आरक्षण पर चिराग पासवान के हमले का मांझी-संतोष सुमन ने दिया जवाब, बोले- इस्तीफा देना है तो पहले आप दें
आर्यावर्त वाणी | गयाजी | 29 अगस्त 2026
गयाजी: अनुसूचित जाति के आरक्षण में क्रीमी लेयर और वर्गीकरण के मुद्दे को लेकर बिहार की सियासत एक बार फिर गरमा गई है। केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान द्वारा केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी और बिहार सरकार के मंत्री संतोष कुमार सुमन के इस्तीफे की मांग किए जाने के बाद दोनों नेताओं ने अब चिराग पासवान पर पलटवार किया है।
गयाजी में हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) के कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने चिराग पासवान की इस्तीफे की मांग पर कहा कि यदि इस मुद्दे पर इस्तीफा देना ही समाधान है, तो चिराग पासवान को खुद इस्तीफा दे देना चाहिए।
मांझी बोले- वंचित जातियों को आरक्षण का वास्तविक लाभ जरूरी
जीतन राम मांझी ने कहा कि अनुसूचित जाति में 22 जातियां हैं और इनमें से चार जातियों को छोड़कर अधिकांश जातियां आज भी हाशिए पर हैं। उनका कहना है कि आरक्षण का वास्तविक लाभ सबसे वंचित समुदायों तक पहुंचाने के लिए अनुसूचित जाति के भीतर वर्गीकरण जरूरी है।
उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के वर्ष 2024 के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि अनुसूचित जाति के भीतर वर्गीकरण किया जा सकता है। मांझी ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी आरक्षण समाप्त करने की बात नहीं कर रही, बल्कि आरक्षण के भीतर ही अत्यंत वंचित और जरूरतमंद वर्गों के लिए उचित हिस्सेदारी सुनिश्चित करने की पक्षधर है।
मांझी ने कहा कि अनुसूचित जाति की अधिकांश जातियां शैक्षणिक और सामाजिक रूप से बेहद पिछड़ी स्थिति में हैं। जब तक आरक्षण का लाभ उन समुदायों तक नहीं पहुंचेगा, जो सबसे अधिक वंचित हैं, तब तक अपेक्षित सामाजिक विकास संभव नहीं होगा।
चिराग पर मांझी का सीधा हमला
चिराग पासवान की ओर से इस्तीफे की मांग पर मांझी ने कहा कि यदि उनकी बात के कारण किसी को इस्तीफा देना चाहिए, तो चिराग पासवान को स्वयं इस्तीफा देकर उदाहरण पेश करना चाहिए। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी व्यापक जनहित और वंचित समुदायों के अधिकार की बात कर रही है।
संतोष सुमन बोले- पहले मेरी बात समझिए
बिहार सरकार के मंत्री संतोष कुमार सुमन ने भी चिराग पासवान के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनकी बात का उद्देश्य वंचित और शोषित वर्ग को आरक्षण का लाभ दिलाना है।
उन्होंने कहा कि यदि चिराग पासवान उनसे इस्तीफा देने के लिए कह रहे हैं, तो वे भी चिराग पासवान से इस्तीफा देने के लिए कहेंगे। संतोष सुमन ने कहा कि यदि इस्तीफा देने से ही वंचित और शोषित वर्ग का विकास संभव है, तो वे इस्तीफा देने के लिए तैयार हैं।
संतोष सुमन ने यह भी स्पष्ट किया कि उन्होंने अपने ट्वीट या बयान में क्रीमी लेयर लागू करने की बात नहीं कही है। उन्होंने कहा कि उन्होंने न तो SC/ST आरक्षण समाप्त करने की बात कही है और न ही क्रीमी लेयर के आधार पर किसी को आरक्षण से बाहर करने की मांग की है।
उनके अनुसार, ‘कोटे में कोटा’ और ‘क्रीमी लेयर’ दो अलग-अलग विषय हैं, जिन्हें एक साथ मिलाकर जनता को भ्रमित करना उचित नहीं है।
चिराग पासवान ने मांगा था मांझी और सुमन का इस्तीफा
दरअसल, आरक्षण में क्रीमी लेयर और अनुसूचित जाति के भीतर वर्गीकरण के मुद्दे पर चिराग पासवान ने जीतन राम मांझी और संतोष कुमार सुमन के रुख पर सवाल उठाया था। चिराग का कहना था कि यदि दोनों नेता आरक्षण के मौजूदा स्वरूप में बदलाव अथवा क्रीमी लेयर का समर्थन करते हैं, तो उन्हें मंत्री पद से इस्तीफा दे देना चाहिए।
चिराग पासवान ने सामाजिक आधार पर दिए जाने वाले आरक्षण का हवाला देते हुए कहा था कि आरक्षण को आर्थिक आधार पर लागू करने की बात क्यों की जा रही है। उन्होंने इस मुद्दे पर सदन में बहस कराने की चुनौती भी दी थी।
सहयोगी दलों के बीच बढ़ा मतभेद
आरक्षण के मुद्दे पर तीनों नेताओं के बीच सामने आए बयानों ने बिहार के राजनीतिक माहौल को और गरमा दिया है। एक ओर चिराग पासवान आरक्षण के मौजूदा स्वरूप में ऐसे बदलाव के खिलाफ नजर आ रहे हैं, जिससे उनके अनुसार आरक्षण का मूल उद्देश्य प्रभावित हो सकता है।
वहीं, जीतन राम मांझी और संतोष कुमार सुमन अनुसूचित जाति के भीतर उन समुदायों तक आरक्षण का लाभ पहुंचाने की बात कर रहे हैं, जिन्हें उनके अनुसार अब तक इसका पर्याप्त लाभ नहीं मिल पाया है।
आरक्षण का मुद्दा फिर बना सियासत का केंद्र
चिराग पासवान की इस्तीफे की मांग के बाद मांझी और संतोष सुमन के पलटवार से यह विवाद अब केवल क्रीमी लेयर और आरक्षण में वर्गीकरण तक सीमित नहीं रह गया है। इसके राजनीतिक मायने भी सामने आने लगे हैं।
बिहार में सहयोगी दलों के प्रमुख नेताओं के बीच इस मुद्दे पर खुलकर सामने आए मतभेद आने वाले दिनों में सियासी बहस को और धार दे सकते हैं। फिलहाल, आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर बिहार की राजनीति के केंद्र में आ गया है।
