सीयूएसबी के सोशल वर्क विद्यार्थियों ने किया गया स्थित बाल गृह का क्षेत्रीय भ्रमण, व्यवस्थाओं और चुनौतियों की ली जानकारी
आर्यावर्त वाणी | गयाजी | 22 अक्टूबर 2026,
गयाजी। दक्षिण बिहार केन्द्रीय विश्वविद्यालय (सीयूएसबी) के समाजशास्त्रीय अध्ययन विभाग के एमए सोशल वर्क (एमएसडब्ल्यू) प्रथम सेमेस्टर के विद्यार्थियों ने गयाजी में जेल के निकट स्थित बाल गृह का क्षेत्रीय भ्रमण किया। इस दौरान विद्यार्थियों ने बाल संरक्षण, किशोर न्याय व्यवस्था और बाल गृह के संचालन से जुड़ी प्रक्रियाओं की जानकारी प्राप्त की। विभाग के प्राध्यापक प्रो. एम. विजय कुमार शर्मा एवं डॉ. पारिजात प्रधान के मार्गदर्शन में आयोजित इस भ्रमण का उद्देश्य विद्यार्थियों को सामाजिक कार्य के व्यावहारिक पहलुओं से परिचित कराना था।
किशोर न्याय अधिनियम की दी गई जानकारी
बाल गृह में नितेश कुमार ने विश्वविद्यालय की टीम का स्वागत किया और किशोर न्याय अधिनियम के तहत बच्चों की देखभाल, संरक्षण एवं पुनर्वास से संबंधित प्रावधानों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस व्यवस्था के अंतर्गत देखभाल एवं संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों तथा विधि का उल्लंघन करने वाले किशोरों को अलग-अलग श्रेणियों में रखा जाता है।
देखभाल एवं संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों में बाल श्रम से मुक्त कराए गए, मानव तस्करी के पीड़ित, परित्यक्त, लापता और स्वेच्छा से अभिभावकों द्वारा सौंपे गए बच्चे शामिल हो सकते हैं। उन्होंने बताया कि बच्चों की उम्र और आवश्यकताओं के अनुरूप अलग-अलग देखभाल की व्यवस्था की जाती है।
बाल गृह की क्षमता 50, रह रहे लगभग 101 बालक
भ्रमण के दौरान बाल गृह की क्षमता और वहां उपलब्ध सुविधाओं से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी भी सामने आई। नितेश कुमार के अनुसार, बाल गृह की निर्धारित क्षमता 50 बालकों की है, जबकि वर्तमान में यहां लगभग 101 बालक रह रहे हैं। कभी-कभी यह संख्या बढ़कर 125 से 130 तक पहुंच जाती है।
उन्होंने बताया कि बाल गृह के संचालन में क्षमता के मुकाबले अधिक बच्चों की मौजूदगी एक बड़ी चुनौती है। साथ ही, सरकार की ओर से प्रतिदिन प्रति व्यक्ति 75 रुपये का भत्ता मिलने की जानकारी भी दी गई।
किशोर न्याय प्रक्रिया और अपराधों की श्रेणियों पर चर्चा
विद्यार्थियों को बताया गया कि किशोर न्याय व्यवस्था में अपराधों को छोटे, गंभीर और जघन्य अपराधों की श्रेणियों में विभाजित किया जाता है। छोटे अपराधों में मामूली चोरी जैसे मामले शामिल हो सकते हैं, जबकि हत्या और बलात्कार जैसे अपराध जघन्य श्रेणी में आते हैं।
किसी किशोर के मामले में कानूनी प्रक्रिया के तहत संबंधित प्रावधानों के अनुसार कार्रवाई की जाती है और उसे किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष प्रस्तुत किया जाता है। बोर्ड मामले पर विचार करते हुए आवश्यक निर्णय लेता है। इस प्रक्रिया में बच्चे की सुरक्षा, सहजता और उसके हितों का ध्यान रखने पर जोर दिया जाता है।
विद्यार्थियों ने पूछे सवाल, समझीं व्यावहारिक चुनौतियां
क्षेत्रीय भ्रमण के दौरान एमएसडब्ल्यू के विद्यार्थियों ने बाल गृह के संचालन, बच्चों की देखभाल, उपलब्ध संसाधनों और प्रशासनिक चुनौतियों से संबंधित सवाल पूछे। अधिकारियों से मिली जानकारी ने विद्यार्थियों को बाल संरक्षण एवं सामाजिक कार्य के क्षेत्र में आने वाली व्यावहारिक समस्याओं को समझने का अवसर दिया।
कार्यक्रम के अंत में एमएसडब्ल्यू के विद्यार्थी चंदन भारद्वाज ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। यह क्षेत्रीय भ्रमण विद्यार्थियों के लिए अकादमिक ज्ञान को व्यावहारिक अनुभव से जोड़ने और बाल अधिकारों एवं किशोर न्याय व्यवस्था की समझ विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण रहा।
