संस्कृत भारत की आत्मा, भारतीय ज्ञान परंपरा को समझने के लिए संस्कृत का अध्ययन जरूरी : प्रो. हरिप्रसाद अधिकारी

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आर्यावर्त वाणी | गयाजी | 16 सितंबर 2026

गयाजी: गया कॉलेज, गयाजी के संस्कृत विभाग की ओर से मंगलवार को ‘संस्कृत वाङ्मयाधारिता भारतीयज्ञानपरम्परा’ विषय पर एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में काशी से पहुंचे मुख्य वक्ता प्रो. हरिप्रसाद अधिकारी ने भारतीय ज्ञान परंपरा में संस्कृत भाषा के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला।

उन्होंने कहा कि भारत की आत्मा संस्कृत भाषा में निहित है। मनुष्य जीवन के सार और भारतीय चिंतन परंपरा को समझने के लिए संस्कृत का अध्ययन आवश्यक है। उन्होंने कहा कि संस्कृत केवल एक भाषा नहीं, बल्कि भारत की समृद्ध ज्ञान, दर्शन और संस्कृति की परंपरा को समझने का महत्वपूर्ण माध्यम है।

विदेशों में भी बढ़ रही संस्कृत की लोकप्रियता

प्रो. हरिप्रसाद अधिकारी ने संस्कृत की वैश्विक लोकप्रियता का उल्लेख करते हुए कहा कि विदेशों में भी संस्कृत भाषा के प्रति रुचि लगातार बढ़ रही है। उन्होंने जर्मनी, रूस और अमेरिका सहित विभिन्न देशों में संस्कृत के अध्ययन और उच्चारण की शुद्धता पर दिए जा रहे जोर का उल्लेख किया।

उन्होंने संस्कृत वाङ्मय में निहित परोपकार की भावना को रेखांकित करते हुए “परोपकाराय पुण्याय, पापाय परपीडनम्” का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि सत्पुरुषों का जीवन परोपकार और पुण्य कर्मों में व्यतीत होता है, जबकि दूसरों को पीड़ा पहुंचाने वाला आचरण व्यक्ति को पाप की ओर ले जाता है। मुख्य वक्ता ने भारतीय दर्शन के साथ-साथ पालि और प्राकृत भाषाओं की विशेषताओं पर भी विस्तार से चर्चा की।

वेद, उपनिषद और गीता के महत्व पर हुई चर्चा

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मगध विश्वविद्यालय के दर्शन विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. जावेद अंजुम ने वेद, उपनिषद और गीता जैसे भारतीय ज्ञान परंपरा के प्रमुख ग्रंथों का उल्लेख करते हुए संस्कृत भाषा के अध्ययन-अध्यापन के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारतीय दर्शन और ज्ञान परंपरा के मूल स्वरूप को समझने के लिए संस्कृत ग्रंथों का अध्ययन महत्वपूर्ण है।

छात्रों को संस्कृत पढ़ने के महत्व से कराया गया परिचित

गया कॉलेज के प्राचार्य प्रो. सतीश सिंह चन्द्रा ने विद्यार्थियों को संस्कृत पढ़ने की आवश्यकता और इसके महत्व के बारे में बताया। उन्होंने संस्कृत को भारतीय संस्कृति एवं ज्ञान परंपरा से जोड़ने वाली महत्वपूर्ण भाषा बताते हुए विद्यार्थियों को इसके अध्ययन के लिए प्रेरित किया।

संस्कृत और पालि की समानताओं पर चर्चा

विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित मगध विश्वविद्यालय के पालि विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. कृष्ण देव प्रसाद वर्मा ने संस्कृत और पालि के बीच समानताओं एवं भाषाई संबंधों पर प्रकाश डाला। उन्होंने दोनों भाषाओं के अध्ययन के माध्यम से भारतीय ज्ञान और बौद्धिक परंपरा को समझने की संभावनाओं पर चर्चा की।

संस्कृत की प्राचीनता और अखंडता पर अध्यक्षीय वक्तव्य

कार्यक्रम की अध्यक्षता मगध विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. राम प्रकाश ने की। उन्होंने संस्कृत भाषा की प्राचीनता, निरंतरता और अखंडता पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए भारतीय ज्ञान परंपरा में इसके योगदान को रेखांकित किया।

डॉ. संगीता आर्या ने किया कार्यक्रम का सफल संचालन

संपूर्ण कार्यक्रम का सफल संचालन गया कॉलेज के संस्कृत विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. संगीता आर्या ने किया। संगोष्ठी के दौरान वक्ताओं ने संस्कृत भाषा, भारतीय दर्शन, वेद-उपनिषद-गीता, पालि-प्राकृत तथा भारतीय ज्ञान परंपरा के विभिन्न आयामों पर विचार साझा किए। कार्यक्रम ने विद्यार्थियों को भारतीय ज्ञान परंपरा के मूल स्रोतों और संस्कृत के महत्व को समझने का अवसर प्रदान किया।

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