सीयूएसबी में प्रथम एनएचआरसी–सीयूएसबी राष्ट्रीय मूट कोर्ट प्रतियोगिता 2026 का शुभारंभ
आर्यावर्त वाणी | गयाजी | 12 मार्च 2026,
गयाजी: दक्षिण बिहार केन्द्रीय विश्वविद्यालय (सीयूएसबी) के स्कूल ऑफ लॉ एंड गवर्नेंस की मूट कोर्ट सोसाइटी द्वारा राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) के सहयोग से आयोजित प्रथम एनएचआरसी–सीयूएसबी राष्ट्रीय मूट कोर्ट प्रतियोगिता 2026 का भव्य उद्घाटन 12 मार्च को विश्वविद्यालय परिसर में किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ कुलपति प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह और मुख्य अतिथि बालकृष्ण नारायण, अध्यक्ष उत्तर प्रदेश मानव अधिकार आयोग द्वारा पारंपरिक दीप प्रज्वलन के साथ किया गया।
न्यायाधीश का कर्तव्य वादकारी की सेवा करना: न्यायमूर्ति
मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति बालकृष्ण नारायण ने अपने संबोधन में कहा कि न्यायाधीश का प्रमुख कर्तव्य वादकारी की सेवा करना है। उन्होंने कहा कि मूट कोर्ट प्रतियोगिताएँ विद्यार्थियों को न केवल गहन विधिक ज्ञान प्रदान करती हैं, बल्कि उनमें अधिवक्ता कौशल और तर्क प्रस्तुत करने की क्षमता भी विकसित करती हैं। उन्होंने न्यायालय में शांतचित्त और विनम्रता के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि बौद्धिक क्षमता के साथ विनम्रता भी उतनी ही आवश्यक है।
मानवाधिकार मुद्दों पर जागरूकता बढ़ाती हैं मूट कोर्ट प्रतियोगिताएँ
अपने अध्यक्षीय संबोधन में कुलपति प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह ने कहा कि इस प्रकार की प्रतियोगिताएँ युवा विधि विद्यार्थियों के बीच समकालीन मानवाधिकार मुद्दों, विशेषकर निजता के अधिकार को लेकर जागरूकता बढ़ाती हैं। उन्होंने “वन सोल” की अवधारणा का उल्लेख करते हुए कहा कि कानून के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए समाज में सकारात्मक दृष्टिकोण का होना आवश्यक है।
देशभर से 30 टीमें ले रहीं भाग
जनसंपर्क पदाधिकारी मोहम्मद मुदस्सीर आलम ने बताया कि उद्घाटन समारोह के दौरान न्यायमूर्ति बालकृष्ण नारायण और कुलपति प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह ने प्रतियोगिता की स्मारिका का भी अनावरण किया। स्कूल ऑफ लॉ एंड गवर्नेंस के अधिष्ठाता एवं विभागाध्यक्ष प्रो. अशोक कुमार ने प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कहा कि इस राष्ट्रीय आयोजन का उद्देश्य विधि छात्रों के बीच गंभीर विधिक विमर्श और व्यावहारिक अधिवक्ता कौशल को बढ़ावा देना है।
मूट कोर्ट सोसाइटी के फैकल्टी कोऑर्डिनेटर मणि प्रताप ने बताया कि इस प्रतियोगिता में देश के विभिन्न विधि संस्थानों से 30 टीमें भाग ले रही हैं। प्रतिभागियों के प्रोत्साहन के लिए कुल 1 लाख 44 हजार रुपये की पुरस्कार राशि निर्धारित की गई है।
रिसर्चर्स टेस्ट और मूट सत्र की शुरुआत
कार्यक्रम के अंत में मूट कोर्ट सोसाइटी की सह-समन्वयक डॉ. कुमारी नीतू ने धन्यवाद ज्ञापन दिया। उद्घाटन सत्र के बाद प्रतिभागियों ने रिसर्चर्स टेस्ट में भाग लिया, जिसमें उनके विधिक ज्ञान और विश्लेषणात्मक क्षमता का मूल्यांकन किया गया।
इसके बाद आयोजित सत्र में प्रतिभागियों को मूट रणनीतियों, मेमोरियल लेखन, न्यायालयीन शिष्टाचार और प्रभावी तर्क प्रस्तुत करने की तकनीकों पर विशेषज्ञ मार्गदर्शन दिया गया। दिन का समापन ड्रा ऑफ लॉट्स और मेमोरियल एक्सचेंज के साथ हुआ, जिसके बाद प्रतियोगिता के प्रतिस्पर्धी चरणों की औपचारिक शुरुआत हो गई।