चार महिलाओं की जान बचाने वाले विक्की और संटू को डीएम ने किया सम्मानित, साहस और सूझबूझ की हुई सराहना
आर्यावर्त वाणी | गयाजी | 16 अक्टूबर 2026
गयाजी: गयाजी जिले में पानी में डूब रही चार महिलाओं की जान बचाने वाले दो साहसी बालकों विक्की कुमार और संटू कुमार को जिला पदाधिकारी ने प्रशस्ति-पत्र देकर सम्मानित किया। दोनों बालकों ने संकट की घड़ी में अदम्य साहस, सूझबूझ और तत्परता का परिचय देते हुए महिलाओं की सहायता की। उनके इस सराहनीय कार्य की प्रशासन ने प्रशंसा की और इसे मानवीय संवेदनशीलता तथा निःस्वार्थ सेवा का प्रेरक उदाहरण बताया।
श्रीरामपुर गांव में हुआ था हादसा
प्राप्त जानकारी के अनुसार, गुरुवार को गयाजी जिले के फतेहपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत जगन्नाथपुर पंचायत के श्रीरामपुर गांव में यह हादसा हुआ था। गांव की छह महिलाएं घास काटने के बाद झाड़ू बनाने के लिए कांस काटने पानी में उतरी थीं। इसी दौरान वे अचानक गहरे पानी में चली गईं और डूबने लगीं।
घटना के दौरान स्थिति गंभीर हो गई। ऐसे समय में विक्की कुमार और संटू कुमार ने साहस एवं सूझबूझ का परिचय देते हुए महिलाओं को बचाने का प्रयास किया। दोनों बालकों की तत्परता से चार महिलाओं की जान बचाई जा सकी।
नेवडीहा गांव के रहने वाले हैं दोनों बालक
महिलाओं की जान बचाने वाले विक्की कुमार, पिता प्रदीप यादव, और संटू कुमार, पिता संजय यादव, गयाजी जिले के फतेहपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत करियादपुर पंचायत के नेवडीहा गांव के निवासी हैं। कम उम्र में दोनों ने जिस साहस और मानवीय संवेदना का परिचय दिया, वह समाज के लिए प्रेरणादायी है।
जिला पदाधिकारी ने प्रशस्ति-पत्र देकर बढ़ाया हौसला
16 अक्टूबर 2026 को जिला पदाधिकारी, गयाजी ने दोनों बालकों को प्रशस्ति-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। इस अवसर पर स्थानीय मुखिया और अन्य जनप्रतिनिधि भी उपस्थित रहे। जिला पदाधिकारी ने दोनों के साहसिक कार्य की सराहना करते हुए इसे दूसरों के जीवन के प्रति संवेदनशीलता, निःस्वार्थ सेवा और तत्परता का उत्कृष्ट उदाहरण बताया।
यह सम्मान न केवल दोनों बालकों के साहस का सम्मान है, बल्कि समाज में मानवता और परोपकार की भावना को प्रोत्साहित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण संदेश देता है।
बच्चों और युवाओं के लिए प्रेरणा बना साहसिक कार्य
विक्की कुमार और संटू कुमार की बहादुरी यह संदेश देती है कि संकट के समय सूझबूझ और दूसरों की सहायता करने की भावना बेहद महत्वपूर्ण होती है। उनके कार्य से बच्चों और युवाओं को मानवीय संवेदनशीलता, परोपकार तथा जरूरतमंदों की मदद करने की प्रेरणा मिलती है।
