दून एक्सप्रेस से 45 जीवित कछुए बरामद, तस्कर फरार; आरपीएफ ने वन विभाग को सौंपा

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आर्यावर्त वाणी | गयाजी | 16 सितंबर 2026

गयाजी: गया जंक्शन पर आरपीएफ ने वन्यजीवों की तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे ‘ऑपरेशन विलेप’ के तहत बड़ी कार्रवाई करते हुए ऋषिकेश-हावड़ा दून एक्सप्रेस से 45 जीवित कछुओं को बरामद किया है। कछुओं को ट्रेन के स्लीपर कोच के बाथरूम के पास लावारिस हालत में रखे बैग और झोलों में छिपाकर ले जाया जा रहा था। हालांकि, कार्रवाई के दौरान तस्करी में शामिल व्यक्ति मौके से फरार होने में सफल रहा।

प्लेटफॉर्म नंबर तीन पर खड़ी ट्रेन में मिली संदिग्ध सामग्री

आरपीएफ के प्रभारी निरीक्षक बनारसी यादव के निर्देशन में टीम द्वारा ट्रेनों में जांच अभियान चलाया जा रहा था। इसी क्रम में गयाजी जंक्शन के प्लेटफॉर्म संख्या तीन पर पहुंचने के बाद खड़ी 13010 डाउन ऋषिकेश-हावड़ा दून एक्सप्रेस की जांच की गई।

चेकिंग के दौरान स्लीपर कोच एस-08 के बाथरूम के बाहर दो झोले और एक पिट्ठू बैग लावारिस अवस्था में पड़े मिले। संदिग्ध प्रतीत होने पर आरपीएफ टीम ने तीनों सामानों की जांच की।

बैग खोलते ही मिले 45 जीवित कछुए

जांच के दौरान बैग और झोलों के अंदर बड़ी संख्या में जीवित कछुए पाए गए। आरपीएफ ने सभी कछुओं को सुरक्षित बाहर निकाला और उनकी गिनती करने पर कुल 45 जीवित कछुए बरामद हुए।

आरपीएफ के अनुसार, प्रथम दृष्टया कछुओं को ट्रेन के माध्यम से तस्करी कर ले जाने की आशंका है। हालांकि, बरामदगी के समय कोई व्यक्ति मौके पर नहीं मिला और कछुओं को कहां से लाया गया था तथा इन्हें कहां ले जाया जा रहा था, इसकी जानकारी फिलहाल सामने नहीं आई है।

तस्कर की तलाश और आगे की जांच जारी

आरपीएफ प्रभारी निरीक्षक बनारसी यादव ने बताया कि बरामद कछुए वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत संरक्षित जीव हैं। कार्रवाई के बाद सभी कछुओं को सुरक्षित रूप से आरपीएफ पोस्ट लाया गया।

इसके बाद बरामद 45 जीवित कछुओं को आवश्यक कानूनी कार्रवाई के लिए वन विभाग, गयाजी को सौंप दिया गया है। वहीं, कछुओं की तस्करी में शामिल लोगों की पहचान और पूरे नेटवर्क का पता लगाने के लिए आगे की कार्रवाई की जा रही है।

आरपीएफ ने क्या कहा?

आरपीएफ प्रभारी निरीक्षक बनारसी यादव ने कहा कि तस्करी में संलिप्त लोगों को अभी चिह्नित नहीं किया जा सका है। उनके बारे में फिलहाल कोई जानकारी नहीं मिली है। बरामद सभी जीवित कछुओं को वन विभाग को सौंप दिया गया है और मामले में आगे की कार्रवाई की जा रही है।

कछुओं की तस्करी के पीछे कई कारणों की चर्चा

कछुओं की तस्करी के पीछे अलग-अलग कारणों की चर्चा सामने आती रही है। इनमें अंधविश्वास, पालतू रखने का शौक, पारंपरिक उपचार और कुछ स्थानों पर मांस के लिए इनका इस्तेमाल शामिल बताया जाता है। हालांकि, किसी विशेष बरामदगी के मामले में तस्करी का उद्देश्य जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

भारत में वन्यजीवों की अवैध पकड़, व्यापार और तस्करी पर कानून के तहत कार्रवाई का प्रावधान है। गयाजी में हुई इस बरामदगी के बाद अब जांच एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती कछुओं को ट्रेन में रखने वाले व्यक्ति और इसके पीछे सक्रिय नेटवर्क का पता लगाना है।

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