तिरंगे में लिपटकर घर लौटा जहानाबाद का लाल: अंतिम विदाई में उमड़ा जनसैलाब
आर्यावर्त वाणी | जहानाबाद | 14 जून 2026,
जहानाबाद: असम के जोरहाट में हुए दर्दनाक विमान हादसे में शहीद फ्लाइट लेफ्टिनेंट शुभम कुमार रविवार को अंतिम बार अपने गांव लौटे। तिरंगे में लिपटा उनका पार्थिव शरीर जैसे ही उनके पैतृक गांव बनवरिया पहुंचा, पूरा इलाका गम और गर्व की मिश्रित भावनाओं से भर उठा।
बिहटा छावनी से सेना के विशेष वाहन द्वारा उनके पार्थिव शरीर को सड़क मार्ग से गांव लाया गया। पूरे रास्ते सैकड़ों नौजवान और ग्रामीण हाथों में तिरंगा लिए भारत माता की जय, वीर जवान अमर रहे और “जब तक सूरज चांद रहेगा, शुभम तुम्हारा नाम रहेगा” जैसे नारों से वातावरण को गुंजायमान करते रहे। हर आंख नम थी, लेकिन अपने वीर सपूत पर गर्व भी उतना ही था।
अंतिम दर्शन के लिए उमड़ा जनसैलाब
शहीद शुभम कुमार के पार्थिव शरीर को सबसे पहले बनवरिया स्थित शिवरतन उच्च विद्यालय के मैदान में अंतिम दर्शन के लिए रखा गया। वहां हजारों की संख्या में लोग अपने वीर बेटे को अंतिम श्रद्धांजलि देने पहुंचे।
विद्यालय परिसर में शोक और सम्मान का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। बुजुर्गों की आंखें नम थीं, युवाओं के चेहरे पर गर्व और पीड़ा दोनों झलक रहे थे, जबकि महिलाएं अपने आंसुओं को रोक नहीं पा रही थीं। हर कोई अपने गांव के उस बेटे को अंतिम बार देखने आया था जिसने अपने सपनों से आगे बढ़कर देश को सर्वोपरि माना।
जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने दी श्रद्धांजलि
इस अवसर पर बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे। जहानाबाद के सांसद सुरेन्द्र यादव, पूर्व सांसद जगदीश शर्मा, जहानाबाद विधायक राहुल कुमार, घोसी विधायक ऋतुराज, हुलासगंज प्रखंड प्रमुख सत्येंद्र शर्मा, जदयू नेता राजू सिंह सहित कई राजनीतिक हस्तियों ने शहीद को श्रद्धांजलि अर्पित की।
वहीं प्रशासनिक अधिकारियों में मगध क्षेत्र के आईजी विकास वैभव, जहानाबाद की जिलाधिकारी अलंकृता पांडे, पुलिस अधीक्षक अपराजित लोहान, घोसी एसडीपीओ कीर्ति किरण समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। सभी ने पुष्पचक्र एवं पुष्पमाला अर्पित कर शहीद को नमन किया और शोक संतप्त परिवार के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं।
मां अपने बेटे का चेहरा भी नहीं देख सकी
श्रद्धांजलि कार्यक्रम के बाद शहीद के पार्थिव शरीर को उनके पैतृक निवास पर ले जाया गया, जहां उनकी मां, पिता और अन्य परिजनों ने अंतिम दर्शन किए।
लेकिन इस पूरे घटनाक्रम का सबसे मार्मिक और हृदयविदारक क्षण वह था, जब एक मां अपने बेटे का अंतिम बार चेहरा तक नहीं देख सकी।
सेना के अधिकारियों ने परिजनों को बताया कि विमान दुर्घटना इतनी भीषण थी कि शहीद का शरीर गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो चुका था। ताबूत को खोलना संभव नहीं था।
जिस मां ने अपने बेटे को जन्म दिया, उसे पाल-पोसकर बड़ा किया, उसके सपनों को संजोया और उसकी सफलता पर गर्व किया, वही मां अपने कलेजे के टुकड़े का अंतिम बार चेहरा भी नहीं देख सकी। वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें इस दृश्य को देखकर भर आईं।
मां की चीखें और विलाप सुनकर माहौल और भी गमगीन हो गया। यह दर्द शब्दों में बयान करना मुश्किल था।
पिता और दादा के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे
शहीद के पिता अमरेंद्र शर्मा और दादा योगेंद्र शर्मा उर्फ भोला बाबू का रो-रोकर बुरा हाल था। जिस बेटे और पोते को लेकर उन्होंने अनगिनत सपने देखे थे, आज उसी को तिरंगे में लिपटा हुआ देखकर उनकी दुनिया जैसे उजड़ गई।
परिजनों की आंखों से बह रहे आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। गांव के लोग उन्हें ढांढस बंधाने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन इस अपूरणीय क्षति के आगे हर सांत्वना छोटी पड़ रही थी।
गया के विष्णुपद श्मशान घाट पर दी गई अंतिम विदाई
कुछ समय तक अंतिम दर्शन के बाद शहीद शुभम कुमार के पार्थिव शरीर को गया जी स्थित विष्णुपद श्मशान घाट ले जाया गया। वहां पूरे सैन्य सम्मान के साथ उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया।
सैन्य जवानों ने बंदूकों की सलामी देकर अपने साथी योद्धा को अंतिम विदाई दी। शोक धुन के बीच पूरा वातावरण भावुक हो उठा। इसके बाद वैदिक रीति-रिवाजों के अनुसार उनका अंतिम संस्कार संपन्न कराया गया।
हमेशा याद रखा जाएगा बनवरिया का यह वीर बेटा
फ्लाइट लेफ्टिनेंट शुभम कुमार की शहादत केवल उनके परिवार का दुख नहीं है, बल्कि पूरे जहानाबाद, बिहार और देश की क्षति है। एक साधारण किसान परिवार से निकलकर भारतीय वायुसेना में अधिकारी बनने तक का उनका सफर हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा रहेगा।
आज उनका शरीर भले ही पंचतत्व में विलीन हो गया हो, लेकिन उनका साहस, उनका समर्पण और उनका बलिदान हमेशा लोगों के दिलों में जीवित रहेगा।
बनवरिया गांव का यह वीर सपूत अब इतिहास के उन अमर नामों में शामिल हो गया है, जिन्हें समय कभी भुला नहीं पाएगा।
“जब तक सूरज चांद रहेगा, शुभम तुम्हारा नाम रहेगा…”
