टमाटर की फसल में कीट और रोग के प्रकोप से परेशान किसान के खेत पहुंची सीयूएसबी की विशेषज्ञ टीम

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आर्यावर्त वाणी | गयाजी | 15 सितंबर 2026

गयाजी: दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय (सीयूएसबी) के कुलपति प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह के ध्येय वाक्य ‘कैंपस फॉर कम्युनिटी’ के तहत विश्वविद्यालय के कृषि विभाग की विशेषज्ञ टीम ने टेकारी प्रखंड के खनेतू गांव पहुंचकर प्रगतिशील किसान शिवशंकर के खेत एवं नेटहाउस का निरीक्षण किया। किसान की फसल में कीट-पतंगों और विभिन्न रोगों के प्रकोप की समस्या सामने आने के बाद विशेषज्ञों ने मौके पर पहुंचकर फसलों की स्थिति का वैज्ञानिक अध्ययन किया और समेकित प्रबंधन के उपाय बताए।

करीब 2500 वर्ग मीटर के नेटहाउस में लगी है टमाटर की फसल

किसान शिवशंकर ने लगभग एक बीघा क्षेत्रफल के नेटहाउस में करीब 2500 वर्ग मीटर में टमाटर की फसल लगाई है। पिछले कुछ समय से फसल में विभिन्न प्रकार के कीट-पतंगों के प्रकोप और रोगों की समस्या गंभीर होने के बाद किसान ने सीयूएसबी के कृषि विभाग से वैज्ञानिक मार्गदर्शन की मांग की थी। किसान के आग्रह पर कृषि विभागाध्यक्ष प्रो. ए. पी. सिंह ने समस्या के वैज्ञानिक परीक्षण एवं समाधान के लिए विशेषज्ञ दल का गठन किया।

कीट विज्ञान और पादप रोग विज्ञान के विशेषज्ञ रहे शामिल

विशेषज्ञ दल में डॉ. राधेश्याम धोले, सहायक प्राध्यापक (कीट विज्ञान), डॉ. दिव्या श्री दत्ता, सहायक प्राध्यापक (पादप रोग विज्ञान) तथा मनोज कुमार सिंह, प्रयोगशाला सहायक शामिल रहे।

दल ने नेटहाउस में लगी टमाटर की फसल के साथ खुले खेत में लगी बैंगन एवं अन्य सब्जियों तथा आम और नींबू के बागान का भी विस्तृत निरीक्षण किया। किसान ने करीब 500 नींबू और 50 आम के पौधे लगाए हैं।

टमाटर में कई प्रकार के कीटों का मिला प्रकोप

निरीक्षण के दौरान विशेषज्ञों ने टमाटर की फसल में सफेद मक्खी, थ्रिप्स, मिलीबग, स्पोडोप्टेरा, हेलिकोवर्पा और विभिन्न प्रकार की इल्ली के प्रकोप की पहचान की। इसके साथ ही फसल में विषाणु संक्रमण के लक्षण भी पाए गए।

विशेषज्ञों ने मौके पर फसल की वास्तविक स्थिति का अध्ययन करते हुए रोग एवं कीट प्रकोप के कारणों को समझने का प्रयास किया।

बैंगन और नींबू की फसल में भी दिखे रोग-कीट के लक्षण

खुले खेत में लगी बैंगन की फसल में तना एवं फल छेदक, सफेद मक्खी और हड्डा कीट का प्रकोप पाया गया। इसके अलावा फसल में फोमोप्सिस झुलसा रोग के लक्षण भी दिखाई दिए। वहीं नींबू के पौधों में विषाणु संक्रमण से संबंधित लक्षणों के साथ विभिन्न प्रकार के कीट-पतंगों का प्रकोप भी विशेषज्ञों ने देखा।

जैविक और रासायनिक उपायों से समेकित प्रबंधन की सलाह

विशेषज्ञ दल ने खेत एवं नेटहाउस में फसलों की वास्तविक स्थिति का मौके पर अध्ययन करने के बाद किसान को जैविक एवं रासायनिक दोनों प्रकार के समेकित कीट एवं रोग प्रबंधन के उपायों की विस्तृत जानकारी दी।

सीयूएसबी कृषि विभाग की यह पहल विश्वविद्यालय के ‘कैंपस फॉर कम्युनिटी’ दृष्टिकोण के तहत किसानों की वास्तविक समस्याओं का वैज्ञानिक समाधान उनके खेत तक पहुंचकर उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

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