कि इससे वास्तविक पीड़ित किसानों के अधिकार भी प्रभावित होते हैं।
संकीर्ण सड़कें बनी बड़ी बाधा
ग्रामीण इलाकों में पहले से ही संकीर्ण सड़कों पर अतिक्रमण की समस्या गंभीर बनी हुई है। ऐसे में आपातकालीन सेवाओं जैसे फायर ब्रिगेड को घटनास्थल तक पहुंचने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह समस्या भविष्य में और बड़े हादसों का कारण बन सकती है, यदि समय रहते इसका समाधान नहीं किया गया।
आपसी सहयोग की आवश्यकता
फायर ब्रिगेड जैसी सेवाएं आम जनता की सुरक्षा के लिए कार्य करती हैं, लेकिन इसके लिए स्थानीय सहयोग भी उतना ही आवश्यक है। अधिकारियों ने अपील की है कि ग्रामीण आगजनी जैसी घटनाओं से बचें और आपात स्थिति में दमकल कर्मियों के साथ सहयोग करें, ताकि समय रहते नुकसान को कम किया जा सके।
