रक्षासूत्र से बाल पत्रकारिता तक—किलकारी के बच्चों ने दिया प्रेम, भाईचारे और सृजन का संदेश
आर्यावर्त वाणी | गयाजी | 27 अगस्त 2026
गयाजी: रक्षाबंधन के अवसर पर किलकारी बिहार बाल भवन, गयाजी के बच्चों ने गुरुवार को सामाजिक सरोकार और रचनात्मक अभिव्यक्ति की अनूठी मिसाल पेश की। बच्चों ने 27 बिहार बटालियन एनसीसी तथा बाल सुधार गृह पहुंचकर वहां मौजूद बालकों और अधिकारियों को रक्षा सूत्र बांधा। इस दौरान बच्चों ने प्रेम, स्नेह, विश्वास, सम्मान, सहयोग और सुरक्षा की भावना का संदेश दिया।
किलकारी के बच्चों ने 27 बिहार बटालियन एनसीसी के कर्नल भूपेश पठानिया तथा बाल सुधार गृह के राजीव कुमार एवं नीतीश कुमार समेत कुल 130 बालकों की कलाइयों पर रक्षा सूत्र बांधा। बच्चों ने सभी को रक्षाबंधन की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि रक्षा बंधन केवल धागा बांधने का पर्व नहीं, बल्कि एक-दूसरे के प्रति विश्वास, सम्मान, सहयोग और जिम्मेदारी निभाने का संकल्प भी है।
भाईचारे और मानवीय संवेदना का दिया संदेश
रक्षाबंधन कार्यक्रम के दौरान बच्चों ने पर्व की सामाजिक महत्ता पर भी अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि समाज में प्रेम और अपनापन बढ़ाने के लिए जरूरी है कि हम एक-दूसरे के सुख-दुःख में साथ खड़े हों। रक्षा सूत्र इसी भावना का प्रतीक है।
बच्चों की इस पहल से एनसीसी परिसर और बाल सुधार गृह में आत्मीय एवं भावुक वातावरण बना। बच्चों की सहज सहभागिता और आत्मीय व्यवहार ने कार्यक्रम को विशेष बना दिया। इस अवसर पर किलकारी की नामांकन प्रभारी कल्पना सिंह, नृत्य प्रशिक्षक गौतम कुमार (गोलू) सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
दो दिवसीय बाल अखबार कार्यशाला में बच्चों ने रची अपनी दुनिया
इसी क्रम में 26 एवं 27 अगस्त 2026 को किलकारी बिहार बाल भवन, गयाजी में दो दिवसीय बाल अखबार निर्माण कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला का उद्देश्य बच्चों को लेखन, संपादन, समाचार लेखन, रचनात्मक अभिव्यक्ति और सामूहिक रूप से बाल पत्रिका तैयार करने की प्रक्रिया से परिचित कराना रहा।
दो दिनों तक चली कार्यशाला में बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। उन्होंने अपनी कल्पनाओं, अनुभवों और संवेदनाओं को कहानी, कविता, आपबीती, संस्मरण और लेख सहित विभिन्न रचनात्मक विधाओं के माध्यम से कागज पर उतारा।
आसपास की दुनिया को बच्चों ने दी अपनी नजर
कार्यशाला में बच्चों ने विद्यालय, परिवार, प्रकृति, खेल, दोस्ती और समाज से जुड़े विषयों पर अपनी रचनाएं तैयार कीं। बच्चों ने अपने आसपास घटने वाली छोटी-छोटी घटनाओं को अपनी नजर से देखने और उन्हें शब्दों में अभिव्यक्त करने का प्रयास किया।
इस दौरान बच्चों को यह समझने का अवसर मिला कि अखबार और पत्रिका केवल समाचारों का संग्रह नहीं होते, बल्कि समाज को देखने, समझने और अपनी बात कहने का माध्यम भी हैं। कार्यशाला ने बच्चों के भीतर छिपी लेखन प्रतिभा और स्वतंत्र सोच को सामने लाने का मंच प्रदान किया।
14 सितंबर को प्रकाशित होगी बाल पत्रिका
कार्यशाला में तैयार बच्चों की चयनित रचनाओं को संकलित कर बाल पत्रिका के रूप में प्रकाशित किया जाएगा। इसका विमोचन आगामी 14 सितंबर 2026 को हिंदी दिवस के अवसर पर किया जाएगा। यह पत्रिका बच्चों की रचनात्मकता, कल्पनाशीलता और अभिव्यक्ति का दस्तावेज बनेगी।
बच्चों की आवाज को समाज तक पहुंचाने की पहल
प्रमंडल कार्यक्रम समन्वयक राजीव रंजन श्रीवास्तव ने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि बच्चों के भीतर सवाल पूछने, अपने अनुभव साझा करने और अपनी बात कहने की अद्भुत क्षमता होती है। बाल अखबार निर्माण जैसी गतिविधियां बच्चों को केवल लिखना नहीं सिखातीं, बल्कि उन्हें अपने आसपास की दुनिया को समझने और उस पर स्वतंत्र दृष्टि विकसित करने का अवसर देती हैं।
उन्होंने कहा कि किलकारी का उद्देश्य बच्चों को ऐसा मंच उपलब्ध कराना है, जहां उनकी आवाज और रचनात्मकता समाज तक पहुंच सके। बच्चों द्वारा तैयार की जा रही बाल पत्रिका इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
