पराली में जानबूझकर आग, फिर मुआवजे की मांग, गयाजी में बढ़ता खतरनाक ट्रेंड उजागर
आर्यावर्त वाणी | गयाजी | 19 अप्रैल 2026,
गयाजी: जिले के ग्रामीण इलाकों में एक चिंताजनक प्रवृत्ति तेजी से उभर रही है, जहां कुछ लोग गेहूं की पराली या डंठल में जानबूझकर आग लगाकर इसे आकस्मिक घटना बताने की कोशिश कर रहे हैं और बाद में प्रशासन से मुआवजा मांग रहे हैं। ताजा मामला रविवार (19 अप्रैल 2026) को अतरी थाना क्षेत्र के ग्राम टेटुआ और खिजरसराय क्षेत्र के नेली थाना इलाके से सामने आया, जहां ग्रामीणों द्वारा खेतों में आग लगाने की सूचना पर फायर ब्रिगेड को बार-बार बुलाया गया।
फायर ब्रिगेड पर बढ़ रहा दबाव
ऐसी घटनाओं से दमकल विभाग पर अनावश्यक दबाव पड़ रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद टीमों को मौके पर पहुंचना पड़ता है, जिससे वास्तविक आपात स्थितियों में संसाधनों की उपलब्धता प्रभावित होती है। कई बार असली घटनाओं में समय पर सहायता नहीं पहुंच पाने का खतरा भी बढ़ जाता है।
मुआवजा प्रणाली का हो रहा दुरुपयोग
सरकार द्वारा प्राकृतिक आपदाओं के पीड़ितों के लिए चलाई जा रही राहत योजनाओं का उद्देश्य जरूरतमंदों की सहायता करना है। लेकिन जब जानबूझकर आग लगाकर इसे आपदा का रूप दिया जाता है, तो यह सरकारी धन के साथ सीधा धोखाधड़ी का मामला बन जाता है। इससे वास्तविक पीड़ितों के अधिकार भी प्रभावित होते हैं।
कानूनन गंभीर अपराध
ऐसे मामलों में Indian Penal Code Section 435 और Indian Penal Code Section 420 सहित अन्य धाराएं लागू हो सकती हैं। इसके अलावा Disaster Management Act 2005 और Environment Protection Act 1986 के तहत भी कार्रवाई संभव है। दोषी पाए जाने पर जेल और आर्थिक दंड दोनों का प्रावधान है।
प्रशासन के सामने चुनौती:
स्थानीय प्रशासन के लिए असली और फर्जी मामलों की पहचान करना एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। इसके लिए ड्रोन सर्विलांस, पंचायत स्तर पर निगरानी और फायर ब्रिगेड कॉल की जांच जैसे उपायों पर जोर दिया जा रहा है। साथ ही, जवाबदेही तय करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है।
विशेषज्ञों की चेतावनी
विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल कानूनी नहीं, बल्कि सामाजिक नैतिकता का भी गंभीर मुद्दा है। यदि समय रहते इस प्रवृत्ति पर रोक नहीं लगाई गई, तो यह व्यापक रूप ले सकती है और सरकारी तंत्र पर अतिरिक्त बोझ डाल सकती है।
पराली जलाकर मुआवजा लेने की यह प्रवृत्ति न सिर्फ गैरकानूनी है, बल्कि समाज और प्रशासन दोनों के लिए नुकसानदायक साबित हो रही है। ऐसे में सख्त कार्रवाई, प्रभावी निगरानी और व्यापक जनजागरूकता ही इस समस्या का स्थायी समाधान हो सकता है।
