सीयूएसबी के गुरु दक्षता कार्यक्रम में उच्च शिक्षा की गुणवत्ता और भारतीय ज्ञान परंपरा पर मंथन, पूर्व कुलपति प्रो. हरिकेश सिंह ने दिया व्याख्यान

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आर्यावर्त वाणी | गयाजी | 02 जुलाई 2026,

गयाजी: दक्षिण बिहार केन्द्रीय विश्वविद्यालय (सीयूएसबी) के यूजीसी मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र (एमएमटीटीसी) द्वारा आयोजित 24 दिवसीय आवासीय ‘गुरु दक्षता कार्यक्रम’ (फैकल्टी इंडक्शन प्रोग्राम-एफआईपी) के तहत गुरुवार को उच्च शिक्षा, भारतीय ज्ञान परंपरा और समावेशी शिक्षण पर विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए। कार्यक्रम का आयोजन शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार की यूजीसी-मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण योजना के अंतर्गत किया जा रहा है।

उच्च शिक्षा समाज और राष्ट्र निर्माण की आधारशिला : प्रो. हरिकेश सिंह

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता जय प्रकाश विश्वविद्यालय, छपरा के पूर्व कुलपति प्रो. हरिकेश सिंह ने “उच्च शिक्षा एवं उसका पारिस्थितिकी तंत्र” विषय पर व्याख्यान देते हुए कहा कि उच्च शिक्षा की गुणवत्ता ही मानव उत्कृष्टता की गुणवत्ता निर्धारित करती है। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री प्रदान करना नहीं, बल्कि ऐसे सक्षम, उत्तरदायी, नैतिक मूल्यों से युक्त और सामाजिक रूप से संवेदनशील नागरिक तैयार करना है, जो राष्ट्र निर्माण में प्रभावी भूमिका निभा सकें।

उन्होंने उच्च शिक्षा के तीन प्रमुख स्तंभ—शिक्षण, अनुसंधान और विस्तार—पर विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि शिक्षण केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के भविष्य को गढ़ने का मिशन है। उन्होंने नव-नियुक्त शिक्षकों से व्यावसायिक नैतिकता, शैक्षणिक सत्यनिष्ठा और संस्थागत मूल्यों का पालन करने का आह्वान किया।

इतिहास के अध्ययन में शोधपरक दृष्टिकोण जरूरी : प्रो. राजशरण शाही

कार्यक्रम में बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय, लखनऊ के प्रो. राजशरण शाही ने “कथ्य से तथ्य की ओर” विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने इतिहास और भारतीय ज्ञान परंपरा के अध्ययन में प्रमाण, प्राथमिक स्रोतों और शोधपरक दृष्टिकोण के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि किसी भी ऐतिहासिक विषय का अध्ययन आलोचनात्मक सोच और तथ्यों के आधार पर किया जाना चाहिए।

समावेशी शिक्षा पर दिया गया विशेष जोर

दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रो. रजनी रंजन सिंह ने “भारतीय संस्कृति के परिप्रेक्ष्य में शिक्षार्थी एवं अधिगम प्रक्रिया की समझ” विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने भारतीय कक्षाओं की सामाजिक, सांस्कृतिक, भाषाई और क्षेत्रीय विविधता पर चर्चा करते हुए कहा कि प्रत्येक विद्यार्थी अलग पृष्ठभूमि और सीखने की क्षमता के साथ आता है। ऐसे में शिक्षण प्रक्रिया को समावेशी, संवेदनशील और सहभागितापूर्ण बनाया जाना आवश्यक है, ताकि सभी विद्यार्थियों का समग्र विकास सुनिश्चित हो सके।

बिहार और झारखंड के 10 विश्वविद्यालयों के शिक्षक ले रहे प्रशिक्षण

विश्वविद्यालय के जनसंपर्क पदाधिकारी मोहम्मद मुदस्सीर आलम ने बताया कि गुरु दक्षता कार्यक्रम का संचालन एमएमटीटीसी के निदेशक डॉ. तरुण कुमार त्यागी, डॉ. हेमंत कुमार सिंह, आतिश दाश और लेफ्टिनेंट डॉ. प्रज्ञा गुप्ता के समन्वित प्रयासों से किया जा रहा है। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में बिहार और झारखंड के 10 विश्वविद्यालयों से आए 42 नवनियुक्त शिक्षक भाग ले रहे हैं।

कार्यक्रम में उपस्थित शिक्षकगण

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