सीयूएसबी के वैज्ञानिक को बड़ी उपलब्धि, बार्क से मिला 41 लाख रुपये का शोध अनुदान

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आर्यावर्त वाणी | गयाजी | 12 मई 2026,

गयाजी: दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय (सीयूएसबी) के भौतिकी विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. रोहित रंजन शाही को भारत सरकार के परमाणु ऊर्जा विभाग के अंतर्गत भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC) से 41 लाख रुपये का प्रतिष्ठित शोध अनुदान प्राप्त हुआ है। यह अनुदान तीन वर्ष की अवधि वाली शोध परियोजना के लिए दिया गया है। परियोजना का शीर्षक “न्यूट्रॉन विवर्तन का उपयोग कर उच्च एंट्रॉपी मिश्रधातुओं के संरचनात्मक एवं चुंबकीय गुणों की जांच” है।

विश्वविद्यालय प्रशासन ने दी बधाई

इस महत्वपूर्ण उपलब्धि पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह, कुलसचिव प्रो. नरेंद्र कुमार राणा, स्कूल के डीन प्रो. अतुल प्रताप सिंह तथा भौतिकी विभागाध्यक्ष प्रो. बुधेंद्र कुमार सिंह सहित अन्य शिक्षकों ने डॉ. शाही को बधाई दी है।

सात वर्षों से कर रहे हैं शोध कार्य

विश्वविद्यालय के जनसंपर्क पदाधिकारी मोहम्मद मुदस्सीर आलम ने बताया कि डॉ. शाही पिछले सात वर्षों से बहु-घटक मिश्रधातुओं के चुंबकीय गुणों पर लगातार शोध कर रहे हैं। उनके निर्देशन में कई पीएचडी शोधार्थियों ने मैग्नेटिक हाई एंट्रॉपी मिश्रधातुओं पर शोध कार्य पूरा किया है। डॉ. शाही ने इस उपलब्धि का श्रेय अपने शोधार्थियों डॉ. राजेश मिश्रा, प्रियंका कुमारी एवं शशिकांत महापात्र के कठिन परिश्रम को दिया।

बार्क के वैज्ञानिकों के सहयोग से होगा शोध

डॉ. शाही ने बताया कि इस परियोजना के अंतर्गत हाई एंट्रॉपी मिश्रधातुओं के संरचनात्मक एवं चुंबकीय व्यवहार का अध्ययन किया जाएगा। शोध कार्य को आगे बढ़ाने के लिए अत्याधुनिक प्रयोगशाला उपकरणों की खरीद एवं एक शोधार्थी के लिए फेलोशिप का भी प्रावधान किया गया है। इस सहयोगात्मक परियोजना के तहत नवीन पदार्थों का डिजाइन एवं विकास सीयूएसबी में किया जाएगा, जबकि न्यूट्रॉन विवर्तन आधारित उन्नत संरचनात्मक एवं चुंबकीय अध्ययन बार्क, मुंबई के सहयोग से किए जाएंगे।

ऊर्जा रिएक्टरों में हो सकेगा उपयोग

परियोजना में बार्क के सॉलिड स्टेट फिजिक्स डिवीजन के वैज्ञानिक डॉ. एम.डी. मुकादम एवं मैटेरियल साइंस डिवीजन की वैज्ञानिक डॉ. पौलमी एस. चक्रवर्ती भी सहयोगी के रूप में शामिल हैं। डॉ.शाही ने बताया कि परियोजना के अंत में विकसित बहु-कार्यात्मक हाई एंट्रॉपी पदार्थों का उपयोग उन्नत सिंक्रोट्रॉन अनुप्रयोगों एवं अगली पीढ़ी के ऊर्जा रिएक्टरों के लिए चुंबकीय द्रव के रूप में किया जा सकेगा।

विश्वविद्यालय के लिए गौरव का क्षण

इस शोध अनुदान को सीयूएसबी के लिए एक बड़ी वैज्ञानिक उपलब्धि माना जा रहा है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने कहा कि इस प्रकार की शोध परियोजनाएं न केवल संस्थान की शैक्षणिक प्रतिष्ठा बढ़ाती हैं, बल्कि देश में वैज्ञानिक अनुसंधान को भी नई दिशा प्रदान करती हैं।

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