सीयूएसबी के भूगोल विभाग का शोध अंतरराष्ट्रीय जर्नल में प्रकाशित, स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच की असमानताओं का किया वैज्ञानिक विश्लेषण
आर्यावर्त वाणी | गयाजी | 06 अगस्त 2026,
गयाजी। दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय (सीयूएसबी) ने शोध एवं अकादमिक उत्कृष्टता के क्षेत्र में एक और उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। विश्वविद्यालय के भूगोल विभाग की अध्यक्ष प्रो. किरन कुमारी, शोधार्थी आकाश कुमार तथा विकास अध्ययन विभाग के शोधार्थी संजय कुमार का संयुक्त शोध विश्व की प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिका अफ्रीकन एंड एशियन स्टडीज़ में प्रकाशित हुआ है। यह शोध पत्रिका स्कोपस Q1 तथा वेब ऑफ साइंस (SSCI) में अनुक्रमित है और सामाजिक विज्ञान के क्षेत्र की प्रमुख वैश्विक शोध पत्रिकाओं में शामिल है।
राजस्थान के अलवर जिले पर केंद्रित है शोध
प्रकाशित शोध का विषय “राजस्थान के अलवर जिले में स्वास्थ्य सेवाओं तक स्थानिक पहुँच में असमानताएँ एवं सामाजिक-आर्थिक बाधाएँ” है। इसमें अलवर जिले के ग्रामीण एवं अर्द्धशहरी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुँच में आने वाली भौगोलिक, सामाजिक एवं आर्थिक चुनौतियों का वैज्ञानिक अध्ययन किया गया है।
इस शोध के सह-लेखकों में डॉ. भावना वैष्णव (एनसीईआरटी, भुवनेश्वर), आकाश कुमार, संजय कुमार तथा प्रो. किरन कुमारी शामिल हैं।
386 परिवारों के सर्वेक्षण पर आधारित अध्ययन
सीयूएसबी के जनसंपर्क पदाधिकारी मोहम्मद मुदस्सीर आलम ने बताया कि शोध के दौरान 386 परिवारों का विस्तृत सर्वेक्षण किया गया। आंकड़ों के विश्लेषण के लिए प्रधान अवयव विश्लेषण (Principal Component Analysis) तथा बहुचर लॉजिस्टिक प्रतिगमन विश्लेषण (Multivariate Logistic Regression Analysis) जैसी उन्नत सांख्यिकीय तकनीकों का उपयोग किया गया।
शोध में सामने आईं कई महत्वपूर्ण चुनौतियाँ
अध्ययन में पाया गया कि कम आय वाले परिवार, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, महिलाएँ और वृद्धजन स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँचने में सबसे अधिक कठिनाइयों का सामना करते हैं। शोध के अनुसार लगभग 50 प्रतिशत लोगों को उपचार के लिए 10 किलोमीटर से अधिक दूरी तय करनी पड़ती है, जबकि 92 प्रतिशत उत्तरदाताओं को सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं की पर्याप्त जानकारी नहीं है।
स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए दिए गए सुझाव
शोध में ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए हैं। इनमें ग्रामीण स्वास्थ्य अवसंरचना का विस्तार, एम्बुलेंस एवं परिवहन सुविधाओं को सुदृढ़ करना, सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं के प्रति व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाना तथा भौगोलिक सूचना प्रणाली (GIS) आधारित स्वास्थ्य नियोजन को नीति निर्माण का हिस्सा बनाना प्रमुख है।
अध्ययन में कहा गया है कि स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार की गई योजनाएँ स्वास्थ्य सेवाओं में व्याप्त असमानताओं को कम करने तथा प्रत्येक नागरिक तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाएँ पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
कुलपति ने दी बधाई
सीयूएसबी के कुलपति प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह एवं कुलसचिव प्रो. नरेंद्र कुमार राणा ने इस उपलब्धि पर प्रो. किरन कुमारी और उनकी शोध टीम को बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं। कुलपति ने कहा कि यह शोध प्रकाशन विश्वविद्यालय के भूगोल विभाग की महत्वपूर्ण शैक्षणिक उपलब्धि है, जिससे स्वास्थ्य भूगोल, क्षेत्रीय नियोजन और सतत विकास के क्षेत्र में सीयूएसबी की राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा और मजबूत होगी।
शोधकर्ताओं ने क्या कहा
प्रो. किरन कुमारी ने कहा कि यह अध्ययन ग्रामीण भारत में स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच की वास्तविक चुनौतियों को समझने तथा नीति-निर्माताओं को तथ्य आधारित सुझाव उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।
वहीं शोधार्थी आकाश कुमार ने कहा कि अध्ययन के निष्कर्ष स्वास्थ्य सेवाओं की समान उपलब्धता सुनिश्चित करने, सामाजिक असमानताओं को कम करने तथा साक्ष्य-आधारित जनस्वास्थ्य नीतियों के निर्माण में उपयोगी साबित होंगे।
