सीयूएसबी के गुरु दक्षता कार्यक्रम के प्रतिभागियों ने जाना गया-बोधगया की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का महत्व
आर्यावर्त वाणी | गयाजी | 13 जुलाई 2026,
गयाजी: दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय (सीयूएसबी) के मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र (एमएमटीटीसी) द्वारा आयोजित 24 दिवसीय आवासीय ‘गुरु दक्षता कार्यक्रम’ के प्रतिभागी शिक्षकों ने गयाजी एवं बोधगया के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक स्थलों का अध्ययन भ्रमण किया। इस भ्रमण का उद्देश्य शिक्षकों को भारतीय ज्ञान परंपरा, सांस्कृतिक विरासत, अनुभवात्मक अधिगम और राष्ट्रीय मूल्यों से प्रत्यक्ष रूप से जोड़ना था, ताकि वे इन अनुभवों को अपने शिक्षण, शोध और अकादमिक नेतृत्व में प्रभावी ढंग से शामिल कर सकें।
विष्णुपद मंदिर की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत से हुए परिचित
अध्ययन भ्रमण के दौरान प्रतिभागियों ने गयाजी के विश्व प्रसिद्ध विष्णुपद मंदिर का भ्रमण किया। यहां तीर्थ पुरोहित एवं मंदिर समिति के पूर्व सदस्य गौतम कुमार ने मंदिर के ऐतिहासिक, पौराणिक और सांस्कृतिक महत्व की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि पितृपक्ष महापर्व केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि भारतीय परिवार व्यवस्था, पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता, सामाजिक उत्तरदायित्व और सांस्कृतिक निरंतरता का जीवंत प्रतीक है।
शंकराचार्य मठ में भारतीय वेदांत परंपरा की मिली जानकारी
बोधगया स्थित शंकराचार्य मठ में स्वामी विवेकानंद गिरि ने प्रतिभागियों को मठ के इतिहास और शैक्षिक महत्व से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि यह मठ भारतीय वेदांत परंपरा, आध्यात्मिक साधना और ज्ञान संरक्षण का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। यहां स्थापित मां वाराही, मां अन्नपूर्णा, आदि गुरु शंकराचार्य, भगवान बुद्ध, मां काली और मां दुर्गा की प्रतिमाएं भारतीय संस्कृति की समन्वयवादी और समावेशी परंपरा का परिचय देती हैं।
महाबोधि मंदिर में समझा विश्व शांति का संदेश
भ्रमण के अंतिम चरण में प्रतिभागियों ने यूनेस्को विश्व धरोहर में शामिल महाबोधि मंदिर का अवलोकन किया। यहां उन्होंने भगवान बुद्ध के ज्ञान प्राप्ति स्थल के ऐतिहासिक महत्व के साथ-साथ बौद्ध दर्शन के वैश्विक प्रभाव, विश्व शांति, करुणा, अहिंसा और मानव कल्याण के संदेश को निकट से समझा।
नई शिक्षा नीति के अनुरूप शिक्षकों को तैयार करने का प्रयास
कार्यक्रम समिति के सदस्यों ने बताया कि मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण योजना का उद्देश्य केवल शिक्षकों के विषयगत ज्ञान को अद्यतन करना नहीं है, बल्कि उन्हें ऐसे शैक्षिक नेतृत्व के लिए तैयार करना है जो भारतीयता, नवाचार, अनुसंधान, नैतिकता, समावेशिता और वैश्विक दृष्टिकोण के बीच संतुलन स्थापित कर सके। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 भी ऐसे शिक्षकों की परिकल्पना करती है, जो ज्ञान के साथ-साथ संस्कृति, चरित्र और राष्ट्र निर्माण के मूल्यों को भी आगे बढ़ाएं।
इनके मार्गदर्शन में हुआ अध्ययन भ्रमण
यह अध्ययन भ्रमण डॉ. तरुण कुमार त्यागी (निदेशक, मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र), डॉ. हेमंत कुमार सिंह, डॉ. आतिश दाश तथा डॉ. प्रज्ञा गुप्ता के निर्देशन एवं मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। प्रतिभागी शिक्षकों ने इस भ्रमण को भारतीय सांस्कृतिक विरासत, सामाजिक उत्तरदायित्व और राष्ट्रीय चेतना को समझने की दिशा में अत्यंत प्रेरणादायक एवं ज्ञानवर्धक अनुभव बताया।
