CUSB में आइडिया इनोवेशन हैकाथॉन 1.0 का आयोजन, कुलपति बोले—नौकरी तलाशने वाले नहीं, रोजगार देने वाले बनें विद्यार्थी
आर्यावर्त वाणी | गयाजी | 28 अक्टूबर 2026,
गयाजी। दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय (CUSB) में विद्यार्थियों की रचनात्मक सोच और नवाचार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बुधवार को आइडिया इनोवेशन हैकाथॉन 1.0 का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह ने विद्यार्थियों के नए विचारों की सराहना करते हुए उन्हें व्यावहारिक समाधान और उपयोगी उत्पाद विकसित करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि किसी भी विचार की असली सफलता केवल उसकी प्रस्तुति में नहीं, बल्कि समाज की जरूरतों को पूरा करने की उसकी क्षमता में होती है।
विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूशन इनोवेशन काउंसिल (IIC) की इनोवेशन कमिटी ने रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) सेल के सहयोग से इस कार्यक्रम का आयोजन किया। इसमें विद्यार्थियों ने व्यक्तिगत और सामूहिक रूप से अपने नवाचारी विचार प्रस्तुत किए। कुलपति ने विद्यार्थियों से सीधे संवाद कर उनके विचारों को बेहतर बनाने और उन्हें वास्तविक जीवन में उपयोगी बनाने के लिए सुझाव दिए।
केवल विचार नहीं, काम करने वाला मॉडल तैयार करें विद्यार्थी
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कुलपति प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह ने कहा कि ज्ञान का वास्तविक महत्व उसके व्यावहारिक उपयोग में है। विद्यार्थियों को केवल अपने विचारों की प्रस्तुति तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उन विचारों के आधार पर छोटे-छोटे कार्यशील मॉडल और प्रारूप तैयार करने चाहिए।
उन्होंने कहा कि किसी भी नवाचार की उपयोगिता का पता उसके परीक्षण से चलता है। इसलिए विद्यार्थियों को अपने उत्पादों और समाधानों की व्यवहार्यता जांचनी चाहिए, ताकि यह समझा जा सके कि उनका विचार वास्तविक परिस्थितियों में कितना कारगर साबित हो सकता है। वेबसाइट आधारित विचारों पर काम कर रहे विद्यार्थियों को भी अपने प्रारूप विकसित कर उनकी उपयोगिता का परीक्षण करने की सलाह दी गई।
नौकरी मांगने वाले नहीं, रोजगार देने वाले बनें युवा
कुलपति ने विद्यार्थियों को नवाचार के माध्यम से उद्यमिता की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को केवल नौकरी पाने के उद्देश्य से नहीं, बल्कि ऐसे विचारों और उत्पादों के विकास के लिए भी काम करना चाहिए, जिनसे भविष्य में रोजगार के नए अवसर पैदा हो सकें।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि किसी विचार की सफलता इस पर निर्भर करती है कि वह समाज की वास्तविक जरूरतों को कितना पूरा करता है और कितने लोगों तक उसका लाभ पहुंचता है। विद्यार्थियों को अपने नवाचारी विचारों को संभावित उद्यमों, उपयोगी उत्पादों और व्यावहारिक समाधानों में बदलने की दिशा में काम करना चाहिए।
किफायती, पर्यावरण के अनुकूल और समाजोपयोगी हों नवाचार
कुलपति प्रो. सिंह ने नवाचारों के विकास में तीन महत्वपूर्ण पहलुओं पर विशेष जोर दिया—आर्थिक रूप से किफायती होना, पर्यावरणीय स्थिरता और सामाजिक उपयोगिता।
उन्होंने विद्यार्थियों को ऐसे उत्पाद और समाधान विकसित करने के लिए प्रेरित किया, जिन्हें आम लोग आसानी से खरीद और इस्तेमाल कर सकें। साथ ही, नवाचारों के निर्माण और उपयोग में पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी निभाने तथा समाज की वास्तविक आवश्यकताओं को ध्यान में रखने की बात कही।
उन्होंने कहा कि किसी भी नवाचार को व्यापक स्तर पर सफल बनाने के लिए उसका व्यावहारिक क्रियान्वयन बेहद जरूरी है। जब कोई विचार लोगों की जरूरतों के अनुरूप उपयोगी समाधान बनता है, तभी उसका वास्तविक महत्व सामने आता है।
विश्वविद्यालय के शिक्षकों की रही महत्वपूर्ण भूमिका
इस कार्यक्रम का आयोजन इंस्टीट्यूशन इनोवेशन काउंसिल के अध्यक्ष प्रो. वेंकटेश सिंह के मार्गदर्शन में किया गया। आयोजन में नवाचार समिति के संकाय समन्वयक डॉ. विजय महोरे, लोक नीति एवं जनमत प्रकोष्ठ के संकाय समन्वयक प्रो. प्रवीण कुमार, इंटर्नशिप समिति के संकाय समन्वयक डॉ. किशोर डी.एस. के साथ डॉ. पीयूष कुमार सिंह, डॉ. देवव्रत प्रसाद और डॉ. प्रज्ञा गुप्ता की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
विश्वविद्यालय के जन संपर्क पदाधिकारी (पीआरओ) मोहम्मद मुदस्सीर आलम ने बताया कि विद्यार्थियों ने कार्यक्रम में उत्साहपूर्वक भाग लिया और अपने नवाचारी विचार प्रस्तुत किए।
कुल मिलाकर, आइडिया इनोवेशन हैकाथॉन 1.0 विद्यार्थियों को रचनात्मक सोच से आगे बढ़कर अपने विचारों को वास्तविक उत्पादों और सामाजिक उपयोग के समाधानों में बदलने की दिशा में प्रेरित करने वाला आयोजन रहा।
