सीयूएसबी में सतर्कता जागरूकता सप्ताह के तहत कार्यशाला आयोजित, 54 कर्मियों ने लिया प्रशिक्षण
आर्यावर्त वाणी | गयाजी | 01 नवम्बर 2026,
गयाजी। केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) की ओर से 26 अक्टूबर से 1 नवंबर 2026 तक मनाए जा रहे सतर्कता जागरूकता सप्ताह के तहत दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय (सीयूएसबी) में विशेष कार्यशाला एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस वर्ष सतर्कता जागरूकता सप्ताह का मूल वाक्य ‘सतर्कता से समृद्धि’ रखा गया है। कार्यक्रम का उद्देश्य कर्मचारियों में ईमानदारी, पारदर्शिता, जवाबदेही और जनहित के प्रति जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करना रहा।
कुलपति प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह के मार्गदर्शन में प्रशासनिक भवन में आयोजित कार्यशाला का उद्घाटन कुलसचिव-सह-मुख्य सतर्कता अधिकारी प्रो. नरेंद्र कुमार राणा ने किया। उन्होंने कार्यक्रम की सफलता की कामना करते हुए कहा कि भ्रष्टाचार मुक्त भारत का निर्माण केवल किसी एक विभाग या संस्था की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें समाज और प्रत्येक नागरिक की भूमिका महत्वपूर्ण है। सामूहिक प्रयास और जागरूकता के माध्यम से ही भ्रष्टाचार पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकता है।
नियमों और जीईएम प्रणाली पर दिया गया प्रशिक्षण
सतर्कता जागरूकता सप्ताह के दौरान केंद्रीय सतर्कता आयोग के नियमों एवं प्रावधानों के साथ-साथ गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (जीईएम) पर क्षमता निर्माण प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें कर्मचारियों को कार्यस्थल पर कार्यक्षमता बढ़ाने, प्रशासनिक नियमों एवं प्रावधानों, वित्तीय साक्षरता, जीईएम की कार्यप्रणाली और नए श्रम कानूनों (लेबर कोड) से संबंधित जानकारी दी गई।
विश्वविद्यालय के जनसंपर्क पदाधिकारी मोहम्मद मुदस्सीर आलम ने बताया कि प्रशिक्षण कार्यक्रम में उपकुलसचिव प्रतीश कुमार दास ने मुख्य प्रशिक्षक की भूमिका निभाई, जबकि सहायक कुलसचिव अमित कुमार ने भी प्रतिभागियों को प्रशिक्षण दिया। कार्यक्रम में कुल 54 अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने भाग लिया और विभिन्न विषयों पर जानकारी प्राप्त की।
सत्यनिष्ठा की शपथ लेकर भ्रष्टाचार मुक्त व्यवस्था का संकल्प
अभियान की शुरुआत विश्वविद्यालय के अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा सत्यनिष्ठा की प्रतिज्ञा लेने के साथ हुई। इस दौरान सभी ने अपने कार्यों में ईमानदारी, पारदर्शिता और जनहित के सिद्धांतों का पालन करने का संकल्प लिया।
प्रशिक्षण के दौरान ‘सतर्कता से समृद्धि’ के संदेश पर विशेष जोर दिया गया। साथ ही, भ्रष्टाचार के विरुद्ध जागरूकता फैलाने और संस्थागत कार्यप्रणाली में नैतिक मूल्यों को अपनाने का आह्वान किया गया।
कार्यशाला के माध्यम से विश्वविद्यालय कर्मियों को उनके प्रशासनिक एवं वित्तीय दायित्वों के प्रति जागरूक करने के साथ सुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही को कार्यसंस्कृति का हिस्सा बनाने का संदेश दिया गया।
