पटना में स्वास्थ्य सेवाओं की असमानता उजागर, सीयूएसबी का शोध अंतरराष्ट्रीय पत्रिका में प्रकाशित
आर्यावर्त वाणी | गयाजी | 22 अक्टूबर 2026,
गयाजी। दक्षिण बिहार केन्द्रीय विश्वविद्यालय (सीयूएसबी) के भूगोल विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो. किरण कुमारी और उनके शोधार्थी आकाश कुमार का संयुक्त शोधपत्र अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिका डिस्कवर पब्लिक हेल्थ में प्रकाशित हुआ है। शोध में पटना नगर में सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता, अस्पतालों तक भौगोलिक पहुंच और विभिन्न सामाजिक-आर्थिक वर्गों के बीच स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर मौजूद असमानताओं का अध्ययन किया गया है।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह ने इस उपलब्धि पर शोधकर्ताओं को बधाई देते हुए इसे विश्वविद्यालय की महत्वपूर्ण शैक्षणिक एवं शोध उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि इससे स्वास्थ्य भूगोल, स्थानिक विश्लेषण और क्षेत्रीय नियोजन के क्षेत्र में विश्वविद्यालय के शोध कार्यों को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली है।
384 लोगों के सर्वेक्षण के आधार पर हुआ अध्ययन
शोधपत्र का शीर्षक मैपिंग स्पेशियल एंड सोशियोइकॉनॉमिक डिस्पेरिटिस इन पब्लिक हेल्थकेयर एक्सेसिबिलिटी इन पटना सिटी है। अध्ययन के लिए पटना नगर के छह प्रशासनिक क्षेत्रों के 384 लोगों से सर्वेक्षण के माध्यम से आंकड़े जुटाए गए। इसके साथ अस्पतालों की स्थिति, सड़क मार्गों के नेटवर्क, जनसंख्या घनत्व और भूमि की उपलब्धता से संबंधित आंकड़ों का भी विश्लेषण किया गया।
शोधकर्ताओं ने इन आंकड़ों के आधार पर उन क्षेत्रों की पहचान की, जहां उपलब्ध सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाएं स्थानीय आबादी की जरूरतों को पर्याप्त रूप से पूरा नहीं कर पा रही हैं।
अस्पतालों की उपलब्धता और बिस्तरों को लेकर सामने आई चिंता
अध्ययन के निष्कर्षों के अनुसार, सर्वेक्षण में शामिल 39 प्रतिशत लोगों ने अस्पतालों की उपलब्धता को अपर्याप्त बताया, जबकि 41 प्रतिशत लोगों ने अस्पतालों में बिस्तरों की उपलब्धता पर असंतोष जताया।
शोध में यह भी सामने आया कि अस्पतालों से दूरी बढ़ने के साथ सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं का उपयोग कम हो जाता है। इसके विपरीत, स्वास्थ्य सुविधाओं की बेहतर उपलब्धता से लोगों द्वारा इन सेवाओं का उपयोग करने की संभावना बढ़ती है। अध्ययन में आय के स्तर और स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति संतुष्टि के बीच भी महत्वपूर्ण सांख्यिकीय संबंध पाया गया।
बाहरी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाएं बढ़ाने की जरूरत
शोधकर्ताओं ने सुझाव दिया कि पटना नगर के बाहरी इलाकों और उन क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, जहां पर्याप्त स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। नए स्वास्थ्य केंद्रों की स्थापना, परिवहन संपर्क में सुधार और सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने से लोगों की स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच बेहतर हो सकती है।
शोध का मुख्य उद्देश्य शहरी स्वास्थ्य सेवाओं के वितरण में मौजूद भौगोलिक एवं सामाजिक-आर्थिक असमानताओं को समझना और स्वास्थ्य अवसंरचना के विकास के लिए साक्ष्य-आधारित नियोजन को प्रोत्साहित करना है।
शोधकर्ताओं ने बताया अध्ययन का महत्व
प्रो. किरण कुमारी ने कहा कि यह अध्ययन सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंचने में लोगों के सामने आने वाली वास्तविक चुनौतियों को समझने का प्रयास है। इसके निष्कर्ष नीति-निर्माताओं को शहरी स्वास्थ्य नियोजन बेहतर बनाने और स्वास्थ्य सुविधाओं का संतुलित वितरण सुनिश्चित करने में मदद कर सकते हैं।
शोधार्थी आकाश कुमार ने कहा कि अध्ययन सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं तक समान पहुंच सुनिश्चित करने, सामाजिक-आर्थिक असमानताओं को कम करने और साक्ष्य-आधारित जनस्वास्थ्य नीतियों के निर्माण में योगदान दे सकता है।
विश्वविद्यालय के जनसंपर्क पदाधिकारी मोहम्मद मुदस्सीर आलम के अनुसार, शोध पत्रिका डिस्कवर पब्लिक हेल्थ स्कोपस में क्यू4 श्रेणी तथा वेब ऑफ साइंस के इमर्जिंग सोर्सेज साइटेशन इंडेक्स में सूचीबद्ध है। इस शोध के प्रकाशन को विश्वविद्यालय के शोध एवं अकादमिक कार्यों के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
