GCC देशों में भारतीय प्रवासी श्रमिकों की वेतन चोरी का बड़ा खुलासा, CUSB के अध्ययन में सामने आई गंभीर समस्या

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आर्यावर्त वाणी | गयाजी | 13 अगस्त 2026,

गयाजी। खाड़ी देशों में रोजगार के लिए जाने वाले भारतीय प्रवासी श्रमिकों के सामने सिर्फ काम और कमाई की चुनौती नहीं है, बल्कि उन्हें वेतन चोरी और बकाया मजदूरी की समस्या का भी सामना करना पड़ता है। दक्षिण बिहार केन्द्रीय विश्वविद्यालय (CUSB) के शोधकर्ताओं के एक अध्ययन में प्रवासी श्रमिकों के वेतन से जुड़े शोषण और भारत लौटने के बाद बकाया राशि की वसूली में आने वाली परेशानियों को सामने लाया गया है।

यह अध्ययन CUSB के आर्थिक अध्ययन एवं नीति विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. फ़िरदौस फ़ातिमा रिज़वी और उनके शोधार्थी विक्रम ने किया है। शोध आलेख ‘Wage Theft and Post-Return Dues Recovery among Indian Migrants from GCC Region’ शीर्षक से Economic & Political Weekly के हालिया अंक में प्रकाशित हुआ है।

385 लौटे प्रवासी श्रमिकों से जुटाया गया क्षेत्रीय साक्ष्य

अध्ययन के लिए बिहार के सीवान जिले से लौटे 385 प्रवासी श्रमिकों से क्षेत्रीय स्तर पर जानकारी जुटाई गई। शोधकर्ताओं ने पाया कि कई श्रमिकों के लिए विदेश में काम करने के दौरान हुए श्रम शोषण का असर स्वदेश लौटने के बाद भी खत्म नहीं होता। बकाया वेतन और अन्य रोजगार संबंधी देय राशि की वसूली उनके लिए बड़ी चुनौती बनी रहती है।

बिहार देश के प्रमुख श्रम-प्रेषक राज्यों में शामिल है। राज्य में रोजगार के सीमित अवसर, औद्योगिकीकरण और शहरीकरण का अपेक्षाकृत निम्न स्तर तथा विकास संबंधी चुनौतियां बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार की तलाश में दूसरे राज्यों और विदेशों की ओर जाने के लिए प्रेरित करती हैं। इनमें GCC क्षेत्र के देश भी प्रमुख गंतव्य हैं।

वेतन चोरी कई रूपों में

शोध में ‘वेतन चोरी’ को कर्मचारियों को कानूनी रूप से देय वेतन और रोजगार संबंधी लाभों से अनुचित या अवैध तरीके से वंचित किए जाने के रूप में देखा गया है। इसमें वेतन का भुगतान नहीं करना, वेतन रोकना, गैर-कानूनी कटौती करना और रोजगार से जुड़े लाभों से वंचित करना जैसी स्थितियां शामिल हो सकती हैं।

शोधकर्ताओं के अनुसार, केवल श्रमिकों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं है। जब नियोक्ता के पास वेतन और रोजगार की शर्तों पर अधिक नियंत्रण हो तथा श्रमिक के भारत लौटने के बाद गंतव्य देश की संस्थागत व्यवस्था तक उसकी पहुंच सीमित हो जाए, तब असमानता और बढ़ सकती है।

इलेक्ट्रॉनिक वेतन भुगतान और नियोक्ता की जवाबदेही पर जोर

अध्ययन में GCC देशों में नियोक्ताओं और वेतन भुगतान की निगरानी को और मजबूत करने की आवश्यकता बताई गई है। शोधकर्ताओं ने अनिवार्य इलेक्ट्रॉनिक वेतन भुगतान प्रणाली, नियोक्ताओं की जवाबदेही, प्रभावी प्रवर्तन व्यवस्था, संस्थागत उत्तरदायित्व और सीमा-पार सहयोग जैसे उपायों की आवश्यकता पर जोर दिया है।

शोध का उद्देश्य सिर्फ समस्या को सामने लाना नहीं, बल्कि प्रवासी श्रमिकों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए बेहतर नीतिगत व्यवस्था की जरूरत की ओर ध्यान आकर्षित करना भी है।

CUSB कुलपति ने दी बधाई

दक्षिण बिहार केन्द्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह ने अध्ययन के लिए डॉ. फ़िरदौस फ़ातिमा रिज़वी और शोधार्थी विक्रम को बधाई दी है। उन्होंने इस महत्वपूर्ण विषय पर किए गए शोध को प्रवासी श्रमिकों से जुड़े नीति विमर्श के लिए उपयोगी बताया।

यह अध्ययन भारत से GCC देशों की ओर होने वाले श्रम प्रवासन के उस पहलू को सामने लाता है, जिस पर अक्सर प्रवासियों की कमाई और विदेश से भेजे जाने वाले धन के संदर्भ में तो चर्चा होती है, लेकिन वेतन अधिकार और भारत लौटने के बाद बकाया राशि की वसूली की समस्या अपेक्षाकृत कम सामने आती है।

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