‘लैब टू लैंड’ पहल के तहत सीयूएसबी छात्रों का भूवैज्ञानिक क्षेत्र भ्रमण, गयाजी-राजगीर क्षेत्र में किया व्यावहारिक अध्ययन
आर्यावर्त वाणी | गयाजी | 04 मई 2026,
गयाजी: ‘लैब टू लैंड’ पहल के तहत दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय (सीयूएसबी) के भूविज्ञान विभाग ने पाँच वर्षीय इंटीग्रेटेड यूजी-पीजी पाठ्यक्रम के विद्यार्थियों के लिए दो दिवसीय भूवैज्ञानिक क्षेत्र भ्रमण का आयोजन किया। यह पहल कुलपति प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह के ‘कैंपस फॉर कम्युनिटी’ विजन से प्रेरित है, जिसका उद्देश्य छात्रों को कक्षा से बाहर वास्तविक परिस्थितियों में सीखने का अवसर देना है।
पहले दिन का फील्ड वर्क
जनसंपर्क पदाधिकारी मोहम्मद मुदस्सीर आलम के अनुसार, कार्यक्रम का समन्वय डॉ. धीरेंद्र कुमार ने विभागाध्यक्ष प्रो. प्रफुल्ल कुमार सिंह के मार्गदर्शन में किया। पहले दिन छात्रों ने कोसमा, सीता कुंड, भिंडस, गेहलौर घाटी (दशरथ मांझी द्वार), जेठियन दर्रा, राजगीर और गुलानी क्षेत्र का भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने चट्टानों की संरचना, खनिजों की पहचान और भूदृश्य के विकास का अध्ययन किया।
दूसरे दिन का विस्तृत अन्वेषण
दूसरे दिन छात्रों ने प्रेतशिला, लाल पहाड़, बराबर पहाड़ियाँ, नागार्जुन पहाड़ियाँ और ब्रह्मयोनि पहाड़ियों का गहन भूवैज्ञानिक अध्ययन किया। इस दौरान शैलिकी (Petrology), भू-आकृतिक विशेषताओं (Geomorphology) और संरचनात्मक भूविज्ञान (Structural Geology) का प्रत्यक्ष अवलोकन किया गया, जिससे छात्रों की व्यावहारिक समझ और मजबूत हुई।
छात्रों को मिला व्यावहारिक अनुभव
यह क्षेत्र भ्रमण छात्रों के लिए अत्यंत लाभकारी साबित हुआ। इससे उन्हें सैद्धांतिक ज्ञान को वास्तविक भूवैज्ञानिक परिस्थितियों में लागू करने और फील्ड वर्क से जुड़े आवश्यक कौशल विकसित करने का अवसर मिला।
विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया
प्रो. प्रफुल्ल कुमार सिंह ने भूविज्ञान में क्षेत्र-आधारित शिक्षा के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि इस तरह के भ्रमण छात्रों में अवलोकन क्षमता और व्यावहारिक समझ विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने इस पहल को सफलतापूर्वक लागू करने के लिए डॉ. धीरेंद्र कुमार को बधाई दी।
‘लैब टू लैंड’ जैसी पहलें छात्रों को किताबों से आगे बढ़कर वास्तविक दुनिया से जोड़ती हैं, जिससे उनकी अकादमिक समझ के साथ-साथ व्यावहारिक दक्षता भी विकसित होती है।
